जिसे माना सबसे बड़ा ‘खतरा’, उसी के घर जा रहे ट्रंप, क्या है US की असली प्लानिंग


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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले उनकी यात्रा से जुड़ी तैयारियां चल रही हैं. 14 मई को होने वाले अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का काफिला पहले ही सड़कों पर नजर आने लगा है.

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डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी सीनेट में दोनों पार्टियों के सांसदों ने एक प्रस्ताव पेश किया है. इसमें चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी और प्रमुख खतरा बताया गया है. लेकिन दूसरी और डोनाल्ड ट्रंप चीन का दौरा करने जा रहे हैं. वे 14 और 15 मई को चीन के दौरे पर होंगे.

सीनेट में पेश प्रस्ताव में कहा गया कि चीन अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा, आर्थिक हितों और वैश्विक प्रभाव को कमजोर करने की क्षमता रखता है. अमेरिकी सांसदों ने चीन पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां बढ़ाने का आरोप लगाया है. साथ ही ताइवान स्ट्रेट में दबाव बनाने और सैन्य ताकत तेजी से बढ़ाने को लेकर चेताया है.

इसमें ये भी कहा गया है कि यह भी कहा गया कि चीन आर्टिफिशिय इंटेलिजेंसी, क्वांटम कंप्यूटिंग में आगे बढ़ रहा है. वो बाकी उभरती तकनीकों में अमेरिका को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहा है.

आखिर चीन क्यों जा रहे हैं ट्रंप

  • रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया है कि बीजिंग चाहता है कि अमेरिका उन्नत सेमीकंडक्टर्स के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे. उसने चीन को चिप बनाने दूर रखने के एक विधेयक पर चिंता जताई है. इस बीच, अमेरिका चाहता है कि चीन अमेरिकी कंपनियों को रेयर अर्थ खनिजों खेप भेजने की अनुमति दे.
  • अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने कहा है कि दोनों राष्ट्रपति ईरान युद्ध पर चर्चा करेंगे. चीन से इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में हमारे साथ शामिल होने का आग्रह किया गया है. इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को खोला जा सके.
  • वांग ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत के दौरान चीन के लिए ताइवान के मुद्दे पर जोर दिया. लोकतांत्रिक रूप से शासित इस द्वीप को संबंधों के लिए जोखिम का सबसे बड़ा बिंदु बताया है.
  • चीन ताइवान पर अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता है. उसने द्वीप को अपने नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग की संभावना को कभी खारिज नहीं किया है. ताइवान चीन के दावे को दृढ़ता से खारिज करता है. वो कहता है कि केवल ताइवान के लोग ही भविष्य तय कर सकते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले उनकी यात्रा से जुड़ी तैयारियां चल रही हैं. 14 मई को होने वाले अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का काफिला पहले ही सड़कों पर नजर आने लगा है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में काले रंग की भारी-भरकम SUVs दिख रही हैं.



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