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गूगल मैप पर सड़क का ट्रैफिक देखकर आपने कभी सोचा है कि आखिर उसे कैसे पता चलता है कि किसी रास्ते पर गाड़ियां तेज चल रही हैं या जाम में फंसी हैं. दरअसल, सड़क पर चल रहे लोगों के मोबाइल फोन से मिलने वाले लोकेशन और मूवमेंट सिग्नल इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. गूगल कई लोगों से मिले डेटा को मिलाकर सड़क की औसत रफ्तार का अंदाजा लगाता है और फिर पुराने ट्रैफिक पैटर्न, लाइव सिग्नल और ट्रैफिक अथॉरिटी की जानकारी के आधार पर रास्ते की स्थिति बताता है.
गूगल सिर्फ लाइव डेटा के आधार पर ही अनुमान नहीं लगाता है. (File Photo)
नई दिल्ली. अगर आप रोज गूगल मैप इस्तेमाल करते हैं तो आपने देखा होगा कि सड़क पर ट्रैफिक की स्थिति लगातार बदलती रहती है. कहीं सड़क हरी दिखाई देती है तो इसका मतलब आमतौर पर ट्रैफिक सामान्य है. कहीं पीला या लाल रंग दिखने लगे तो समझ आता है कि वाहनों की रफ्तार कम है. लेकिन सवाल यह है कि गूगल को आखिर यह जानकारी मिलती कहां से है. दरअसल, इसके पीछे आपके हाथ में मौजूद मोबाइल फोन की बड़ी भूमिका होती है. सड़क पर चल रहे लोगों के फोन से मिलने वाले लोकेशन और मूवमेंट सिग्नल को गूगल बड़े पैमाने पर मिलाकर यह अंदाजा लगाता है कि किसी सड़क पर लोग कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इसी से उसे ट्रैफिक की स्थिति समझने में मदद मिलती है.
मान लीजिए किसी सड़क पर आमतौर पर वाहन करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. लेकिन उस समय उस इलाके में उपलब्ध मोबाइल लोकेशन सिग्नल बहुत कम गति से आगे बढ़ रहे हैं. इससे गूगल को संकेत मिलता है कि उस सड़क पर ट्रैफिक धीमा है. यानी गूगल को हर गाड़ी का अलग-अलग लाइव ट्रैक मिलना जरूरी नहीं है. कई मोबाइल से मिलने वाले सिग्नल को एक साथ देखकर वह पूरी सड़क की स्थिति का अनुमान लगा सकता है.
पुराना डेटा भी बताता है कहां लगता है जाम
सिर्फ लाइव डेटा के आधार पर ही ट्रैफिक का अनुमान नहीं लगाया जाता. गूगल पुराने ट्रैफिक पैटर्न को भी देखता है. जैसे सोमवार सुबह ऑफिस के समय किसी सड़क पर आमतौर पर कितनी भीड़ रहती है या शाम के समय वहां वाहनों की रफ्तार कितनी कम हो जाती है. इसी पुराने पैटर्न और मौजूदा सिग्नल को मिलाकर गूगल यह भी अनुमान लगाता है कि आपको अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने में कितना समय लग सकता है.
लाइव डेटा नहीं मिला तो अनुमान कितना सही होगा
अगर किसी सड़क पर मौजूद वाहनों और लोगों से गूगल को पर्याप्त लाइव लोकेशन सिग्नल नहीं मिलते हैं, तो ट्रैफिक का रियल टाइम अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में गूगल पुराने ट्रैफिक पैटर्न, दूसरे उपलब्ध लाइव सिग्नल और ट्रैफिक अथॉरिटी से मिली जानकारी का इस्तेमाल कर सकता है. दुर्घटना, सड़क बंद होने, निर्माण कार्य या किसी अन्य घटना की जानकारी भी ट्रैफिक के अनुमान को बदल सकती है. गूगल के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस और लोगों से मिलने वाली रियल टाइम जानकारी भी इसमें इस्तेमाल होती है.
यानी गूगल मैप के ट्रैफिक रंग कोई जादू नहीं हैं. इसके पीछे करोड़ों मोबाइल सिग्नल, पुराने ट्रैफिक पैटर्न और अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी को मिलाकर तैयार किया गया अनुमान काम करता है. इसलिए अगर किसी सड़क पर लाइव डेटा बहुत कम हो जाए या उपलब्ध सिग्नल में बड़ा बदलाव आ जाए, तो मैप को ट्रैफिक की सही स्थिति समझने में दिक्कत हो सकती है.
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सुशांत सिन्हा को 20 से ज्यादा सालों के अनुभव है. सुशांत टाइम्स नेटवर्क, NDTV, News24 और इंडिया टीवी जैसे बड़े न्यूज़ नेटवर्क में काम करने का शानदार अनुभव है. अपने करियर में अहम एडिटोरियल और ऑन-एयर एंकरिंग की भ…
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