Science News In Hindi | Space News | New Jersey Meteorite Crash: अमेरिका में घर की छत फाड़कर गिरा उल्कापिंड, क्या अंतरिक्ष से आए थे धरती पर इंसान?


Space News: धरती पर जीवन की शुरुआत आखिर कैसे हुई? अमेरिका के न्यू जर्सी में घटी एक घटना ने इस सवाल का जवाब खोजने में बड़ी मदद की है. जुलाई 2024 में यहां एक घर की छत फाड़कर एक उल्कापिंड गिरा था. यह कोई आम पत्थर नहीं था. इस स्पेस रॉक ने वैज्ञानिकों को हमारे सोलर सिस्टम के शुरुआती दिनों की एक दुर्लभ झलक दी है. रिसर्च में पता चला है कि इस उल्कापिंड की बनावट उन खगोलीय पिंडों जैसी है जो शुरुआती धरती पर पानी और ऑर्गेनिक मैटेरियल लेकर आए थे. वैज्ञानिकों को इसके अंदर खारे पानी और अमीनो एसिड के निशान मिले हैं. यह खोज इस बात पर नई रोशनी डालती है कि अरबों साल पहले जीवन बनाने वाले तत्व धरती पर कैसे पहुंचे होंगे.

न्यू जर्सी के इस घर में आखिर उस दिन क्या हुआ था?

जुलाई 2024 में न्यू जर्सी और उसके आस-पास के इलाकों के आसमान में एक अद्भुत नजारा दिखा. दिन के समय ही एक उल्कापिंड तेजी से धरती की तरफ आया. इसका एक टुकड़ा न्यू जर्सी के हिल्सबरो में एक घर की छत को चीरता हुआ अंदर जा गिरा. इस टुकड़े का वजन करीब एक किलोग्राम था.

घर के मालिक ने बड़ी समझदारी दिखाई और ग्लव्स पहनकर इसे एल्युमिनियम फॉयल में लपेट लिया. फिर इसे कांच के जार में सुरक्षित रख दिया. इसके बाद इंटरनेशनल रिसर्चर्स की टीम को इस पर डिटेल स्टडी करने का मौका मिला.

यह उल्कापिंड वैज्ञानिकों के लिए इतना खास क्यों है?

वैज्ञानिकों की जांच में पता चला कि हिल्सबरो में गिरा यह पत्थर बेहद दुर्लभ है. इसे सीएम कार्बोनेसियस चोंड्राइट क्लास का उल्कापिंड बताया गया है. कैलिफोर्निया के SETI इंस्टीट्यूट की एक रिलीज में कहा गया, ‘यह अब तक खोजे गए सबसे मूल्यवान उल्कापिंडों में से एक है’.

रिसर्चर्स को इस पत्थर के अंदर सोडियम की बहुत ज्यादा मात्रा वाले छोटे पॉकेट्स मिले हैं. इससे पता चलता है कि जिस एस्टेरॉयड से यह उल्कापिंड टूटकर बना था, वहां कभी मिनरल से भरा खारा पानी बहता होगा.

हिल्सबरो में C1 क्लैस्ट्स: बाईं ओर एक बैक-स्कैटर्ड इलेक्ट्रॉन इमेज है जिसमें दो C1 748 क्लैस्ट्स पर घेरा बना है. दाईं ओर, उसी हिस्से का X-रे मैप है जो (A) में दिखाया गया है; यह मैप हिल्सबरो के बाकी हिस्से की तुलना में C1 क्लैस्ट्स में से 749 में Na (सोडियम) की ज्यादा मात्रा को दिखाता है. (Image Credit: NASA/SETI)

कैमरा फुटेज और लैब एनालिसिस के जरिए वैज्ञानिकों ने इसके असल ठिकाने का भी पता लगा लिया है. उनका मानना है कि यह उल्कापिंड मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद एस्टेरॉयड बेल्ट से आया है. यह एरिगोन एस्टेरॉयड फैमिली का हिस्सा हो सकता है.

क्या अंतरिक्ष में मिले इन सुरागों से जीवन का राज खुल गया?

प्राचीन खारे पानी के अलावा वैज्ञानिकों को इस उल्कापिंड में अमीनो एसिड और अन्य ऑर्गेनिक कंपाउंड्स भी मिले हैं. आपको यह जानना चाहिए कि ये मॉलिक्यूल्स सीधे तौर पर जीवन का सबूत नहीं हैं. हालांकि ये वो बेसिक केमिकल हैं जो किसी भी जीवित जीव को बनाने के लिए बहुत जरूरी होते हैं. इन खोजों से इस बात को और मजबूती मिली है कि कार्बन से भरपूर एस्टेरॉयड्स ने अहम भूमिका निभाई है.

ये एस्टेरॉयड्स ही शुरुआती धरती पर जीवन के लिए जरूरी तत्व लेकर आए थे. अब सवाल यह उठता है कि क्या इससे इंसान के जन्म का राज डिकोड हो गया है. इसका सीधा जवाब ना है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये नतीजे अंतरिक्ष में जीवन की उत्पत्ति का पक्का संकेत नहीं देते हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि एस्टेरॉयड्स ने केवल पानी और ऑर्गेनिक कंपाउंड्स धरती तक पहुंचाए थे.

हिल्सबरो में गिरे इस उल्कापिंड की टाइमिंग क्यों अहम है?

हिल्सबरो उल्कापिंड इसलिए इतना मायने रखता है क्योंकि इसे गिरने के तुरंत बाद रिकवर कर लिया गया था. यह पत्थर बारिश और हवा जैसे पर्यावरणीय कारकों से पूरी तरह सुरक्षित रहा. इसके ओरिजिनल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं आया था.

वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे सुरक्षित उल्कापिंड बहुत कम मिलते हैं. ये पानी और प्राचीन एस्टेरॉयड्स के बीच होने वाले इंटरेक्शन के बारे में अहम जानकारी देते हैं.

इसके साथ ही ये अर्ली सोलर सिस्टम में जीवन बनाने वाले केमिकल्स के मूवमेंट को समझने में भी मदद करते हैं. यह पत्थर एक तरह से टाइम कैप्सूल की तरह काम कर रहा है. इससे हमें अरबों साल पहले की दुनिया को समझने का एक शानदार मौका मिला है.



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