NATO की सिरफुटव्वल पर कब तक पड़ेगा पर्दा ट्रंप की यूरोप में फूट डालने की कोशिश होगी कामयाब?


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NATO Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के शिखर सम्मेलन में जाकर जो कुछ भी कहा है, वो इस संगठन के अंदर के हालात को बयान करता है. कभी एक-दूसरे की सुरक्षा के लिए बना ये संगठन आज की तारीख में सिर्फ और सिर्फ दिखावे का रह गया है. यूरोपीय देशों में से कुछ ट्रंप की नीतियों का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ नहीं कर रहे. वहीं ट्रंप खुद लगातार ये कह रहे हैं कि नाटो अमेरिका के लिए किसी काम का नहीं रहा.

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मार्क रुटे- डोनाल्ड ट्रंप. (रॉयटर्स)

नाटो वो संगठन है, जो पश्चिमी देशों को एक-दूसरे के साथ हर परिस्थिति में खड़े रहने के उद्देश्य से बनाया गया था. खासतौर पर रूस के खतरे से निपटने के लिए यूरोप के देशों ने मिलकर इसकी स्थापना की और कई बार उनके इस संगठन का वैश्विक प्रभाव भी दिखाई दिया. हालांकि पिछले साल से नाटो देशों के बीच असहमति का माहौल बना हुआ है. खासतौर पर अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों के बीच. ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ये अलग-थलग हुए और ईरान में होर्मुज संकट के दौरान ये दूरी और बढ़ गई. ट्रंप ने तो कई बार खुले मंच से नाटो को कागजी शेर तक कह दिया.

हालांकि हाल में हुए नाटो (NATO) सम्मेलन में इसके महासचिव मार्क रुटे ने कुछ और ही कहा. उन्होंने कहा कि नाटो पश्चिमी देशों की रक्षा का मुख्य स्तंभ है और यह अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है. अंकारा में चल रहे शिखर सम्मेलन के दौरान बीबीसी को दिए इंटरव्यू में मार्क रुटे ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के कुछ विवादास्पद बयान सिर्फ परिवार में होने वाले झगड़े की तर है. ट्रंप ने कहा था कि वे निराश हैं क्योंकि नाटो ने उनका ईरान युद्ध में साथ नहीं दिया. हालांकि कुछ देशों ने अमेरिका को अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी.

परिवार के झगड़े जैसा है ट्रंप का व्यवहार

मार्क रुटे ने कहा कि परिवार में कभी-कभी झगड़ा होता है, लेकिन नाटो परिवार में सब एक साथ हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप नाटो के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. ट्रंप ने अंकारा में दोहराया कि अमेरिका ने नाटो पर खरबों डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक लाभ नहीं मिला. फिर भी रुटे का कहना है कि अमेरिका को यूरोप की जरूरत है. उन्होंने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का उदाहरण दिया, जिसमें यूरोपीय ठिकानों से 5000 विमान उड़े थे. हालांकि एक सच ये भी है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरान उन देशों पर भड़के रहे, जिन्होंने इस मसले पर उनका साथ नहीं दिया.

यूरोप में फूट डाल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

नाटो के उत्तरी देश रूस के परमाणु पनडुब्बी ठिकानों के करीब हैं. रुटे ने कहा कि नाटो अमेरिका के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली का काम करता है. रुटे ने जोर दिया कि 32 सदस्य देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं. इस सम्मेलन का मुख्य फोकस यूरोपीय देशों की ओर से रक्षा पर ज्यादा खर्च करने के वादों को अमली जामा पहनाना था. रुटे ने बताया कि पिछले दो साल में कनाडा और यूरोपीय देशों ने 2.5 लाख करोड़ डॉलर अतिरिक्त रक्षा खर्च किए हैं. इन सबके बावजूद आज की स्थिति ये है कि अमेरिका इस संगठन का सबसे ताकतवर देश है और ट्रंप कई बार ये बात कह चुके हैं कि अमेरिका न हो, तो नाटो की कोई औकात नहीं है. वे कुछ तुर्की जैसे देश की तारीफ करते हैं, फ्रांस-इटली से रिश्ते सुधारते हैं और ब्रिटेन, स्पेन से दूरी बनाकर रख रहे हैं. इस तरह कहीं न कहीं वे इस संगठन के देशों में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि नाटो का अस्तित्व सिर्फ अमेरिका के बल पर रहे.

ट्रंप के कुछ तीखे बयानों के बावजूद नाटो महासचिव मार्क रुटे पूरे सम्मेलन में एकजुटता और मजबूती का संदेश दे रहे हैं. नाटो अब रूस जैसे खतरे से निपटने के लिए ज्यादा तैयार दिख रहा है, लेकिन ईरान के मसले ने जिस तरह की फूट दिखाई दिए, उसे संभालना आसान नहीं है.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें



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