दुनिया जब भी अमेरिका के लॉस एंजिल्स का नाम सुनती है, तो दिमाग में हॉलीवुड की चकाचौंध और समंदर के खूबसूरत नजारे घूमने लगते हैं. अब इसी शहर में भारत का एक बड़ा ‘सुपर मिशन’ आकार ले चुका है. दरअसल, लॉस एंजिल्स में खुला नया भारतीय दूतावास अब सिर्फ पासपोर्ट-वीजा बांटने वाला दफ्तर नहीं रह गया है. दूतावास ने खुद को व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी के नए पावर सेंटर में बदल लिया है. यहां से अब अरबों डॉलर के ट्रेड, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन और 2028 ओलंपिक में क्रिकेट की ऐतिहासिक वापसी का नया रोडमैप तैयार हो रहा है.
लॉस एंजिल्स में भारत ने शुरू किया मिशन
भारतीय दूतावास के कॉन्सुलेट जनरल डॉ केजे श्रीनिवास का साफ कहना है कि भारत को देखने का अमेरिकी नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है. अमेरिका अब भारत को केवल योग या संस्कृति तक सीमित देश नहीं समझता, बल्कि 21वीं सदी की एक बड़ी और गंभीर वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में देखता है. दूतावास खुलते ही यहां लगातार इन्वेस्टर्स मीट और बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग्स का दौर जारी है. जब भारतीय उद्योगपतियों का दल अमेरिकी निवेशकों के सामने बैठता है तो बात सिर्फ रिश्तों की नहीं, बल्कि भारी-भरकम इनवेस्टमेंट, स्टार्टअप्स, एंटरप्रेन्योरशिप और नई टेक्नोलॉजी के लेन-देन की होती है.
चीन को पटखनी: सेमीकंडक्टर और ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ पर कब्जा!
इस पूरे मिशन का सबसे सीक्रेट और रणनीतिक एंगल छिपा है ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ और ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ में, आज की दुनिया में ईवी गाड़ियां बनाने से लेकर मोबाइल फोन और मिसाइलों तक में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर चीन का राज है. भारत और अमेरिका दोनों ही अपनी सप्लाई चेन को चीन के चंगुल से बाहर निकालना चाहते हैं.
इसी मिशन के लिए लॉस एंजिल्स का यह नया दूतावास एक अहम बैकचैनल का काम कर रहा है. यहां दूतावास के अधिकारी सीधे उन अमेरिकी टेक कंपनियों, माइनिंग एक्सपर्ट्स और निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं जो सेमीकंडक्टर, AI और बायोटेक्नोलॉजी के लिए जरूरी मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित बना सकते हैं. डॉ श्रीनिवास के मुताबिक, अमेरिकी बिजनेस वर्ल्ड 21वीं सदी के नए और ताकतवर भारत को पहचान चुका है. अमेरिकी कंपनियां चीन के विकल्प के तौर पर भारत को एक सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद पार्टनर मान रही हैं.
‘BIO कन्वेंशन’ में जब भारतीय स्टॉल्स पर उमड़ा अमेरिकी हुजूम
भारत की इस नई धाक का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हाल ही में अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित ‘BIO इंटरनेशनल कन्वेंशन’ में 52 से ज्यादा दिग्गज भारतीय कंपनियों ने हिस्सा लिया. इस इंटरनेशनल इवेंट में भारतीय कंपनियों के काउंटरों पर अमेरिकी और वैश्विक निवेशकों की जैसी भीड़ उमड़ी, उसने वहां के स्थानीय कूटनीतिकों को भी हैरान कर दिया. कॉन्सुल जनरल बताते हैं कि भारतीय स्टॉल्स पर आने वाले ट्रैफिक को देखकर हर कोई दंग था. ये इस बात का सबूत है कि भारत अब बायोटेक्नोलॉजी और ग्लोबल टेक स्टेज पर एक लीडर बनकर उभर रहा है. चाहे अमेरिकी राज्यों के गवर्नर हों, सांसद हों या शहरों के मेयर—हर कोई आज भारत के साथ साझेदारी को मजबूत करने के लिए उतावला नजर आ रहा है.
कैलिफोर्निया की टॉप यूनिवर्सिटीज अब भारत के साथ!
सिर्फ कारोबार ही नहीं, ज्ञान और तकनीक के मैदान में भी लॉस एंजिल्स मिशन ने बड़ी बाजी मारी है. अमेरिका के पश्चिमी तट पर दुनिया के सबसे बेहतरीन रिसर्च और एजुकेशन हब मौजूद हैं. दूतावास की पहल के बाद अब यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और यूसीएलए जैसे बड़े अमेरिकी संस्थान भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ सीधे जुड़ रहे हैं.
इससे दोनों देशों के बीच सिर्फ स्टूडेंट्स का आना-जाना ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि जॉइंट रिसर्च, एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी के पेटेंट भी साझा किए जाएंगे.
2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक और ‘क्रिकेट’ का मेगा शो
लॉस एंजिल्स मिशन की लिस्ट में एक और सबसे बड़ा चैप्टर है- 2028 का लॉस एंजिल्स ओलंपिक! करीब 100 साल से भी ज्यादा लंबे इंतजार के बाद ओलंपिक खेलों में ‘क्रिकेट’ की वापसी हो रही है और इस वापसी का पूरा ताना-बाना बुनने में लॉस एंजिल्स में मौजूद भारतीय दूतावास दिन-रात जुटा हुआ है.
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और भारत के खेल मंत्रालय के साथ मिलकर दूतावास की टीम लॉस एंजिल्स की ओलंपिक आयोजन समिति से सीधी बातचीत कर रही है. पोमोना में बने क्रिकेट स्टेडियम को ओलंपिक मुकाबलों के लिए तैयार किया जा रहा है. अगस्त में भारत से एक बड़ा स्पोर्ट्स डेलीगेशन व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए लॉस एंजिल्स पहुंच रहा है.




