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Khurpatal Lake Nainital: नैनीताल की भीड़भाड़ से दूर अगर आप शांत और खूबसूरत जगह की तलाश में हैं, तो खुर्पाताल आपके लिए खास हो सकता है. पहाड़ों और हरियाली से घिरी यह झील मानसून में बेहद सुंदर नजर आती है. सबसे खास बात यह है कि खुर्पाताल के पानी का रंग मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ बदलता हुआ दिखाई देता है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं. हालांकि इसके पीछे प्राकृतिक कारण भी माने जाते हैं. जानिए खुर्पाताल की बदलती रंगत का रहस्य और इस झील से जुड़ी खास बातें.
नैनीताल घूमने आने वाले पर्यटक अगर भीड़भाड़ से अलग किसी शांत और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो खुर्पाताल शानदार विकल्प है. जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच स्थित यह झील मानसून में बेहद खूबसूरत नजर आती है. बारिश के बाद चारों तरफ छाई हरियाली, बादलों से ढके पहाड़ और शांत झील पर्यटकों को खास अनुभव देते हैं. यही वजह है कि प्रकृति प्रेमियों के बीच खुर्पाताल लगातार आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
खुर्पाताल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके बदलते रंग की होती है. स्थानीय स्तर पर झील के पानी के कभी हरा तो कभी अलग रंग में दिखाई देने की बातें कही जाती हैं. जानकारों के मुताबिक पानी की रंगत पर मौसम, सूर्य की रोशनी, आसपास की हरियाली और पानी में मौजूद प्राकृतिक तत्वों का असर पड़ सकता है. बारिश के बाद पहाड़ों से आने वाला पानी भी झील की पारदर्शिता और रंगत में बदलाव ला सकता है
खुर्पाताल के बदलते रंग को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं. कहा जाता है कि झील की रंगत में बदलाव को भविष्य में होने वाली घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है. कुछ स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पानी का हल्का लाल रंग किसी विपदा का संकेत माना जाता है, जबकि धानी हरे रंग को खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन यही रहस्य पर्यटकों की जिज्ञासा बढ़ाता है.
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खुर्पाताल में मार्च और अप्रैल के दौरान पानी का रंग धानी हरा नजर आता है. इस दौरान आसपास के पेड़ों और वनस्पतियों की छाया झील के पानी पर पड़ती है. साथ ही पाइन के फूल भी पानी में गिरते हैं, जिससे झील की सतह की रंगत अलग दिखाई दे सकती है. मौसम, रोशनी और पानी में मौजूद प्राकृतिक तत्व मिलकर झील को अलग-अलग समय पर अलग रूप देते हैं.
झील के पानी के रंग में बदलाव के पीछे प्राकृतिक कारणों को भी माना जाता है. पानी में मौजूद विभिन्न प्रकार की शैवाल यानी एल्गी सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर पानी को अलग रंग का दिखा सकती हैं. शैवाल की मात्रा, मौसम, पानी की गहराई और रोशनी जैसे कारक झील के रंग को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए बदलता रंग किसी रहस्यमयी घटना के बजाय प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम भी हो सकता है.
खुर्पाताल नाम को लेकर भी इसकी भौगोलिक बनावट से जुड़ी खास कहानी मानी जाती है. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार झील का आकार गाय के खुर जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे खुर्पाताल कहा गया. चारो तरफ हरे भरे पहाड़ों से घिरी यह झील दूर से बेहद आकर्षक और खूबसूरत नजर आती है. शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता इसे नैनीताल के आसपास घूमने वाली जगहों में अलग पहचान देती है.
खुर्पाताल का संबंध मशहूर शिकारी और लेखक जिम कॉर्बेट से भी जोड़ा जाता है. बताया जाता है कि कॉर्बेट को इस इलाके का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता बेहद पसंद थी. वे जब भी रामनगर की तरफ जाते थे तो इस जगह जरूर रुकते थे. जिम कॉर्बेट की आत्मकथा में भी खुर्पाताल का उल्लेख मिलने की जानकारी सामने आती है, जिससे इस जगह का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है.
मानसून खुर्पाताल को एक अलग ही रूप देता है. बारिश के बाद पहाड़ों पर हरियाली घनी हो जाती है और बादल झील के आसपास के नजारों को बेहद खूबसूरत बना देते हैं. पहाड़ियों से बहकर आने वाला पानी झील में पहुंचता है, जिससे पानी की पारदर्शिता और रंग भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे मौसम में खुर्पाताल की प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों और फोटोग्राफी पसंद करने वालों को खास तौर पर आकर्षित करती है.
खुर्पाताल की प्राकृतिक सुंदरता के बावजूद इसके संरक्षण को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा चिंता भी जताई जाती रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार झील और आसपास के क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान दिए जाने की जरूरत है. पर्यटन बढ़ने के साथ पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ सकता है. ऐसे में झील को स्वच्छ रखना, कूड़ा न फैलाना और प्राकृतिक क्षेत्र को नुकसान से बचाना बेहद जरूरी है. जिम्मेदार पर्यटन ही इस खूबसूरत झील की पहचान को लंबे समय तक बनाए रख सकता है.




