AI Chatbot Law in US: बच्चों की AI चैटबोट से कट्टी कराने वाला कानून तैयार हो चुका है ब्लूप्रिंट नहीं माना तो भुगतेंगी कंपनियां


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बच्चों की AI चैटबोट से ‘कट्टी’ कराने वाला कानून, न माना तो भुगतेंगी कंपनियां

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Anti AI Chatbot Law in US: टेक्नोलॉजी के जमाने में आजकल बच्चों से लेकर बड़े तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जाल में उलझ चुके हैं. कहीं तो ये फायदेमंद है तो कहीं ये उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है. अमेरिका में डेमोक्रेटिक सांसद बेका बालिंट ने इसी समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए एक नया विधेयक पेश किया है, जो टीनएजर्स को ऐसे चैटबोट की लत से बचाएगा.

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एआई चैटबोट की लत से छुटकारा दिलाएगा कानून.

Anti AI Chatbot Law in US: क्या AI चैटबोट अकेले लोगों का डिजिटल दोस्त बनकर उन्हें अपनी गिरफ्त में ले रहा है? अमेरिका में अब इसी खतरे को लेकर अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी सांसद बेका बालिंट ने एक नया विधेयक ‘Addictive Design Act’ पेश किया गया. इसका मकसद AI चैटबोट कंपनियों को ऐसे फीचर्स इस्तेमाल करने से रोकना है, जो बच्चों को भावनात्मक रूप से तकनीक पर निर्भर बना दें या उसकी लत लगा दें. यह बिल ऐसे वक्त में आया है, जब अमेरिका में बड़ी संख्या में किशोर मानसिक तनाव और भावनात्मक समस्याओं के दौरान चैटबोट का सहारा ले रहे हैं.

हालांकि बालिंट के कार्यालय के मुताबिक ज्यादातर चैटबोट, इस तरह के भावनात्मक और मानसिक हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से ट्रेन नहीं हैं, ऐसे में इनका अधिक इस्तेमाल बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डाल रहा है. बेका बालिंट ने कहा कि टेक कंपनियां सालों से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने और उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखने के अलग-अलग तरीके अपनाती रही हैं, लेकिन टीनेजर्स के साथ ऐसा नहीं होने दिया जा सकता.

AI चैटबोट के किन फीचर्स पर लगेगी रोक ?

प्रस्तावित कानून के तहत कंपनियां नाबालिगों को ऐसे Chatbot उपलब्ध नहीं करा सकेंगी, जिसमें लत लगने का खतरा हो. ऐसे फीचर्स में टाइपिंग बबल, अवतार, पुरानी बातचीत की जानकारी का दोबारा इस्तेमाल करना, बातचीत जारी रखने के लिए भुगतान या लगातार जुड़े रहने की जरूरत, दो घंटे से ज्यादा चलने वाली बातचीत और किसी असली इंसान की नकल करने वाले प्रोग्राम शामिल है.

कानून तोड़ा तो लगेगा भारी जुर्माना

  • कानून में ये भी कहा गया है कि अगर कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ेगा. इसके लिए कंपनी पर हर नाबालिग यूजर के लिए 5000 डॉलर तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं रिसर्च के लिए जरूरी डेटा उपलब्ध नहीं कराने पर कंपनियों पर 1 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है.
  • बिल में AI चैटबोट से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की स्टडी के लिए एक इंटरएजेंसी टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है. इसके अलावा 30 लाख डॉलर वैज्ञानिक शोध और 50 लाख डॉलर ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के लिए देने की योजना है, जिनसे माता-पिता और शिक्षक बच्चों में AI की लत के संकेत पहचान सकें.

सख्त होंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नियम

सेंटर फॉर हेल्थ एंड डेमोक्रेसी की कार्यकारी निदेशक रेचल मैडली ने कहा कि AI चैटबोट को इस तरह डिजाइन नहीं किया जाना चाहिए कि बच्चे उस पर इमोशनली अटैच हो जाएं. वहीं अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की CEO और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मार्केटा एम. विल्स ने कहा कि AI मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मददगार हो सकता है, लेकिन वह कभी भी डॉक्टर और मरीज के रिश्ते की जगह नहीं ले सकता है. अगर यह बिल कानून बनता है, तो AI चैटबोट कंपनियों के लिए बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियम पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो जाएंगे.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…

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