51 फीट लंबी, 30 किलो वजनी! उदयपुर की इस 138 कमरों वाली हवेली में है दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी


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World’s Largest Turban: अगर आप उदयपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो बागौर की हवेली को अपनी सूची में जरूर शामिल करें. यहां इतिहास, संस्कृति और कला का अनोखा संगम देखने को मिलता है. खासकर दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी हर उम्र के लोगों को आकर्षित करती है और यही वजह है कि यह हवेली आज भी उदयपुर के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है.गंगौर घाट के पास स्थित इस हवेली में प्रदर्शित पगड़ी करीब 30 किलो वजनी, 51 फीट लंबी और 11 इंच चौड़ी है. इसे बड़ौदा के कलाकार अवंतीलाल चावला ने 25 दिनों में तैयार किया था. यह पगड़ी राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, सम्मान और पारंपरिक शिल्पकला का प्रतीक मानी जाती है. हवेली में आने वाले देश-विदेश के पर्यटक इस अनोखी धरोहर को देखने और इसके साथ तस्वीरें खिंचवाने जरूर पहुंचते हैं.

झीलों की नगरी उदयपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, राजसी संस्कृति और अनोखी विरासत के लिए दुनियाभर में मशहूर है. यहां आने वाले पर्यटक सिटी पैलेस, पिछोला झील और अन्य दर्शनीय स्थलों के साथ-साथ गंगौर घाट के पास स्थित बागौर की हवेली देखने भी जरूर पहुंचते हैं. करीब 138 कमरों वाली इस ऐतिहासिक हवेली में एक ऐसा अनोखा आकर्षण भी मौजूद है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. यहां दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी प्रदर्शित की गई है, जो पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

बागौर की हवेली में रखी यह विशाल पगड़ी अपने आकार और वजन के कारण बेहद खास मानी जाती है. इस पगड़ी का वजन करीब 30 किलो है. इसकी लंबाई लगभग 51 फीट और चौड़ाई 11 इंच है. इसे देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि इतनी बड़ी पगड़ी भी बनाई जा सकती है. यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक इसके साथ तस्वीरें खिंचवाना नहीं भूलते.

इस अनोखी पगड़ी को बड़ौदा के प्रसिद्ध कलाकार अवंतीलाल चावला ने तैयार किया था. इसे बनाने में करीब 25 दिनों का समय लगा.पगड़ी को पारंपरिक शैली में तैयार किया गया है, ताकि राजस्थान की समृद्ध पगड़ी संस्कृति और शिल्पकला को प्रदर्शित किया जा सके. यह सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और हस्तकला का शानदार उदाहरण भी मानी जाती है.

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राजस्थान में पगड़ी सिर्फ सिर पर पहनने का वस्त्र नहीं, बल्कि सम्मान, स्वाभिमान और संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रंग, डिजाइन और बांधने की शैली वाली पगड़ियां देखने को मिलती हैं. ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी को बागौर की हवेली में प्रदर्शित करना यहां आने वाले पर्यटकों को राजस्थान की इस समृद्ध परंपरा से जोड़ने का भी काम करता है.

बागौर की हवेली खुद भी उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है. इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में करवाया गया था. हवेली में कुल 138 कमरे हैं, जिन्हें पारंपरिक राजस्थानी शैली में सजाया गया है. यहां राजघराने के समय इस्तेमाल होने वाली कई दुर्लभ वस्तुएं, पुराने फर्नीचर, वेशभूषाएं, आभूषण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चीजें भी प्रदर्शित की गई हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं.

हवेली में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘धरोहर’ भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है. इस कार्यक्रम में राजस्थान के लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं की शानदार प्रस्तुति दी जाती है. यही वजह है कि बागौर की हवेली सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान की जीवंत संस्कृति को करीब से महसूस करने का बेहतरीन स्थान भी बन चुकी है. इसे देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आते हैं.

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