20 मई 2026
20 मई 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग ने क्यूबा के खिलाफ एक ऐसा कानूनी बम फोड़ा, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया। अमेरिका ने क्यूबा के 94 साल के बूढ़े पूर्व तानाशाह राउल कास्त्रो पर सीधे हत्या और अंतरराष्ट्रीय साजिश का आपराधिक मुकदमा दर्ज कर दिया।
ये पुराना मामला है, जब तारीख थी 24 फरवरी 1996। आरोप है कि राउल कास्त्रो के सीधे आदेश पर क्यूबा के MiG लड़ाकू विमानों ने आसमान में उड़ रहे दो निहत्थे नागरिक विमानों को मिसाइल मारकर चीथड़ों में उड़ा दिया था। इस हमले में 3 अमेरिकी नागरिकों समेत 4 लोग जिंदा जल गए थे।
क्रोनोलॉजी समझिए: अमेरिका ने इस मुकदमे के ऐलान के लिए जानबूझकर 20 मई की तारीख चुनी, क्योंकि इस दिन क्यूबा का स्वतंत्रता दिवस होता है। मियामी में रहने वाले लाखों क्यूबाई शरणार्थी पिछले 30 साल से इस कड़क एक्शन की मांग कर रहे थे, और ट्रंप ने ठीक इसी दिन कास्त्रो पर शिकंजा कस दिया।
21 मई 2026, समंदर में अमेरिकी ‘यमराज’ की एंट्री
मुकदमा दर्ज होने के ठीक अगले ही दिन, अमेरिकी नौसेना का सबसे खूंखार वॉरशिप यूएसएस निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन सागर में क्यूबा के मुहाने पर दाखिल हो चुका है। ये अकेला परमाणु पोत अपने साथ तबाही का पूरा सामान लेकर आया है. इसके डेक पर आसमान से मौत बरसाने वाले F/A-18E सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स और दुश्मन के रडार को अंधा करने वाले EA-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान तैनात हैं। इसके साथ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS ग्रिडले और समंदर में रसद-ईंधन की सप्लाई करने वाला महाकाय जहाज USNS पटक्सेंट भी क्यूबा को घेरकर खड़े हैं।
क्यूबा कहां है? अमेरिका से कितनी दूर
क्यूबा कैरेबियन सागर में है. अमेरिका के फ्लोरिडा तट से ये महज 90 मील यानी करीब 145 किलोमीटर दूर है। आसान भाषा में समझें तो यह दूरी दिल्ली से आगरा के बराबर है। दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति के इतने करीब एक कट्टर दुश्मन देश का होना, यही अमेरिका की 65 साल की सबसे बड़ी परेशानी है। देश में करीब एक करोड़ लोग रहते हैं। 1959 से यहां कम्युनिस्ट सरकार है, पहले फिदेल कास्त्रो, फिर राउल कास्त्रो और अब मिगुएल डियाज-कानेल।
अमेरिका को क्यूबा क्यों चुभता है?
अमेरिका खुद को दुनिया में लोकतंत्र और पूंजीवाद का सबसे बड़ा पैरोकार मानता है। लेकिन उसके बिल्कुल नाक के नीचे 65 साल से एक कम्युनिस्ट सरकार सीना ताने खड़ी है जो उसके सामने कभी नहीं झुकी।
2. मार्क रुबियो ने साफ कहा है कि क्यूबा अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा बन चुका है क्योंकि उसने अपनी जमीन पर चीन और रूस को खुफिया और सैन्य अड्डे बनाने की जगह दी हुई है।
3. इतने बड़े देश के इतने लंबे और कड़े प्रतिबंधों के बाद भी क्यूबा झुका नहीं। यह अमेरिका को हमेशा खटकता रहा है।
पहले भी हुआ है अमेरिका-क्यूबा टकराव?
बे ऑफ पिग्स हमला (1961): CIA ने 1,500 क्यूबाई विद्रोहियों को ट्रेन करके 17 अप्रैल 1961 को क्यूबा के बे ऑफ पिग्स तट पर हमला करवाया था। मकसद था फिदेल कास्त्रो की सरकार को उखाड़ना। लेकिन कास्त्रो की सेना ने तीन दिनों में इस पूरे ऑपरेशन को धूल चटा दी। इसे अमेरिका की सबसे शर्मनाक सैन्य विफलताओं में गिना जाता है।
क्यूबा मिसाइल संकट (1962): इस हमले के बाद खुद को बचाने के लिए क्यूबा ने सोवियत संघ की परमाणु मिसाइलें अपनी जमीन पर तैनात करवा दीं। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने क्यूबा की नौसैनिक नाकेबंदी कर दी। पूरी दुनिया 13 दिन तक परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ी रही। यह अब तक का सबसे करीबी मौका था जब तीसरा विश्वयुद्ध हो सकता था।
ट्रंप का क्यूबा टशन कब से है?
ट्रंप और क्यूबा की लड़ाई उनके पहले कार्यकाल (2017-2021) से ही आक्रामक है। उन्होंने बराक ओबामा की क्यूबा से रिश्ते सुधारने वाली नीति को आते ही पलट दिया और इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध थोप दिए।
क्यूबा इस वक्त अपनी कंगाली के सबसे काले दौर से गुजर रहा है। क्यूबा की लगभग 90% आबादी भीषण गरीबी में जी रही है। मई 2026 में क्यूबा के ऊर्जा मंत्री ने खुद कबूल किया है कि देश में डीजल और तेल पूरी तरह खत्म हो चुका है। राजधानी हवाना समेत पूरे देश में रोजाना 20 से 22 घंटे का पावर कट हो रहा है। वहां दवाइयां, दूध, और खाना खत्म हो चुका है। लोगों को ब्रेड के एक टुकड़े के लिए घंटों लाइनों में लगना पड़ता है। डॉक्टर और इंजीनियरों की सैलरी भी 40-50 डॉलर महीना है, जिससे वे सब्जियां तक नहीं खरीद पा रहे।
क्यूबा ने कहा, अमेरिका याद रखे- खून की नदियां बहेंगी
इस खौफनाक घेराबंदी और पूर्व तानाशाह राउल कास्त्रो पर मुकदमे को क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ने ‘हमले का बहाना’ बताया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल ने अमेरिका को आखिरी कड़क चेतावनी देते हुए कहा, “क्यूबा को अपनी रक्षा करने का पूरा हक है। अगर अमेरिका ने पैर रखने की भी हिमाकत की, तो यहां वो खूनी मंजर होगा जिसकी वॉशिंगटन ने कल्पना भी नहीं की होगी। हम मर जाएंगे, लेकिन घुटने नहीं टेकेंगे।





