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थाईलैंड में चल रहे ‘कोबरा गोल्ड 2026’ सैन्य अभ्यास में अमेरिकी सेना के ‘ब्लैक हॉक’ हेलीकॉप्टर की ताकत देखकर हर कोई हैरान रह गया. 280 किमी/घंटा की तूफानी रफ्तार और करीब 10 हजार किलोग्राम वजन उठाने की क्षमता रखने वाला यह महाबली हेलीकॉप्टर युद्ध के मैदान में किसी रक्षक से कम नहीं है. धूल के गुबार को चीरते हुए दुश्मन के इलाके में घुसने और खूंखार कमांडोज को पलक झपकते ही सुरक्षित उतारने में माहिर ब्लैक हॉक को इसकी मजबूती और मारक क्षमता के कारण ‘आसमान का भीम’ कहा जाता है.
ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर
वॉशिंगटन : थाईलैंड में जारी ‘कोबरा गोल्ड 2026’ (CG26) सैन्य अभ्यास के दौरान अमेरिकी मरीन ने समंदर के किनारे अपनी ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया. चोनबुरी प्रांत के सैन्य बेस पर चल रही इस एम्फीबियस असॉल्ट ड्रिल में अमेरिकी मरीन और उनके खतरनाक युद्धपोतों ने भाग लिया, जिसका मकसद तटीय सुरक्षा और आपसी तालमेल को मजबूत करना है. इस पूरे अभ्यास के दौरान आसमान के बेताज बादशाह ‘ब्लैक हॉक’ हेलीकॉप्टर ने ध्यान खींचा. धूल के गुबार को चीरते हुए जब ये हेलीकॉप्टर जमीन के करीब पहुंचे, तो ऐसा लगा मानो कोई तूफान आ गया हो. ब्लैक हॉक को आसमान का महाबली भीम कहा जाता है.
Black Hawk की महाबली पावर्स
ब्लैक हॉक सिर्फ एक हेलीकॉप्टर नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान का सबसे भरोसेमंद साथी है. ये हेलीकॉप्टर धूल और मिट्टी के बीच भी बड़ी सटीकता से सैनिकों को उतारने और वापस लाने की क्षमता रखते हैं. इसका इस्तेमाल न सिर्फ सैनिकों को ले जाने के लिए, बल्कि घायलों को निकालने और मुसीबत में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भी किया जाता है.
बवंडर को कैसे चीर देता है US Army का हथियार?
इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भीषण गोलीबारी और मुश्किल मौसम में भी उड़ान भर सके. ये बीस्ट जमीन, समंदर और आसमान वाली पावर्स का इस्तेमाव करके किसी भी बड़े हमले को नाकाम कर सकता है.
इसमें General Electric T700-GE-701C/D टर्बोशाफ्ट इंजन लगा है. इसमें .50 कैलिबर मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और हेलफायर मिसाइलें लोड की जा सकती हैं. ये युद्ध, रेस्क्यू ऑपरेशन और कार्गो लिफ्ट के लिए उपयोग किया जाता है. ये विमान ऑटोनॉमस है यानी बिना पायलट के उड़ान भरने में भी सक्षम है.
सिकोरस्की UH-60 ब्लैक हॉक एक प्रमुख, चार-ब्लेड, ट्विन-इंजन वाला मीडियम-लिफ्ट सैन्य हेलीकॉप्टर है, जिसे मुख्य रूप से अमेरिकी सेना के लिए डिजाइन किया गया है. 357 किमी/घंटा की गति, 583 किमी की रेंज और करीब 10 हाजर किलोग्राम भार के साथ उड़ सकता है. इसमें हथियार लोड़ करके हवाई हमले किए जा सकते हैं. ये ट्रूप्स को दुश्मन के इलाके में सुरक्षित लाने-ले जाने का काम करता है. इसे खूंखार कमांडोज की शील्ड कहें तो गलत नहीं होगा.
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उत्कर्षा श्रीवास्तव डिजिटल जर्नलिस्ट हैं और जियो-पॉलिटिक्स टॉपिक्स पर लिखती हैं, वो वर्तमान में News18 Hindi के World सेक्शन में कार्यरत हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में 10+ वर्षों का अनुभव है, इस दौरान उन्होंने क…और पढ़ें





