Heritage Hotels In India : अगर आप इतिहास के शौकीन हैं और रॉयल लाइफस्टाइल को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो भारत के हेरिटेज होटल्स आपके लिए एकदम परफेक्ट जगह हैं. ये सिर्फ ठहरने के लिए होटल नहीं हैं, बल्कि इनकी दीवारें सदियों पुराने किस्से और नायाब स्थापत्य कला (Architecture) समेटे हुए हैं. इन होटलों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें लोगों को इम्प्रेस करने के लिए नहीं, बल्कि राजशाही, व्यापार और महत्वाकांक्षाओं के लिए बनाया गया था. आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही 5 चुनिंदा हेरिटेज होटल्स के बारे में, जिनकी वास्तुकला आपको सीधे इतिहास के सुनहरे दौर में ले जाएगी:
जोधपुर के छित्तर हिल पर बना यह महल दुनिया के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक है. इसका निर्माण 1929 में अकाल राहत कार्य (Famine Relief) के तहत शुरू हुआ था, जिसमें लगभग 3,000 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला. 347 कमरों वाली इस विशाल इमारत को बनाने में एक बूंद सीमेंट का इस्तेमाल भी नहीं हुआ है. स्थानीय बलुआ पत्थरों को ‘चूना-सुरखी’ के पारंपरिक मसाले से जोड़ा गया है.
खासियत: इसमें इंडो-सरसेनिक गुंबद और आर्ट डेको इंटीरियर्स का अद्भुत मेल दिखता है. आज इसका एक हिस्सा होटल (ताज ग्रुप), दूसरा हिस्सा जोधपुर राजपरिवार का घर और तीसरा हिस्सा म्यूजियम है.
2.ताज फलकनुमा पैलेस, हैदराबाद (तेलंगाना)
1884 में नवाब विकार-उल-उमरा द्वारा बनवाया गया यह पैलेस बाद में हैदराबाद के निजाम का निवास बना. बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका लेआउट हवा से देखने पर एक बिच्छू (Scorpion) के आकार में नज़र आता है.
खासियत: इसके अंदर एशिया में वेनेटियन झूमरों (Venetian Chandeliers) का सबसे बड़ा कलेक्शन, विंडसर कैसल की तर्ज पर बनी लाइब्रेरी और 101 लोगों के बैठने वाला एक विशाल डाइनिंग टेबल है. ताज ग्रुप ने इस महल को रीस्टोर करने में लगभग एक दशक का समय लिया था.
3.नीमराना फोर्ट पैलेस, अलवर (राजस्थान)
अरावली की पहाड़ियों पर 1464 के आसपास बना यह किला भारत के सबसे पुराने हेरिटेज कन्वर्जन में से एक है. यह किला पहाड़ी पर 10 अलग-अलग स्टेप लेवल्स में बना हुआ है. यानी आपकी छत किसी और कमरे का फर्श हो सकती है! यहाँ तक कि इसका स्विमिंग पूल भी पुराने बुर्ज (Rampart) पर बनाया गया है.
खासियत: नीमराना आपको यह बखूबी दिखाता है कि वक्त के साथ एक इमारत कैसे ढलती है. यहाँ हर दौर की अलग पत्थर की छाप और छत की ऊँचाई देखने को मिलती है.
4.रामबाग पैलेस, जयपुर (राजस्थान)
1835 में बना यह पैलेस शुरुआत में महाराजा राम सिंह द्वितीय की धाय (Wet Nurse) के लिए एक छोटा सा बगीचा-घर था. बाद में यह शिकारगाह, शाही गेस्ट हाउस और फिर महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय का आधिकारिक निवास बना. समय के साथ इसमें मुगल शैली के बगीचे, स्तंभों वाले बरामदे और इंडो-सरसेनिक टॉवर जुड़ते गए.
खासियत: 1957 में इसे राजस्थान के सबसे पहले पैलेस होटलों में बदला गया था. इसके पीछे बना 19वीं सदी का मुगल गार्डन आज भी अपनी पुरानी नक्काशीदार खूबसूरती को सहेजे हुए है.
द बंगला, कराईकुडी (तमिलनाडु)
तमिलनाडु के चेट्टीनाड क्षेत्र में बना यह होटल चेट्टीयार व्यापारी समुदाय की समृद्ध विरासत का प्रतीक है. इसे बनाने में इस्तेमाल हर सामान अलग-अलग व्यापारिक मार्गों से लाया गया था-बर्मा से टीक की लकड़ी, इटली से मार्बल, बेल्जियम से ग्लास और अथांगुडी गाँव से हाथ से बनी टाइलें.
खासियत: यहाँ की हर टाइल को धूप में सुखाकर पारंपरिक तरीकों से बनाया जाता है, जिनका रंग दशकों बाद भी वैसा ही चमकता है. यह एक छोटा लेकिन बेहद प्रामाणिक बूटिक होटल है जो आपको दक्षिण भारतीय वास्तुकला से रूबरू कराता है.
नए बने लग्जरी होटल्स कितने भी आधुनिक क्यों न हों, लेकिन इन ऐतिहासिक महलों और किलों की दीवारों में जो सालों पुराना रुतबा और अहसास छुपा है, उसकी बराबरी कोई नई इमारत नहीं कर सकती!




