Last Updated:
Summer Health Tips : गर्मी की दस्तक के साथ बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी, जुखाम, खांसी, उल्टी और दस्त की समस्या बढ़ने लगी है. ऐसे में डॉक्टरों की सलाह जरूरी है, लेकिन झोलाछाप को भी दिखने से बचें. अगर बच्चे को चार से पांच बार दस्त या उल्टी हो रही है तो यह डायरिया के लक्षण हैं. इस बारे में लोकल 18 ने मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार सिंह से बात की. वे बताते हैं कि अगर बच्चा सुस्त है, बार-बार उल्टी हो रही है, कुछ खा नहीं रहा है, मुंह सूख गया है, आंखों में नीलापन कम हो गया है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
मिर्जापुर. ठंड का मौसम खत्म होने के साथ ही गर्मी का मौसम शुरू हो गया है. बदलते मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों को होती हैं. वायरल फीवर के बाद डायरिया सबसे ज्यादा बच्चों को परेशान करती है. मिर्जापुर में इन दिनों प्रतिदिन 80 से 100 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं. बच्चों को वायरल फीवर और डायरिया से बचाव के लिए घर पर ही साफ सफाई रखें. इसके साथ ही खान-पान पर विशेष ध्यान दें. डॉक्टर के मुताबिक, साफ सफाई के साथ बच्चों को घर पर बना भोजन दें. अगर डायरिया जैसी समस्या महसूस हो रही है तो बड़े बच्चों को घर पर ही चीनी, नींबू और नमक मिलाकर दे सकते हैं. छोटे बच्चों को घर पर वजन के हिसाब से ओआरएस दे सकते हैं. ज्यादा समस्या होने पर बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं ताकि, समय से बेहतर उपचार मिल सके और ज्यादा परेशानी न हो.
ये रहे लक्षण
मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है. इसमें बच्चों वायरल फीवर सर्दी, जुखाम, खांसी, उल्टी व दस्त होने लगता है. बदलते मौसम में बच्चों को साफ खाना दें. घर से बना हुआ खाना दें. अगर बच्चे को चार से पांच बार दस्त या उल्टी हो रहा है तो यह डायरिया का लक्षण है. ऐसे में बच्चों को ओआरएस दे सकते हैं. जिंक सिरप भी दे सकते हैं. अगर छोटा बच्चा है तो नाक जाम होते हैं. डॉक्टर की सलाह के बाद ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकते हैं. बड़े बच्चे हैं तो घर पर ही ओआरएस बनाकर दे सकते हैं. यह ओआरएस नमक, चीनी व पानी की मदद से तैयार होता है. वजन के हिसाब से 100 या 150 एमएल दे सकते हैं.
यहां कराए उपचार
डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि अगर बच्चा सुस्त है, बार-बार उल्टी हो रही है, कुछ खा नहीं रहा है, मुंह सूख गया है, आंखों में नीलापन कम हो गया है तो डॉक्टर को दिखा सकते हैं. ध्यान रखें कि झोलाझाप को न दिखाएं. कई बार प्रैक्टिस करने वाले बच्चों को पानी चढ़ा देते हैं, जिससे सीने में पानी भरने का खतरा रहता है. इसलिए बाल रोग विशेषज्ञ को ही दिखाएं. नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर भी दिखा सकते हैं, ताकि समय रहते सही जांच व इलाज हो सके. ज्यादा समस्या होने पर मंडलीय अस्पताल में दिखा सकते हैं.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें





