सूत्रों ने बताया कि यह गणित राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तृणमूल के वर्तमान में 28 लोकसभा सदस्य हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली हुई है। 20 सदस्यों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत को आसानी से पार कर जाएगा।
यह घटनाक्रम बागी सांसदों द्वारा नयी दिल्ली में एक बंद कमरे में बैठक करने के एक दिन बाद सामने आया है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों पर तृणमूल नेतृत्व के अधिकार को लेकर उठने वाले सवाल और भी तेज होने की आशंका है। ममता बनर्जी के लिए, संकट अब संगठनात्मक असहमति से आगे बढ़कर पार्टी की संसदीय ताकत पर से नियंत्रण खोने की आशंका में तब्दील हो गया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल और विपक्षी गठबंधन, दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।




