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अमेरिका का सबसे महंगा युद्धपोत USS जेराल्ड आर फोर्ड एक बार फिर सवालों के घेरे में है. 326 दिन की रिकॉर्ड तैनाती और युद्ध अभियानों के बावजूद यह 13 अरब डॉलर का सुपरकैरियर अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक F-35C स्टेल्थ फाइटर को उड़ाने में सक्षम नहीं है. अब इसे करीब एक साल तक शिपयार्ड में खड़ा रहना पड़ेगा ताकि इसकी खामियां दूर की जा सकें.
जेराल्ड फोर्ड F-35C को सपोर्ट नहीं कर पा रहा है.
दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत, USS जेराल्ड R. Ford इन दिनों आलोचनाओं के घेरे में है. इसमें एक ऐसी कमी सामने आई है, जो एक्सपर्ट्स को हैरान कर रही है. वजह है इसकी भारी भरकम कीमत के बावजूद इसमें दिखी कमियां. इसकी कीमत करीब 13 अरब डॉलर है, जिस कारण ये दुनिया का सबसे आधुनिक और सबसे महंगा लड़ाकू विमान हो जाता है. लेकिन ये अमेरिका के स्टील्थ फाइटर जेट F-35C लाइटनिंग II को आज तक ऑपरेट नहीं कर पा रहा है. अगर इसे चलाया गया तो जहाज पर ही छेद हो सकता है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह वही फाइटर जेट है, जिसके लिए इस जहाज को भविष्य की युद्ध जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया था. लेकिन आज की सच्चाई यह है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी जेराल्ड फोर्ड को पुराने F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों के साथ ही काम चलाना पड़ा.
एक साल तक फोर्ड की रिपेयरिंग होगी
USS जेराल्ड फोर्ड हाल के दिनों में काफी विवादों में रहा है. पहले वेनेजुएला और फिर ईरान के पास इसकी तैनाती चली. कभी इसके टॉयलेट बंद होते रहे हैं, कभी इसमें आग लगती रही है. लगातार समंदर में रहकर इसके सैनिक भी परेशान हो गए थे. 326 दिनों क तैनाती के बाद यह वापस अमेरिका लौट आया है. वियतनाम युद्ध के बाद यह किसी एयरक्राफ्ट कैरियर की अब तक की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है. हालांकि इसने कई बड़े ऑपरेशन चलाए, लेकिन इसके बावजूद यह F-35 फाइटर जेट को उड़ाने में सक्षम नहीं रहा. अब जहाज को व्यापक मरम्मत और अपग्रेड के लिए शिपयार्ड भेजा गया है, जहां इसके कम से कम एक साल तक रहने की उम्मीद है.
आखिर F-35C क्यों नहीं उड़ा सकता फोर्ड?
समस्या की सबसे बड़ी वजह गर्मी है. F-35C का इंजन लगभग 3600 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान पैदा करता है. यह तापमान फोर्ड पर अभी तक इस्तेमाल किए जा रहे सुपर होर्नेट विमानों से कहीं ज्यादा है. जहाज के डेक पर लगे जेट ब्लास्ट डिफलेक्टर्स और आसपास की सतहें इस स्तर की गर्मी को लगातार झेलने के लिए तैयार नहीं हैं. अमेरिकी नौसेना को डर है कि अगर मौजूदा स्थिति में लगातार F-35C उड़ाए गए तो डेक को नुकसान पहुंच सकता है.
सिर्फ डेक नहीं, पूरी व्यवस्था अधूरी
समस्या केवल रनवे या डेक तक सीमित नहीं है. F-35C एक स्टील्थ विमान है और इसकी देखभाल के लिए विशेष फैसिलिटी की जरूरत होती है. इसके लिए स्टील्थ कोटिंग की मरम्मत के लिए विशेष वर्कशॉप, संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के लिए सुरक्षित कमरे और ODIN नामक डिजिटल डायग्नोस्टिक नेटवर्क शामिल हैं. फोर्ड में इनमें से कई व्यवस्थाएं अभी तक पूरी तरह मौजूद नहीं हैं.
20 साल पुरानी डिजाइन ने बिगाड़ा खेल
रिपोर्ट के मुताबिक असली गलती समय पर हुई. Ford की डिजाइन 2005 के आसपास तय कर दिया गया था. उस समय F-35C के अंतिम तकनीकी मानक तय भी नहीं हुए थे. यानि जहाज पहले डिजाइन हो गया और विमान बाद में बनाया गया. जब तक F-35C की असली जरूरतें सामने आईं, तब तक Ford का निर्माण काफी आगे बढ़ चुका था. नतीजा यह हुआ कि दोनों प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के साथ पूरी तरह तालमेल नहीं बैठा पाए.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…और पढ़ें




