Iran-US War News: ईरान युद्ध और भयावह होते जा रहा है. न तो ईरान झुकने को तैयार है और न अमेरिका-इजरायल छोड़ने को. अली खामेनेई को मारने के बाद अब इजरायल ने ईरान के नेशनल सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी को भी मार गिराया है. अब ईरान भी चुप नहीं बैठेगा. वह इसका बदला जरूर लेगा. इसकी झलक मंगलवार आधी रात को दिख गई. ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार कर दी. ईरान के इस अटैक में इजरायल को भी नुकसान हुआ है. एक इजरायली की मौत हुई है. इन सबके बीच ईरान जंग पर डोनाल्ड ट्रंप का मन भारी हो चुका है. रह-रहकर उनका दर्द छलक जा रहा है. अपनों की दगाबाजी देख वह फ्रस्ट्रेट हो चुके हैं. यही कारण है कि अब वह नाम लेकर अपने सहयोगी देशों को कोस रहे हैं.
ईरान जंग पर किस बात से नाराज हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने का एक बयान सामने आया है. इस बयान में उनका दर्द साफ छलक रहा है. वह इस बात से नाराज हैं कि नाटो देश ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल क्यों नहीं हो रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप के बयान में कहा गया है, ‘हमें हमारे ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने बताया है कि वे ईरान के ‘आतंकी शासन’ के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते.’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लगभग सभी देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए.’
ईरान के खिलाफ जंग में साथ आने की डोनाल्ड ट्रंप की अपील को उनके सहयोगियों ने ही खारिज कर दी है. फोटो- रायटर
डोनाल्ड ट्रंप का छलका दर्द
भले ही डोनाल्ड ट्रंप यह कह रहे हों कि नाटो देशों के रुख से उन्हें हैरानी नहीं हुई. मगर अंदर ही अंदर वह जल-भून रहे हैं. उन्हें नाटो पर गुस्सा आ रहा है. यही कारण है कि वह गम छिपाकर भी नहीं छिपा पा रहे हैं. अब तो वह नाम लेकर कोसने लगे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के रुख पर कहा, ‘मैं हमेशा मानता रहा हूं कि नाटो एकतरफा व्यवस्था है, हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन जरूरत के समय वे हमारे लिए कुछ नहीं करते.’
अब गम छिपा रहे हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘हमने ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को खत्म कर दिया है, और उनके शीर्ष नेतृत्व को भी लगभग समाप्त कर दिया है.’ उन्होंने कहा कि इन सैन्य सफलताओं के बाद अब सहयोगियों की मदद की जरूरत नहीं रही. उन्होंने कहा, ‘हम अब नाटो देशों की सहायता न तो चाहते हैं और न ही जरूरत है- हमें कभी थी भी नहीं.’
नाम लेकर ट्रंप ने कोसा
ट्रंप ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई साझेदारों का नाम लेकर भी यही रुख दोहराया और कहा, ‘हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है.’ उन्होंने एक दिन पहले ओवल ऑफिस में भी सहयोगी देशों के रवैये पर नाराजगी जताई थी. ब्रिटेन का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कुछ युद्धपोत और माइनस्वीपर भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन जवाब उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने बाद में कहा कि अब उनकी जरूरत नहीं है. मुझे मदद शुरुआत में चाहिए थी, जीत के बाद नहीं.’
डोनाल्ड ट्रंप ईरान जंग पर नाटो देशों के रवैये से नाराज हैं. (फोटो-पीटीआई)
अमेरिका को किस बात का गम
उन्होंने विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा रहा है. गौरतलब है कि 1949 में स्थापित नाटो सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर काम करता है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा सैन्य और वित्तीय योगदानकर्ता है. रक्षा खर्च और जिम्मेदारी के बंटवारे को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं.
क्यों ईरान में युद्ध लड़ रहा अमेरिका
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति का अहम मुद्दा रहा है. अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था, यह कहते हुए कि यह समझौता ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोकता. फिलहाल, अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ युद्ध का आगाज किया था. 28 फरवरी को अटैक में ईरान में तबाही मची थी. ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई मारे गए थे. तब से यह ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध जारी है.





