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Dehradun danger places : उत्तराखंड का देहरादून अपनी हसीन वादियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके खूबसूरत नजारों के पीछे कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां जाना सीधे मौत को दावत देना है. अगर आप रोमांच के शौकीन हैं तो भी भूलकर इन लोकेशंस का रुख न करें क्योंकि यहां आप एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति में फंस सकते हैं. कुछ इलाके भूतिया कहानियों के साथ-साथ अपने खतरनाक ब्लाइंड टर्न और गहरी खाइयों के लिए जाने जाते हैं. गुच्छुपानी बारिश के मौसम में डेथ ट्रैप बन जाता है. पहाड़ियों पर होने वाली तेज बारिश का पानी सीधे मालदेवता पहुंचता है. अचानक आने वाली बाढ़ में गाड़ियां तक बह जाती हैं.
सर्दी हो या गर्मी हो हर मौसम में पर्यटकों की पहली पसंद पहाड़ों की रानी मसूरी रहती है, जहां घूमने के लिए लोग दूर-दूर से चले आते हैं. इन दिनों भी हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब से टूरिस्ट मसूरी आ रहे हैं लेकिन बरसात के दिनों में मसूरी रोड पर मैगी पॉइंट के एक हिस्से की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई जिससे लोगों के मन में डर बैठ गया है जिस तरह से यह सड़क हवा में उड़ती नजर आ रही है. इसीलिए आपको यहां जाने से बचना चाहिए. आप देहरादून के क्लेमेंट टाउन और डाकरा बाजार में स्वादिष्ट मैगी खा सकते हैं, इसलिए मैगी प्वाइंट जाने से परहेज करेंगे तो आपको फायदा होगा.
लामीधार खदान और हाथीपांव की ओर जाने वाले रास्ते बेहद संकरे और खतरनाक हैं. यह इलाका भूतिया कहानियों के साथ-साथ अपने खतरनाक ब्लाइंड टर्न और गहरी खाइयों के लिए जाना जाता है. बरसात के दिनों में यहां लैंडस्लाइड के साथ-साथ धुंध होने से दृश्यता शून्य हो जाती है, जिससे गाड़ियां सीधे गहरी खाई में जा गिरती हैं.
गुच्छुपानी या रॉबर्स केव पर्यटकों की पहली पसंद है, लेकिन बारिश के मौसम में यह एक डेथ ट्रैप बन जाता है. गुफा संकरी है और अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश से यहां का जलस्तर चंद मिनटों में कई फीट बढ़ जाता है. अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड में कई लोग यहां फंस चुके हैं.
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सहस्रधारा के गंधक का पानी औषधीय माना जाता है लेकिन मुख्य नहाने वाले क्षेत्र से आगे जहां नदी का बहाव तेज होता है, वहां पानी के नीचे गहरे और नुकीले पत्थर हैं. कई पर्यटक गहराई का अंदाजा न होने के कारण गहरे भंवर में फंस जाते हैं. हर साल लापरवाही के कारण यहां डूबने की घटनाएं सामने आती हैं.
पिकनिक के लिए मालदेवता युवाओं की पसंदीदा जगह है लेकिन बरसात में सोंग नदी का उफान जानलेवा होता है. पहाड़ियों पर होने वाली तेज बारिश का पानी सीधे मालदेवता पहुंचता है. अचानक आने वाली बाढ़ में गाड़ियां तक बह जाती हैं. नदी के किनारे बैठना यहां मौत को दावत देने जैसा है.
नालापानी के पास स्थित खलंगा मेमोरियल का ऐतिहासिक महत्व है लेकिन इसके पीछे फैले घने जंगल ट्रेकर्स के लिए सुरक्षित नहीं हैं. यह क्षेत्र गुलदार और जंगली हाथियों का प्राकृतिक कॉरिडोर है. शाम ढलते ही यहां इंसानी आवाजाही बेहद खतरनाक हो जाती है. ढाल होने के कारण यहां के रास्ते बरसात के दिनों में खतरनाक बन जाते हैं.
देहरादून जिले का किमाड़ी क्षेत्र बेहद खूबसूरत है लेकिन यहां तक पहुँचने का रास्ता बहुत फिसलन भरा और खतरनाक है. यहां झरने के कुंड में पानी का दबाव बहुत ज्यादा है और नीचे छिपे हुए दलदल और नुकीली चट्टानें किसी को भी संभलने का मौका नहीं देती हैं, इसलिए बरसात में यहां न जाएं.
राजपुर से होते हुए मसूरी जाने वाला पुराना पैदल रास्ता एडवेंचर के शौकीनों को आकर्षित करता है लेकिन बिना गाइड के इन सुनसान रास्तों पर जाना भारी पड़ सकता है. खड़ी चढ़ाई, आए दिन होने वाले लैंडस्लाइड और मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाने के कारण यहां फंसने पर मदद मिलना नामुमकिन हो जाता है. रोमांच अपनी जगह है लेकिन सुरक्षा भी जरूरी है, इसलिए चेतावनियों और साइनबोर्ड्स को नजरअंदाज करना आप पर भारी पड़ सकता है.




