चीनी मिसाइल से ईरान ने ढेर किया अमेरिका का F-15 फाइटर जेट, रडार और सैटेलाइट सपोर्ट का सच जान कांप उठेंगे ट्रंप


मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है. अमेरिका मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है युद्ध के दौरान मार गिराए अमेरिकी F-15E प्लेन को चीनी मिसाइल से मार गिराया था. ये घटना अप्रैल की है, जिसे लेकर पूरी दुनिया में काफी चर्चा हुई थी.

एनबीसी सूत्रों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि F-15E प्लेन को गिराने के लिए चीन में बनीं शोल्डर लॉन्चर मिसाइल का उपयोग किया गया था. हालांकि, अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हो सका है कि यह मिसाइल ईरान को हाल ही में दी गई थी या यह उसके पुराने सैन्य स्टॉक का हिस्सा थी.

चीनी दूतावास ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि चीन सैन्य निर्यात को लेकर हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जिम्मेदारी से काम करता है.

इस घटना के बाद अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में एक नया तनाव जुड़ गया है. ट्रम्प प्रशासन ने चीन पर सैटेलाइट सेवाओं और तकनीकी ट्रांसफर के जरिए ईरान की सेना को मजबूत करने और मध्य पूर्व में अमेरिकी बलों को निशाना बनाने में मदद करने का आरोप लगाया है.

विशेषज्ञों और स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2006 में ईरान पर संयुक्त राष्ट्र का हथियार प्रतिबंध लगाए जाने के बाद, चीन ने बड़े हथियारों की बिक्री कम कर दी. इसके बजाय नागरिक और सैन्य ड्यूअल-यूज़ वाली टेकनिक दी. इसके बाद ईरान ने अपने घरेलू हथियार उत्पादन उद्योग का विस्तार किया.

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने ईरान को आर्थिक सहायता देना जारी रखा है. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज में चीन कार्यक्रम के सीनियर डायरेक्टर क्रेग सिंगलेटन ने कहा कि बीजिंग ने टेक्नोलॉजी और अन्य दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं के माध्यम से ईरान को अपनी घरेलू सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने और अपनी सेना को बनाए रखने में भी मदद की है.

अप्रैल में गिराया गया था प्लेन

इस पूरे मामले की शुरुआत इसी साल अप्रैल में हुई. तब दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर प्लेन को मार गिराया गया. दशकों में यह पहला ऐसा मौका था जब दुश्मन की गोलीबारी में किसी अमेरिकी लड़ाकू प्लेन को मार गिराया गया हो. इस हमले के वक्त प्लेन पर सवार चालक दल के दोनों सदस्य ईरान के ऊपर सुरक्षित रूप से इजेक्ट निकल गए.

इस मामले की पूरी जानकारी पेंटागन ने दी थी. पेंटागन के अनुसार, विमान के पायलट को सात घंटे के भीतर सुरक्षित बचा लिया गया था. जबकि वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर ने खुद को ज़ाग्रोस पहाड़ों की तलहटी में छुपाए रखा. इन्हें दो दिन बाद खोजकर सुरक्षित बाहर निकाला गया.

डोनाल्ड ट्रंप ने दी थी प्रतिक्रिया

घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया कि इस विमान को शोल्डर लॉन्चर मिसाइल से निशाना बनाया गया था. अमेरिकी अधिकारी इस शूटडाउन की विस्तृत जांच कर रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस चीनी सहायता का युद्ध के मैदान पर कोई निर्णायक प्रभाव नहीं पड़ा है.

इस समय अमेरिकी और ईरानी अधिकारी इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. इसी महीने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ सीजफायर भी कराया है. इसके बावजूद, अमेरिका इस क्षेत्र में अपने हमलों को जारी रखे हुए है, जिन्हें वह “रक्षात्मक” कार्रवाई बता रहा है.



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