पीछे-पीछे मौत, आगे खड़ी पहाड़ी
अंजना ने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि वे कहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम बस आंख बंद करके… ऊपर चढ़ते गए। हमें यह भी नहीं पता था कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। हमारे साथ कोई गाइड नहीं था, कोई नहीं था; हम बस घबराहट में भागे जा रहे थे।” अंजना के मुताबिक, पूरे रास्ते में कीचड़ था और चट्टानें फिसलन भरी थीं। उन्होंने बताया कि जब वे थोड़ी ऊंचाई पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बाढ़ का पानी ऊपर की ओर आ रहा था और उनकी बस को अपनी चपेट में ले रहा था।
अंजना ने कहा, “मैंने अपने पति से कहा, ‘बस, अब तो गए। हम मरने वाले हैं।’ मैंने मौत को अपनी आंखों के सामने देखा।” अंजना के अनुसार, आखिरकार एक गाइड उन्हें पास में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित समतल जगह पर ले गया, जहां पहुंचना बहुत मुश्किल था, क्योंकि रास्ता बेहद संकरा और फिसलन भरा था, जिस पर पत्थर और मलबा बिखरा हुआ था। अंजना ने कहा, “मुझे नहीं पता कि हम इतनी ऊंचाई पर कैसे चढ़े।”
वेंकटेशन ने कहा, “हमारा बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस घटना के बाद हम जिंदगी की अहमियत को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने लगे हैं।” उन्होंने कहा, “इस घटना ने जीवन को लेकर मेरे नजरिये को और मजबूत किया है। अच्छा बनो, अच्छा करो, अच्छा सोचो और बाकी सब उस पर छोड़ दो, जो हमारे ऊपर है।”




