रुहुल्लाह ने कहा, ‘‘आपको इसलिए चुना गया था कि आप उस नुकसान की भरपाई करें जो बीजेपी और आरएसएस ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को पहुंचाया है, लेकिन आपने बस उन लोगों को शॉल भेंट की, जिन्होंने हमारे लोगों की भावनाओं और सम्मान को ठेस पहुंचाई है। इसके उलट, आपने आरक्षण को लेकर छात्रों को, नियमितीकरण को लेकर दिहाड़ी मजदूरों को और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर मेडिकल इंटर्न को धमकाया।’’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष को लिखे अपने दो पन्नों के त्यागपत्र में, रुहुल्लाह ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाना, एक तरह से, राजनीतिक जगह और अधिकारों को वापस पाने का एक अवसर था; लेकिन ऐसा करने के लिए संघर्ष, बलिदान और कीमत चुकाने के लिए तैयार रहने की जरूरत थी। उन्होंने कहा, ‘‘उस समय मेरी यह धारणा थी कि कश्मीर की सबसे पुरानी और प्रमुख पार्टी, ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’, उस संघर्ष के लिए सबसे उपयुक्त दावेदार थी, जिसकी उस स्थिति में ज़रूरत थी।’’




