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H1B Visa Indian: अमेरिका H1B वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन में करीब 30% तक बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव लाया है. सरकार का कहना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन की सुरक्षा होगी. हालांकि इस फैसले को लेकर समर्थन और विरोध दोनों सामने आए हैं. वहीं यह सीधे तौर पर भारतीयों पर असर डालेगा.
H-1B वीजा वालों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव.
H1B Visa Indian: अमेरिका में काम करने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी खबर है. अमेरिकी सरकार H1B वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. दरअसल, अमेरिका ने प्रस्ताव दिया है कि विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए कंपनियों को अब पहले से ज्यादा सैलरी देनी होगी. सरकार इस न्यूनतम वेतन को करीब 30% तक बढ़ाना चाहती है. सरकार का कहना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा. अभी आरोप लगता है कि कई कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम पैसे देकर काम करवाती हैं, जिससे स्थानीय लोगों की सैलरी प्रभावित होती है. अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से 27 मार्च को प्रस्तावित नए नियम में एंट्री लेवल से लेकर सबसे अनुभवी तक चार कैटेगरी के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि मौजूदा वेतन स्तर 20 साल पहले तय किए गए थे और अमेरिकी श्रमिकों के हितों की पर्याप्त रूप से रक्षा करने में विफल रहे हैं. H1B वीजा सबसे ज्यादा भारतीयों को मिलता है. ऐसे में अगर एंट्री लेवल पर सैलरी बढ़ी तो कंपियां भारतीयों की जगह अमेरिकी लोगों को नौकरी पर रखना पसंद करेंगी.
अभी तक सैलरी कुछ इस तरह थी
- एंट्री लेवल: 73,279 डॉलर सालाना (₹6919406)
- लेवल-2: 98,987 डॉलर (₹9346896)
- लेवल-3: 1,21,979 डॉलर (₹11517928)
- लेवल-4: 1,44,202 डॉलर (₹13616345)
अब सैलरी बढ़कर कितनी होगी?
- एंट्री लेवल: 97,746 डॉलर (₹9229714)
- लेवल-2: 1,23,212 डॉलर (₹11634354)
- लेवल-3: 1,47,333 डॉलर (₹13911992)
- लेवल-4: 1,75,464 डॉलर (₹16568275)
यानी एंट्री लेवल पर सबसे ज्यादा करीब 33% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है.
सरकार क्यों कर रही है बदलाव?
श्रम विभाग का कहना है कि मौजूदा वेतन नियम करीब 20 साल पुराने हैं और अब वे अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की सही तरह से रक्षा नहीं कर पा रहे. कम वेतन के कारण अमेरिकी काम नहीं कर पाते लेकिन दूसरे देशों से आने वाले लोग तैयार हो जाते हैं. सरकार मानती है कि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रख लेती हैं, जिससे लोकल वर्कर्स को नुकसान होता है.
सबकी राय एक जैसी नहीं
इस प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. कुछ लोग इसे सही कदम बता रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी कर्मचारियों को फायदा होगा. वहीं कई कंपनियां और आलोचक कह रहे हैं कि इससे छोटी कंपनियों के लिए नए लोगों को हायर करना मुश्किल हो जाएगा. सरकार ने इस प्रस्ताव पर जनता से 26 मई तक सुझाव मांगे हैं. इसके बाद इन सुझावों की समीक्षा होगी और फिर फाइनल नियम लागू किया जाएगा.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





