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अमेरिका का टैरिफ वापस: जिस टैरिफ के दम पर अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के देशों को झुकने को मजबूर कर रहे थे, अब उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. जब ट्रप के हाथ से उनका ये हथियार छिन गया तो भला वो कैसे चीन जैसे देश को सोयाबीन खरीदने पर मजबूर कर पाएंगे?
अब अमेरिकी सोयाबीन चीन के लिए मजबूरी नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को नकार दिया है, उसके बाद उन्हें झटका जरूर लगा. हालांकि इतना कम नहीं है, अब इसकी वजह से दूसरे देश भी अपनी पॉलिसी में बदलाव करने के लिए तैयार हैं. कहां पहले डोनाल्ड ट्रंप अलग-अलग देशों को टैरिफ की धौंस दिखाकर डील के लिए मजबूर कर रहे थे, वहीं अब इस टैरिफ पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से लगे झटके के बाद हालात बदल रहे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि अब चीन भी उसे झटका देने वाला है, शायद अमेरिका से बड़ी मात्रा में सोयाबीन खरीदने के अपने वादे को पूरा न करे.
लेकफ्रंट फ्यूचर्स के वरिष्ठ सलाहकार डैरिन फेसलर ने कहा कि ट्रंप चीन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे. अब सवाल यह है कि जब टैरिफ का दबाव हट गया है, तो क्या चीन फिर भी अमेरिकी सोयाबीन खरीदेगा? उन्होंने कहा कि अमेरिकी सोयाबीन अभी भी ब्राजील से महंगा है. अगर चीन पर कोई मजबूरी नहीं है, तो वह अमेरिका से क्यों खरीदेगा? ये ट्रंप के लिए झटका होगा क्योंकि 4 फरवरी से कीमतों में लगभग 8.49% की बढ़त हुई थी, जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा था कि चीन अतिरिक्त 80 लाख मीट्रिक टन अमेरिकी सोयाबीन खरीदेगा.
अमेरिका का सोयाबीन क्यों नहीं खरीदेगा चीन?
- कई विश्लेषकों और कारोबारियों को पहले से ही शक था कि चीन इतनी बड़ी मात्रा में सोयाबीन क्यों खरीदेगा. चीन पहले ही 1.2 करोड़ मीट्रिक टन अमेरिकी सोयाबीन खरीद चुका है, जो अक्टूबर में हुए व्यापार समझौते के तहत उसकी प्रतिबद्धता थी. पिछले साल चीन ने कई महीनों तक अमेरिकी सोयाबीन से दूरी बनाई थी.
- चीन की सरकारी एजेंसी साइनोग्रेन ने अमेरिकी खेपों के लिए जगह बनाने के लिए सार्वजनिक नीलामी भी की थी, जबकि ब्राजील में रिकॉर्ड स्तर की फसल आने की उम्मीद है, जहां से चीन सस्ता सोयाबीन खरीद सकता है.
- टैरिफ हटने के बाद अमेरिकी सोयाबीन की प्रतिस्पर्धा करना और मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ब्राज़ील में इस समय भारी पैदावार हो रही है और वहां का सोयाबीन काफी सस्ता है.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल के लिए बने कानून के तहत टैरिफ लगाकर अपनी सीमा से अधिक अधिकारों का इस्तेमाल किया. अब यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन आगे किस कानूनी रास्ते से नए टैरिफ लागू करेगा.
क्योंक चीन को सोयबीन बेचना चाहता है अमेरिका?
चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन आयातक है. इस फैसले से बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है. व्यापारी अब यह देखेंगे कि ट्रंप प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और क्या चीन अमेरिका से खरीद जारी रखेगा या ब्राजील और अर्जेंटीना की ओर रुख करेगा, जहां अमेरिका जैसा व्यापारिक तनाव नहीं है. उधर अमेरिकी किसान लगातार चौथे साल कम या नकारात्मक मुनाफे का सामना कर रहे हैं. सरकार से रिकॉर्ड सहायता मिलने के बावजूद इस साल कृषि आय घटने की आशंका है. एग रिसोर्स कंपनी के अध्यक्ष डैन बैस ने कहा कि राष्ट्रपति के हाथ से टैरिफ का हथियार छिनने के बाद से अब वह आगे कौन सा नया तरीका अपनाएंगे, यह साफ नहीं है, ऐसे में अनिश्चितता भी बढ़ी है और शुक्रवार को सोयाबीन की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें





