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Jodhpur Weekend Getaway: अगर आप वीकेंड पर शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और तनाव से दूर कुछ शांत और प्राकृतिक जगहों की तलाश में हैं, तो जोधपुर के आसपास बसे खूबसूरत गांव आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं. ये गांव राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति, ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा अनुभव कराते हैं. यहां आपको शहरी शोर-शराबे से दूर शांत वातावरण, खुले खेत, स्थानीय खानपान और लोगों की आत्मीयता देखने को मिलेगी. कई गांव अपने ऐतिहासिक महत्व, लोक कला और प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध हैं. वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ इन स्थानों की यात्रा आपको मानसिक सुकून और नई ऊर्जा का अनुभव करा सकती है. खास बात यह है कि यहां कम भीड़भाड़ होने के कारण आप प्रकृति के बीच आराम से समय बिता सकते हैं.
जोधपुर के आसपास मोगड़ा स्थित बिश्नोई गांव अपनी अनोखी जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाने जाते हैं. यहां लोग पेड़ों और वन्यजीवों की रक्षा को धर्म का हिस्सा मानते हैं. गांवों में काले हिरण, चिंकारा और मोर आसानी से देखे जा सकते हैं. पर्यटक यहां ग्रामीण संस्कृति, पारंपरिक राजस्थानी भोजन और लोक जीवन का अनुभव कर सकते हैं. बिश्नोई समुदाय की जीवनशैली लोगों को काफी प्रभावित करती है.

जोधपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित खेजड़ली गांव पर्यावरण संरक्षण के इतिहास के लिए प्रसिद्ध है. वर्ष 1730 में अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था. यह गांव आज भी प्रकृति प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है. यहां हर साल खेजड़ली शहीद मेला भी आयोजित होता है। गांव की शांत फिजा और हरियाली इसे खास बनाती है.

गुड़ा बिश्नोइयां गांव जोधपुर के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है. यहां आने वाले पर्यटक काले हिरण, मोर और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में देख सकते हैं. गांव में पारंपरिक राजस्थानी घर, लोक संगीत और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिलती है. स्थानीय लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं. यह स्थान विदेशी पर्यटक को फोटोग्राफी और ग्रामीण परिवेश के साथ रहकर विदेशी पर्यटक को बेहद पसंद किया जाता है.
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जोधपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित सालावास गांव अपनी हस्तनिर्मित दरियों के लिए मशहूर है. यहां के कारीगर पीढ़ियों से पारंपरिक तरीके से दरी बनाने का काम करते आ रहे हैं. देश-विदेश से लोग यहां की कलात्मक दरियां खरीदने आते हैं. पर्यटक यहां बुनाई की पूरी प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं. ग्रामीण हस्तशिल्प और स्थानीय कला को समझने के लिए यह गांव बेहतरीन जगह है.

जोधपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर ओसियां को राजस्थान का ‘खजुराहो’ भी कहा जाता है. यहां 8वीं से 12वीं शताब्दी के कई प्राचीन हिंदू और जैन मंदिर मौजूद हैं. रेगिस्तान के बीच स्थित यह कस्बा ऊंट सफारी और डेजर्ट कैंपिंग के लिए भी प्रसिद्ध है. सूर्यास्त के समय यहां का नजारा बेहद आकर्षक दिखाई देता है. इतिहास, धार्मिक आस्था और रोमांच का अनूठा संगम ओसियां को खास बनाता है.




