पीला स्पर्म किस बीमारी का संकेत, वक्त रहते उठाएं जरूरी कदम, वरना पार्टनर को भी कर देंगे बीमार !


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Yellow Semen Causes: कई लोगों के स्पर्म का रंग पीला हो जाता है, जिसकी कई वजह होती हैं. पीला स्पर्म हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता. कई बार यह डिहाइड्रेशन, लंबे समय तक इजैक्युलेशन न होने या विटामिन सप्लीमेंट्स के कारण भी हो सकता है. अगर इसके साथ दर्द, जलन, बदबू या पेशाब में समस्या हो तो यह संक्रमण या प्रोस्टाइटिस का संकेत भी हो सकता है.

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सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के कारण भी स्पर्म का रंग पीला हो सकता है.

Is Yellow Sperm Normal: वीर्य का रंग हल्का सफेद होता है, जिसे नॉर्मल माना जाता है. अगर आपका रंग सामान्य है, तो इसका मतलब है कि आपकी रिप्रोडक्टिव हेल्थ ठीक चल रही है. कई बार लोगों के स्पर्म का रंग पीला हो जाता है और उसमें स्मेल भी आने लगती है. इससे लोगों की चिंता बढ़ जाती है, क्योंकि यह सेहत से जुड़ा मामला होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्पर्म के कलर में बदलाव कई बीमारियों का संकेत हो सकता है. कई बार यह परेशानी टेंपररी होती है और बिना इलाज के भी ठीक हो जाती है. सभी के लिए यह जानना जरूरी है कि स्पर्म का कलर बदल जाए, तो यह क्या संकेत है और कब डॉक्टर से मिलें.

क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक पीला स्पर्म हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता है. कई बार ऐसा तब होता है, जब वीर्य में पेशाब के कुछ अंश मिल जाते हैं. अगर लंबे समय तक यौन संबंध या हस्तमैथुन न हुआ हो, तो वीर्य थोड़ा गाढ़ा और पीलेपन के साथ दिख सकता है. कुछ विटामिन सप्लीमेंट्स जैसे विटामिन B-कॉम्प्लेक्स भी इसके रंग में हल्का बदलाव ला सकते हैं. डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होने पर भी वीर्य थोड़ा गाढ़ा और पीला दिख सकता है. ऐसे मामलों में यह स्थिति अस्थायी होती है और अपने आप ठीक हो जाती है. अगर समस्या लंबे समय तक ठीक न हो, तब यह बीमारी का संकेत है.

कब यह बीमारी का संकेत?

अगर स्पर्म का कलर पीला होने के साथ-साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है. जैसे पेशाब करते समय जलन, वीर्य या जननांग में दर्द, बदबू आना या बुखार जैसे लक्षण. यह कंडीशन प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से जुड़ी हो सकती है. इन संक्रमणों में बैक्टीरिया रिप्रोडक्टिव सिस्टम को प्रभावित करते हैं, जिससे वीर्य के रंग और बनावट में बदलाव आ सकता है. ऐसी स्थिति को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होता, क्योंकि समय पर इलाज न होने पर समस्या बढ़ सकती है और दर्द या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं.

अन्य संभावित कारण क्या हो सकते हैं?

सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज जैसे गोनोरिया या क्लैमाइडिया भी वीर्य के रंग और गंध में बदलाव का कारण बन सकते हैं. इसके अलावा खराब लाइफस्टाइल भी इसमें भूमिका निभाती है. धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, नींद की कमी और असंतुलित आहार प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. उम्र बढ़ने के साथ भी वीर्य के रंग और गुणवत्ता में हल्के बदलाव आ सकते हैं. हालांकि हर बदलाव बीमारी नहीं होता, लेकिन अगर यह लगातार बना रहे तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है. अगर वीर्य का रंग कुछ दिनों से ज्यादा समय तक लगातार पीला रहे, या इसके साथ दर्द, जलन, बुखार, बदबू या पेशाब में परेशानी जैसे लक्षण हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में यूरोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करना चाहिए.

क्या इससे पार्टनर को खतरा होता है?

अगर वीर्य का रंग केवल सामान्य कारणों से बदला है जैसे डिहाइड्रेशन या विटामिन सप्लीमेंट, तो इससे पार्टनर को कोई खतरा नहीं होता. लेकिन अगर कारण सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज है, तो बिना इलाज के यह संक्रमण पार्टनर तक भी पहुंच सकता है. इसलिए सुरक्षित यौन संबंध, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर इलाज बहुत जरूरी है. जागरुकता और सही जानकारी से इस तरह की समस्याओं को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. डॉक्टर आमतौर पर कुछ टेस्ट जैसे यूरिन टेस्ट, सीमन एनालिसिस या इंफेक्शन स्क्रीनिंग करवाते हैं, ताकि सही कारण पता चल सके. सही दवाओं से यह समस्या ठीक हो जाती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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