ईरान-अमेरिकी में तनाव अभी भी जारी है. एमओयू होने के बाद फिर से दोनों देशों की और से हमले किये गए हैं. इसलिए दोनों देशों में सीजफायर की फिर से घोषणा का होना बाकी है. पूरी तरह युद्ध खत्म होने की बात अभी दूर की रही है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नुकसान की भरपाई का जुगाड़ लगा लिया है. ट्रंप अब ईरान के खजाने पर नजर रख रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि आज से जहाजों, कार्गो या उनसे जुड़ी किसी भी चीज को होने वाले नुकसान की भरपाई कर लेंगे. इन्हें अमेरिका के पास मौजूद ईरान के पैसों से की जाएगी. नुकसान कितना भी बड़ा क्यों न हो, यही सबसे सही तरीका है.
हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि यह व्यवस्था कैसे लागू होगी. किन घटनाओं में ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा. ट्रंप ने यमन के हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों के लिए भी ईरान को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि हूती ईरान के समर्थन से काम करते हैं. इसलिए भविष्य में उनके किसी भी हमले की जिम्मेदारी भी ईरान की होगी.
ईरान-हूती दोनों पर कार्रवाई की चेतावनी
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो ईरान और हूती दोनों को कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. यह बयान ऐसे समय आया है, जब हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों एन्सेलिया और लायला पर बैलिस्टिक मिसाइल क्रूज मिसाइल और ड्रोन से हमला किया. हूतियों का कहना है कि ये जहाज उनके घोषित नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहे थे.
सऊदी मीडिया ने बताया है कि हमले में एन्सेलिया टैंकर के अगले हिस्से में आग लग गई. लेकिन सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं. इन हमलों के बाद दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों लाल सागर और हॉर्मुज को लेकर चिंता बढ़ गई है. अगर इन रास्तों पर लगातार तनाव बना रहता है तो दुनिया भर में तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं
हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं. कई तेल टैंकरों ने भी सुरक्षा कारणों से अपना रास्ता बदल लिया. इससे समुद्री माल ढुलाई महंगी होने और बीमा लागत बढ़ने की आशंका है.
ईरान पर अमेरिकी दबाव जारी
इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं. यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, हाल के हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन भंडार, विमान हैंगर, नौसैनिक क्षमताओं और सैन्य लॉजिस्टिक्स ठिकानों को निशाना बनाया गया.
अमेरिका का दावा है कि उसने हॉर्मुज के पास ईरानी नौसैनिक ठिकानों तक सप्लाई पहुंचाने वाले कुछ पुलों को भी निशाना बनाया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हूती हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अब तक हूती इस संघर्ष से काफी हद तक दूर थे. लेकिन अब उन्होंने सऊदी अरब के जहाजों को निशाना बनाकर हालात और गंभीर कर दिए हैं.
तनाव कम होने के संकेत नहीं
ईरान ने अब तक अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है. वह लगातार अमेरिका व उसके सहयोगी देशों को जवाब देने की चेतावनी दे रहा है. ऐसे में जानकारों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ा, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.




