Snowfall at Uttarakhand: मौसम में आएं बदलाव के बाद भी आपको इन स्टेशनों पर मिलेगी बर्फबारी, प्लान ना करें कैंसिल


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Snowfall at Uttarakhand: जो लोग जनवरी और फरवरी तक बर्फ का आनंद लेने के लिए अपना प्लान बना चुके हैं और अब अचानक से आए मौसम में बदलाव के कारण अपने प्लान को कैंसिल करने की सोच रहे हैं तो यह ख़बर उन लोगों के लिए है. इस खबर में आज हम आपको बताने जा रहे हैं सहारनपुर के नजदीक पड़ने वाले कुछ ऐसे हिल स्टेशन के बारे में, जहां पर मौसम बदलाव के बाद भी आपको बर्फबारी का आनंद मिलने वाला है.

औली उत्तराखंड के खूबसूरत हिल स्टेशन में से एक है औली में बर्फ आमतौर पर दिसंबर के अंत से शुरू होकर मार्च की शुरुआत तक रहती है, जिसमें जनवरी और फरवरी सबसे ज्यादा बर्फबारी के महीने होते हैं, जब यह स्कीइंग और अन्य शीतकालीन खेलों के लिए आदर्श होता है. मार्च के अंत तक बर्फ कम होने लगती है, लेकिन शुरुआती बर्फ के निशान दिख सकते हैं. औली में घूमने के लिए कई शानदार जगहें हैं, जिनमें औली रोपवे, औली कृत्रिम झील और गोरसन बुग्याल प्रमुख हैं.

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उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत वादियों में से एक मुनस्यारी में बर्फबारी आमतौर पर नवंबर के अंत से शुरू होकर मार्च की शुरुआत तक रहती है. जिसमें दिसंबर और जनवरी सबसे ज़्यादा बर्फबारी वाले महीने होते हैं, जब पूरा इलाका बर्फ की मोटी चादर से ढक जाता है और स्कीइंग व ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों के लिए आदर्श होता है. मुनस्यारी में घूमने के लिए पंचचूली चोटियाँ, खलिया टॉप, बिर्थी जलप्रपात, नंदा देवी मंदिर और थामरी कुंड प्रमुख स्थान हैं, जहां से हिमालय के शानदार नजारे दिखते हैं इसके अलावा, जनजातीय विरासत संग्रहालय और मदकोट के गर्म पानी के झरने भी दर्शनीय हैं, जो मुनस्यारी को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बनाते हैं.

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उत्तराखंड के हर्षिल में दिसंबर से मार्च के मध्य तक बर्फबारी होती है, जिसमें जनवरी और फरवरी के महीने बर्फबारी के चरम पर होते हैं, जब घाटी बर्फ की मोटी चादर से ढक जाती है. हर्षिल में घूमने के लिए कई खूबसूरत जगह हैं, जिनमें शांत मुखवा गांव, गंगोत्री मंदिर, मनोरम धराली गांव, प्राकृतिक झीलों का समूह सातताल, गर्म पानी के झरने वाला गंगनानी, ऐतिहासिक गर्तंग गली और शानदार नेलोंग घाटी शामिल हैं, जो प्रकृति, आध्यात्मिकता और रोमांच का अनुभव कराते हैं. अगर आप भी घूमने का प्लान कैंसिल कर चुके हैं तो फिर से प्लान बना लीजिए क्योंकि यहां पर आपको मार्च तक बर्फबारी का आनंद मिलेगा.

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उत्तराखंड की खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक और मिनी स्विट्ज़रलैंड के नाम से पहचान रखने वाला चोपटा (Chopta) में आमतौर पर दिसंबर से मार्च के महीनों में बर्फबारी होती है, जिसमें मध्य दिसंबर से फरवरी तक सबसे अधिक बर्फ गिरने की संभावना होती है, और कभी-कभी यह अप्रैल तक भी रहती है. खासकर तुंगनाथ ट्रेक पर, जहां बर्फबारी का मौसम लगभग मार्च अंत तक रहता है. यह ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ बर्फ से ढका होता है और इस दौरान ट्रेकिंग का अनुभव अद्भुत होता है. चोपटा में तुंगनाथ मंदिर, चंद्रशिला चोटी, देवरिया ताल, उखीमठ और कांचुला कोरक कस्तूरी मृग अभयारण्य घूमने लायक प्रमुख स्थान हैं, जो ट्रेकिंग, शानदार हिमालयी दृश्यों, शांत झीलों और वन्यजीवों के अनुभव के लिए प्रसिद्ध हैं. जो फरवरी महीने में भी आपको जनवरी जैसी बर्फबारी का आनंद देगा.

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उत्तराखंड के चकराता में बर्फबारी का मुख्य समय दिसंबर से मार्च तक होता है, जिसमें दिसंबर के अंत और जनवरी में सबसे अच्छी बर्फबारी देखने को मिलती है. जिससे यह समय बर्फ ट्रेकिंग और विंटर स्पोर्ट्स के लिए आदर्श है. हालांकि, इस साल (2026) मौसम विभाग ने 22-27 जनवरी के बीच ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई है. और आपको फरवरी महीने में भी यहां पर बर्फबारी का सुंदर नजारा देखने को मिलेगा.

इसके अलावा औली, चिनाब झील, कुआरी दर्रा, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और जोशीमठ जैसे स्थान भी पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं, जो ट्रैकिंग, स्कीइंग और हिमालय के मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध हैं. ऐसे में आप भी फरवरी में बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं तो यह हिल स्टेशन आपके लिए बेस्ट हो सकता है.



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