गोल्डन टेम्पल ही नहीं, अमृतसर की इन 3 देसी डिशेज के दीवाने हैं लोग, स्वाद ऐसा कि बार-बार आएगा मन!


जब भी पंजाब के अमृतसर का नाम आता है, तो सबसे पहले गोल्डन टेम्पल, जलियांवाला बाग और वाघा बॉर्डर की तस्वीर सामने आती है. लेकिन इस शहर की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है. अमृतसर अपने खानपान के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है. यहां की गलियों में मिलने वाला अमृतसरी कुलचा, मसालेदार छोले, लस्सी और परांठों का स्वाद तो आपने सुना ही होगा, लेकिन यहां कुछ ऐसे पारंपरिक व्यंजन भी हैं, जिन्हें चखने के लिए लोग खास तौर पर पहुंचते हैं. इनमें अमृतसरी मछली, भुना गोश्त और दाल से तैयार होने वाली वड़ियां शामिल हैं. इन व्यंजनों की खासियत सिर्फ इनका स्वाद नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपी खानपान की परंपरा और इतिहास भी है.

1. अमृतसरी मछली: मुगलई स्वाद से जुड़ी खास पहचान
अमृतसर की मशहूर डिशेज में अमृतसरी मछली का नाम सबसे ऊपर आता है. इसे स्थानीय भाषा में अमृतसरी मच्छी भी कहा जाता है. यह बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम होती है. इसे बनाने के लिए आमतौर पर सिंघाड़ा या सोल जैसी मीठे पानी की मछलियों का इस्तेमाल किया जाता है. मछली को मसालों और बेसन के घोल में लपेटकर तला जाता है. इसके साथ पुदीने और धनिये की चटनी परोसी जाती है.

Incredible India के मुताबिक, इस व्यंजन की जड़ें उस दौर से जुड़ी हैं, जब नदियों के किनारे रहने वाले गरीब समुदायों के लिए मछली आसानी से उपलब्ध होने वाला भोजन थी. वे बड़ी मात्रा में मछली पकाते थे. धीरे-धीरे मछली के व्यंजन मुगलई खानपान का हिस्सा बने और उनमें अलग-अलग मसालों और पकाने की तकनीकों का इस्तेमाल होने लगा. इसी तरह यह साधारण भोजन एक खास स्वाद वाली डिश के रूप में लोकप्रिय हुआ. सर्दियों में गर्मागर्म अमृतसरी मछली खाने का अपना अलग ही मजा है.

2. भुना गोश्त: धीमी आंच पर तैयार होता है लाजवाब स्वाद
अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं, तो अमृतसर का भुना गोश्त जरूर चखना चाहिए. यह मटन से बनने वाली पारंपरिक डिश है, जिसमें दही और कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इसे तेज आंच पर जल्दी पकाने के बजाय काफी देर तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, ताकि मसाले और उनका स्वाद मांस में अच्छी तरह समा जाए.

इस व्यंजन में ‘भुना’ शब्द इसकी खास पकाने की तकनीक को बताता है. इसमें ग्रेवी को तब तक पकाया जाता है, जब तक उसका पानी कम होकर वह गाढ़ी न हो जाए. इससे मसालों की परत गोश्त पर अच्छी तरह चढ़ जाती है और इसका रंग भूरा दिखाई देने लगता है. इसे जीरा राइस के साथ खाना पसंद किया जाता है. अमृतसर के पुराने ढाबों में मिलने वाला यह व्यंजन पंजाबी खानपान के गाढ़े और मसालेदार स्वाद को दिखाता है.

3. वड़ियां: दाल और मसालों से तैयार होती है यह खास चीज
अमृतसर के पुराने बाजारों में घूमते हुए आपको कई दुकानों पर पापड़, अचार और वड़ियां मिल जाएंगी. वड़ियां पंजाब के पारंपरिक खानपान का अहम हिस्सा हैं. इन्हें बनाने के लिए दाल को पीसकर उसका गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है. इसमें अलग-अलग मसाले मिलाए जाते हैं और फिर छोटी-छोटी टिकियों या टुकड़ों के रूप में धूप में सुखाया जाता है. सूखने के बाद इन्हें लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है. वड़ियों को आमतौर पर सब्जी या कढ़ी में डालकर पकाया जाता है. पकने के बाद ये नरम हो जाती हैं और दाल व मसालों का स्वाद खाने में घुल जाता है. पुराने समय में जब हर मौसम में ताजी सब्जियां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं, तब दाल को सुखाकर रखने का यह तरीका काफी उपयोगी था.

अमृतसर के खाने में क्यों दिखता है इतना अलग स्वाद?
अमृतसर के खानपान की विविधता के पीछे इस शहर का ऐतिहासिक महत्व भी एक बड़ी वजह है. अतुल्य भारत के अनुसार, अमृतसर ऐतिहासिक सिल्क रूट के महत्वपूर्ण स्थानों में शामिल रहा है. यहां दूर-दराज के इलाकों से आने वाले यात्रियों और व्यापारियों के साथ अलग-अलग खाद्य सामग्री और खाना पकाने की तकनीकें भी पहुंचीं. समय के साथ स्थानीय लोगों ने इन स्वादों को अपने तरीके से अपनाया और अमृतसरी खानपान की एक अलग पहचान बनी.



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