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Donald Trum News: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बर्थराइट सिटीजनशिप (Birthright Citizenship) पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया. फैसले के कुछ ही घंटे बाद ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सटायर वाले अंदाज में बधाई दी. इसके बाद नई राजनीतिक बहस छिड़ गई. उनका इशारा 1898 के ऐतिहासिक United States v. Wong Kim Ark फैसले की ओर था, जिसने अमेरिका में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को नागरिकता का अधिकार दिया था.लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप ने शी जिनपिंग का नाम क्यों लिया, 14वें संशोधन में क्या प्रावधान है, सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया और यह मामला अमेरिकी राजनीति और इमिग्रेशन पॉलिसी के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है.
ट्रंप का मानना है कि जन्मसिद्ध नागरिकता की मौजूदा व्यवस्था का फायदा विदेशी नागरिकों को मिलता है. (AP)
America News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा कुछ कर दिया है कि चीन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम सुर्खियों में आ गया है.अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बर्थराइट सिटीजनशिप (Birthright Citizenship) पर कानूनी झटका मिलने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बधाई दे दी. पहली नजर में इस पोस्ट में ऐसा लगा जैसे ट्रंप चीन की किसी उपलब्धि की तारीफ कर रहे हों, लेकिन वास्तव में इसके पीछे अमेरिकी संविधान, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर गहरी राजनीतिक नाराजगी छिपी हुई थी. यही वजह है कि उनका यह बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया.
ट्रंप का पोस्ट.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का तंज
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को बड़ा झटका दिया. कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से माना कि संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को नागरिकता मिलती है, चाहे उनके माता-पिता अस्थायी वीजा पर हों या अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हों. फैसले के कुछ घंटे बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘मैं राष्ट्रपति शी और महान देश चीन को उनकी जबरदस्त बर्थराइट सिटिजनशिप जीत पर बधाई देना चाहता हूं.’ यह टिप्पणी सीधे तौर पर चीन की तारीफ नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उनका व्यंग्य थी.
- ट्रंप का मानना है कि बर्थराइट सिटीजनशिप की मौजूदा व्यवस्था का फायदा विदेशी नागरिकों को मिलता है. इसी वजह से उन्होंने चीन का उदाहरण देकर यह संदेश देने की कोशिश की कि अदालत के फैसले से विदेशी परिवारों को लाभ मिलेगा. उनके बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में नई बहस शुरू हो गई.
शी जिनपिंग का नाम क्यों लिया?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप का इशारा सीधे 1898 के ऐतिहासिक मामले United States v. Wong Kim Ark की ओर था. वोंग किम आर्क का जन्म 1873 में सैन फ्रांसिस्को में चीनी प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था. विदेश यात्रा से लौटने पर अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें यह कहकर प्रवेश देने से इनकार कर दिया कि उनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं थे इसलिए वह भी नागरिक नहीं हैं.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 1898 में अदालत ने फैसला दिया कि अमेरिका में जन्म लेने के कारण वोंग किम आर्क अमेरिकी नागरिक हैं. इसी फैसले ने बर्थराइट सिटीजनशिप की संवैधानिक व्याख्या को मजबूत आधार दिया. ट्रंप का कहना है कि इसी ऐतिहासिक फैसले का लाभ लंबे समय से विदेशी मूल के लोगों को मिलता रहा है. इसलिए उन्होंने व्यंग्य में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम लिया.
क्या है 14वां संशोधन?
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन (14th Amendment) साल 1868 में लागू किया गया था. इसका Citizenship Clause कहता है कि ‘संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म लेने या प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाला हर व्यक्ति जो अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, अमेरिकी नागरिक होगा.’ डेढ़ सौ साल से अधिक समय से अमेरिकी अदालतें इस प्रावधान की व्याख्या लगभग हर उस बच्चे के पक्ष में करती रही हैं जिसका जन्म अमेरिका में हुआ हो. केवल विदेशी राजनयिकों (Diplomats) और युद्ध के दौरान कब्जा करने वाली विदेशी सेना के बच्चों को इससे बाहर रखा गया है. इसी संवैधानिक प्रावधान के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के आदेश को खारिज कर दिया.
ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर क्या था?
अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए थे. इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को स्वतः नागरिकता से वंचित करना था जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या केवल अस्थायी कानूनी दर्जा रखते हों. ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ऐसे बच्चे अमेरिकी संविधान की उस शर्त को पूरा नहीं करते, जिसके तहत जन्म से नागरिकता पाने के लिए व्यक्ति का पूरी तरह अमेरिकी कानून के अधिकार क्षेत्र में होना जरूरी माना जाता है. इसलिए उन्हें जन्म के साथ नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए. उनका उद्देश्य यह था कि केवल अमेरिकी नागरिकों या स्थायी निवासियों के बच्चों को ही बर्थराइट सिटीजनशिप मिले. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
रिपोर्टों के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने सुनवाई के दौरान 1898 के United States v. Wong Kim Ark फैसले का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक व्याख्या से हटने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान का 14वां संशोधन अमेरिका में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को स्वतः नागरिकता देता है. इसलिए राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश संविधान के अनुरूप नहीं माना जा सकता. इस फैसले को ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
ट्रंप के एजेंडे को क्यों लगा बड़ा झटका?
यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी हार में से एक माना जा रहा है. चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने अवैध इमिग्रेशन रोकने और तथाकथित ‘Anchor Baby’ नीति खत्म करने का वादा किया था. इस फैसले से पहले भी सुप्रीम कोर्ट उनकी वैश्विक टैरिफ नीति को झटका दे चुका है. इसके अलावा फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को तत्काल हटाने की कोशिश पर भी अदालत ने रोक लगा दी थी. ऐसे में बर्थराइट सिटीजनशिप पर आया फैसला ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे के लिए और बड़ा झटका माना जा रहा है.
इस पूरे विवाद का वैश्विक महत्व क्या है?
यह विवाद केवल अमेरिका की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है. अमेरिका में बर्थराइट सिटीजनशिप का मुद्दा दुनिया भर में प्रवासन, संवैधानिक अधिकारों और नागरिकता कानूनों पर होने वाली बहस से जुड़ा है. ट्रंप का शी जिनपिंग का नाम लेना भी एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने चीन का जिक्र कर यह दिखाने की कोशिश की कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला विदेशी मूल के लोगों के हित में गया है. हालांकि एक्सर्पट का मानना है कि अदालत का फैसला पूरी तरह संविधान और 14वें संशोधन की स्थापित व्याख्या पर आधारित है. इसलिए ट्रंप की टिप्पणी को अधिकतर विश्लेषक एक राजनीतिक प्रतिक्रिया और व्यंग्य के रूप में देख रहे हैं, न कि चीन की तारीफ के रूप में.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें




