आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में इन दिनों एक ऐसी घटना घटी है, जिसने बड़े-बड़े जानकारों को हैरान कर दिया है. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे बाजार में अचानक कोई बहुत ताकतवर मशीन आ जाए, लेकिन उसे बनाने वाले का किसी को पता न हो. इस रहस्यमयी मशीन यानी AI मॉडल का नाम हंटर अल्फा (Hunter Alpha) रखा गया है. यह 11 मार्च को OpenRouter नाम की एक वेबसाइट पर अचानक दिखाई दिया. मजे की बात यह है कि इसे बनाने वाली कंपनी ने अपना नाम गुप्त रखा है. कंप्यूटर की भाषा में इसे ‘स्टेल्थ मॉडल’ कहा जा रहा है, जिसका मतलब होता है कि इसे चुपके से जांचने के लिए दुनिया के सामने लाया गया है.
इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश में जब विशेषज्ञों ने इसी AI से सवाल पूछे तो कुछ दिलचस्प बातें सामने आईं. जब इस मॉडल से पूछा गया कि उसे किसने बनाया है, तो उसने साफ-साफ बताने से मना कर दिया. लेकिन उसने यह जरूर बताया कि उसे चीनी भाषा में ट्रेनिंग दी गई है और उसके पास मई 2025 तक की दुनियाभर की जानकारी है. यह तारीख बहुत महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि चीन की मशहूर AI कंपनी डीपसीक (DeepSeek) के पास भी लगभग इतनी ही जानकारी है. इसी वजह से लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि शायद यह डीपसीक का ही कोई नया और गुप्त प्रोजेक्ट है. हालांकि, न तो OpenRouter ने और न ही डीपसीक ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान दिया है.
क्या है हंटर अल्फा की ताकत?
हंटर अल्फा की ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसमें 1 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं. आसान भाषा में कहें तो पैरामीटर्स का मतलब दिमाग की उस क्षमता से है, जिससे वह भाषा को समझता है और जवाब देता है. 1 ट्रिलियन का मतलब 10 खरब होता है, जो कि बहुत ही विशाल नंबर है. इसके अलावा, इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी याददाश्त है. यह एक बार में 10 लाख शब्द (1 मिलियन टोकन) तक पढ़ और समझ सकता है. यानी आप इसे एक मोटी किताब दे दें, तो यह उसे चुटकियों में पढ़कर उसके बारे में आपके हर सवाल का जवाब दे देगा.
अनुमान है कि गूगल का मॉडल जेमिनी अल्ट्रा (Gemini Ultra) भी 1 ट्रिलियन पैरामीटर्स पर काम करता है. इसी तरह अगर जीपीटी 4 की बात करें तो 1.8 ट्रिलियन पैरामीटर हैं. मेटा का Llama 3 केवल 405 बिलियन पैरामीटर्स, जबकि Grok 3 लगभग 300 बिलियन पैरामीटर पर ही काम करता है.
एआई इंजीनियर नबील हौम (Nabil Haouam) कहते हैं, “इतनी बड़ी याददाश्त और सोचने-समझने की जबरदस्त ताकत वाला मॉडल अगर मुफ्त में मिल रहा है, तो यह वाकई में एक बड़ी और खास बात है. आमतौर पर इतनी खूबियों वाले मॉडल के लिए बहुत पैसे चुकाने पड़ते हैं.”
डीपसीक पर ही शक क्यों?
दुनियाभर के जानकारों के बीच अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह सच में डीपसीक का अगला बड़ा मॉडल V4 है? चीन में पहले से ही खबरें थीं कि डीपसीक अपना नया और अपडेटेड वर्जन लाने की तैयारी में है. हंटर अल्फा के काम करने का तरीका भी काफी हद तक डीपसीक जैसा ही है.
एआई एक्सपर्ट डैनियल ड्यूहर्स्ट (Daniel Dewhurst) का मानना है, “किसी भी AI के सोचने का एक खास तरीका होता है, जिसे छिपाना मुश्किल है. हंटर अल्फा के तर्क करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही है, जैसा हमने पहले के डीपसीक मॉडल्स में देखा है.” हालांकि, कुछ लोग इससे असहमत भी हैं. इंडिपेंडेंट एआई टेस्टर उमुर ओज़कुल (Umur Ozkul) का कहना है कि इसके बनावट में कुछ छोटे-मोटे अंतर हैं, जो इसे डीपसीक से अलग दिखाते हैं.
कंपनी क्यों छिपा रही है अपना नाम?
कंपनियों द्वारा नाम छिपाया जाना एक नई रणनीति बन गई है. कंपनियां बिना अपना नाम बताए नया मॉडल बाजार में उतार देती हैं, ताकि लोग बिना किसी पक्षपात के उसे इस्तेमाल करें और कंपनी को पता चल सके कि उनका मॉडल असल में कितना अच्छा काम कर रहा है. इससे पहले ‘पोनी अल्फा’ नाम का एक मॉडल भी इसी तरह आया था, जिसे बाद में एक बड़ी कंपनी ने अपना बताया था.
हंटर अल्फा के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी भी दी गई है. इसके प्रोफाइल में साफ लिखा है कि आप इससे जो भी बात करेंगे या जो भी जानकारी इसे देंगे, उसे रिकॉर्ड किया जा सकता है ताकि इस मॉडल को और बेहतर बनाया जा सके. इसके बावजूद, डेवलपर्स और कंप्यूटर इंजीनियरों के बीच इसे लेकर भारी उत्साह है. लॉन्च होने के कुछ ही दिनों के भीतर यह 160 अरब से ज्यादा शब्दों पर काम कर चुका है. लोग इसका इस्तेमाल नए सॉफ्टवेयर बनाने और जटिल काम निपटाने में कर रहे हैं. फिलहाल, पूरी दुनिया इस रहस्य के खुलने का इंतजार कर रही है कि आखिर इस हंटर अल्फा का असली मालिक कौन है.





