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कोलकाता को ‘भारत का लंदन’ कहा जाता है. यहां की ब्रिटिश काल की आलीशान इमारतें, ऐतिहासिक चर्च, पुराने पुल और यूरोपीय वास्तुकला आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं. विक्टोरिया मेमोरियल से लेकर हावड़ा ब्रिज तक, जानिए इस शहर की खासियत…
भारत में कई शहर अपनी अलग पहचान के लिए मशहूर हैं. कोई गुलाबी शहर के नाम से जाना जाता है, तो किसी को झीलों का शहर कहा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘भारत का लंदन’ कहा जाता है? यहां की चौड़ी सड़कें, पुरानी इमारतें, ऐतिहासिक चर्च और औपनिवेशिक दौर की वास्तुकला आज भी लोगों को ब्रिटिश शासन के समय की याद दिलाती हैं. यह शहर है पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, जिसे पहले कलकत्ता के नाम से जाना जाता था.
कोलकाता का ब्रिटिश शासन से गहरा ऐतिहासिक रिश्ता रहा है. यह शहर साल 1772 से 1911 तक ब्रिटिश भारत की राजधानी था. उस समय यहां प्रशासन, व्यापार और शिक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियां होती थीं. अंग्रेजों ने शहर में अपने रहने, काम करने और प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से कई भव्य इमारतें बनवाईं.
इन इमारतों में यूरोपीय वास्तुकला की झलक साफ दिखाई देती है. इसी ऐतिहासिक विरासत और ब्रिटिश दौर के प्रभाव के कारण कोलकाता को ‘लंदन ऑफ इंडिया’ कहा जाने लगा. हालांकि, यह एक लोकप्रिय उपनाम है, कोई आधिकारिक सरकारी दर्जा नहीं.
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कोलकाता की पहचान की बात हो और विक्टोरिया मेमोरियल का नाम न आए, ऐसा हो नहीं सकता. सफेद संगमरमर से बनी यह भव्य इमारत शहर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल है. इसका निर्माण महारानी विक्टोरिया की याद में कराया गया था. इमारत के चारों ओर फैले हरे-भरे बगीचे और अंदर मौजूद संग्रहालय इसे खास बनाते हैं. यहां पर्यटक ब्रिटिश भारत के इतिहास से जुड़ी कई चीजें देख सकते हैं.
विक्टोरिया मेमोरियल के पास स्थित सेंट पॉल कैथेड्रल भी कोलकाता की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है. इसका निर्माण 1839 से 1847 के बीच हुआ था. चर्च की ऊंची मीनार, रंगीन कांच की खिड़कियां और गोथिक शैली की बनावट इसे बेहद आकर्षक बनाती है. इसकी वास्तुकला में यूरोपीय प्रभाव साफ नजर आता है.
बीबीडी बाग इलाके में स्थित राइटर्स बिल्डिंग कोलकाता की ऐतिहासिक इमारतों में से एक है. ब्रिटिश दौर में इसका इस्तेमाल ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों के कार्यालय के रूप में किया जाता था. वहीं, शहर का जनरल पोस्ट ऑफिस अपने विशाल गुंबद और भव्य बाहरी बनावट के लिए जाना जाता है. इन इमारतों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश शासन के समय कोलकाता कितना महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था.
कोलकाता की यात्रा हावड़ा ब्रिज देखे बिना अधूरी मानी जाती है. हुगली नदी पर बना यह विशाल पुल शहर की पहचान बन चुका है. इसे रवींद्र सेतु के नाम से भी जाना जाता है. नदी के किनारे प्रिंसेप घाट पर शाम बिताना भी अच्छा अनुभव हो सकता है. यहां से हुगली नदी और विद्यासागर सेतु का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है.




