ईरान पर हमला करना अमेरिका के लिए ज्यादा जोखिम भरा क्यों हो सकता है?


अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर हमला किया है. ईरान ने भी उसके जवाब में इजरायल से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक कई जगहों पर मिसाइलों से पलटवार किया है. हालांकि एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान पर हमला वेनेजुएला में एक ऑपरेशन की तुलना में कहीं अधिक जटिल होगा. ये संघर्ष लंबा खींच सकता है.

ईरान का नेतृत्व व्यापक सैन्य क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों के एक नेटवर्क की ताकत रखता है, जो इस लड़ाई में कूदा तो ये ना केवल फैलेगी बल्कि लंबी चल सकती है.

न्यूयार्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले से आगाह किया था. इस रिपोर्ट के अनुसार संगठन इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अली वाएज़ ने कहा, “ईरान के मामले में अमेरिका की लड़ाई छोटी नहीं होगी, ऐसा कुछ नहीं है कि ईरान को आसानी से काबू में किया जा सकता है. ” ये लड़ाई दुनिया में खतरा बढ़ा देगी. अमेरिकी नागरिकों की जान को खतरा बढ़ेगा. हालांकि मध्यावधि चुनाव के साल में ये हमले ट्रंप को फायदा दे सकते हैं.

ये वेनेजुएला जैसा आसान आपरेशन नहीं 

जनवरी में अमेरिकी हमले से पहले वेनेजुएला का आसमान अपेक्षाकृत असुरक्षित था. क्षेत्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास मध्य पूर्व में सबसे बड़े और सबसे विविध मिसाइल भंडारों में एक है. इसके शस्त्रागार में ड्रोन और जहाज-रोधी हथियार शामिल हैं, हालांकि जून में इजरायल के साथ 12 दिनों के युद्ध के बाद ईरान के मिसाइल भंडार की मौजूदा संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है.

कहां तक मार सकती हैं ईरान की मिसाइलें

ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें 1,200 मील से अधिक की दूरी तय करने में सक्षम हैं, जिसमें पश्चिमी तुर्की में स्थित अमेरिकी ठिकाने और इज़राइल और खाड़ी देशों सहित व्यापक मध्य पूर्व क्षेत्र शामिल हैं.

ईरान ने पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास के दौरान पहली बार 93 मील से अधिक की मारक क्षमता वाली समुद्र-आधारित वायु-रक्षा मिसाइल का परीक्षण किया था.

ईरान की रणनीति क्या होगी

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक्सपर्ट सनम वकिल के हवाले से कहा गया कि तेहरान की रणनीति कई मोर्चों पर अस्थिरता को तेजी से बढ़ाना होगा ताकि ये युद्ध फैले, जिससे अमेरिका और सहयोगी देश भी उतनी ही दिक्कत में आएं.

खाड़ी देशों में, जहां कई अमेरिकी सैन्य अड्डे स्थित हैं, वहां इस बात को लेकर चिंता है कि किसी भी अमेरिकी सैन्य हमले से उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई हो सकती है. यही चिंता खाड़ी देशों में अमेरिका के सहयोगी देशों की है. जो लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि ये युद्ध किसी तरह टाला जा सके.

सऊदी अरब और यूएई का रुख 

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पहले ही कह चुके हैं कि वो अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल हमलों की अनुमति के लिए नहीं देंगे. हालांकि उनका डर सही निकला है कि ईरान की मिसाइल की मार उन तक भी होगी.

इजरायल के लिए आसान नहीं

ईरान के जवाबी हमले से इज़राइल के प्रमुख शहर प्रभावित हो सकते हैं. जून में शुरू हुए युद्ध के दौरान इज़राइली सेना ने इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करके ईरान की अधिकांश मिसाइलों को मार गिराया था. लेकिन उससे इजरालय का नुकसान भी हुआ था. खुफिया अधिकारियों का कहना है कि गाजा में हमास और लेबनान में हिज़्बुल्लाह के हमलों से दो साल से अधिक समय तक लगातार निपटने के बाद इज़राइल के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या कम हो चुकी होगी.

प्रॉक्सी बलों को सक्रिय कर देगा ईरान

ईरान मध्य पूर्व में प्रॉक्सी बलों का उपयोग करते हुए एक “प्रतिरोध धुरी” संचालित करता है , जिसमें यमन में हौथी और लेबनान में हिज़्बुल्लाह शामिल हैं. इसने क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने और विरोधियों को चुनौती देने के लिए इन समूहों का निर्माण और उन्हें हथियारबंद किया है. हालांकि कई प्रॉक्सी समूह बुरी तरह कमजोर हो गए हैं, फिर भी वे अमेरिकी सेनाओं और सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे कई मोर्चे बन सकते हैं और संघर्ष ईरान की सीमाओं से परे भी फैल सकता है.

इराक में ईरान समर्थक कम से कम एक समूह ने अमेरिका के हमले की स्थिति में तेहरान को समर्थन देने का वादा किया है. उसके नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे व्यापक संघर्ष के तहत “शहादत अभियान” का आदेश दे सकते हैं. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हौथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना फिर से शुरू किया जा सकता है जैसा उन्होंने 2023 के अंत में हमास के समर्थन में इजरायल के साथ युद्ध के दौरान किया था.

ईरान में सरकार को हटाना क्यों आसान नहीं

ईरानी सरकार एक धर्मतंत्र है जिसमें सर्वोच्च नेता ही मुख्य सत्ता है. इसकी असली ताकत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर हैं, जो सशस्त्र बलों की एक खूंखार और शक्तिशाली शाखा है, जिसकी अनुमानित संख्या लगभग 150,000 है, जो शासन के सत्तावादी एजेंडे की रक्षा करते हैं और उसे आगे बढ़ाते हैं.

ईरान में सरकार को हटाना सर्वोच्च नेता को हटाने जितना आसान नहीं है. ईरान में वास्तविक सत्ता विचारधारा से संचालित होती है, जिसे राजनीतिक कट्टरपंथियों का समर्थन प्राप्त है. करीब आधी सदी से सुदृढ़ हो चुकी एक जटिल सत्ता संरचना द्वारा इसे और मजबूती देती है.

ईरान ने पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी , जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक अवरुद्ध हो जाएगा. दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होकर होता है.



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