मानसून के कमजोर रहने के अनुमान और अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,092 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी 24,550 अंक से नीचे बंद हुआ।
कारोबारी सत्र के अंतिम चरण में बिकवाली बढ़ने से बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत गिरकर 74,775.74 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,278.69 अंक टूटकर 74,589.11 अंक तक आ गया था।
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत फिसलकर 23,547.75 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरा सत्र रहा जिसमें बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ।
साप्ताहिक आधार पर बीएसई सेंसेक्स में कुल 639.41 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि एनएसई निफ्टी 171.55 अंक यानी 0.72 प्रतिशत के नुकसान में रहा।
शुक्रवार को सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से पावर ग्रिड, इंटरग्लोब एविएशन, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील और बजाज फाइनेंस के शेयर प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।
दूसरी तरफ, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, लार्सन एंड टुब्रो और इन्फोसिस के शेयरों में तेजी का रुझान रहा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, “कारोबार के अंतिम घंटे में तगड़ी संस्थागत बिकवाली होने से अधिकांश शेयरों ने अपनी बढ़त गंवा दी और बड़े नुकसान के साथ बंद हुए। रिलायंस और आईटीसी जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी ने इस गिरावट को बढ़ाने का काम किया।”
भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जून से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामान्य बारिश होने का अनुमान है, जबकि अन्य हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “आईएमडी के इस अनुमान के बाद बाजार में व्यापक बिकवाली देखी गई। कम वर्षा और अल नीनो प्रभावों के चलते खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि, कच्चे तेल की नरम कीमतों और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट से जोखिम कुछ हद तक सीमित रहा।” वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.52 प्रतिशत गिरकर 92.29 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
लाइवलोंग वेल्थ के संस्थापक एवं शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्षविराम को लेकर स्पष्टता नहीं होने से वैश्विक निवेशक सतर्क रहे, जिससे इक्विटी बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति सीमित रही।
व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सूचकांक 1.26 प्रतिशत गिर गया जबकि मझोली कंपनियों के मिडकैप सूचकांक में 0.73 प्रतिशत की गिरावट रही।





