ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन बढ़ रहे हैं. छात्र यूनिवर्सिटी में खामनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं. मश्हद और तेहरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर के झंडे जमीन पर फेंके और रजा पहलवी की वापसी की मांग की. अमेरिका ईरान पर हमले के लिए तैयार है. लेकिन इस बार बी-2 बॉम्बर या टोम हॉक मिसाइल का प्रयोग नहीं होगा. अमेरिका ने अपना सबसे खतरनाक हथियार तैयार किया है – डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल।डार्क ईगल को हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल के जरिए लॉन्च किया जाता है. यह वायुमंडल से बाहर स्पेस में जाती है और फिर तेज रफ्तार से टारगेट को हिट करती है. इसकी गति मैक-5 से अधिक है और दूरी प्रति सेकंड 1700 मीटर तय करती है. रेंज लगभग 3500 किलोमीटर है. इस मिसाइल को रोक पाना फिलहाल किसी के लिए नामुमकिन माना जाता है. इसके अलावा अमेरिका के पास एरो बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें भी हैं. एरो बैलिस्टिक मिसाइल विमान से लॉन्च होती है और तय रास्ते पर टारगेट को हिट करती है. क्रूज़ मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल में रहकर टारगेट पर वार करती है. ट्रंप के लिए सबसे भरोसेमंद हथियार डार्क ईगल है. इससे ईरान की टॉप लीडरशिप को निशाना बनाया जा सकता है. अमेरिका ने इसके लॉन्चर की तस्वीरें जारी की, लेकिन तुरंत सोशल मीडिया से हटा दीं. इससे ईरान को एक संदेश भी गया कि उनका कोई भी हथियार काम नहीं आएगा. ईरान अब बी-2 बॉम्बर और टोम हॉक मिसाइल के अलावा नई रणनीति पर सोच रहा है. अमेरिका के जहाज, टैंकर और टोही विमान ईरान के आसपास तैनात हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, डार्क ईगल मिसाइल अमेरिका की सबसे खतरनाक और सीक्रेट हथियार प्रणाली है. ट्रंप की रणनीति में इसे ईरान पर हमला करने के लिए मुख्य हथियार माना जा रहा है.





