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New TB Vaccine Research: दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस की प्रोफेसर साधना शर्मा और मोनिका शर्मा की टीम ने E. coli आधारित एक नई TB सबयूनिट वैक्सीन विकसित की है. जिसके प्री-क्लिनिकल नतीजे काफी उत्साहजनक रहे हैं. यह शोध न केवल टीबी के खिलाफ एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प प्रदान करता है, बल्कि टीम शरीर में विटामिन-डी और टीबी के गहरे अंतर्संबंधों पर भी महत्वपूर्ण रिसर्च कर रही है. टीम ने E.coli आधारित नई TB सबयूनिट वैक्सीन विकसित की. प्री क्लिनिकल नतीजे उत्साहजनक रहे हैं. Vitamin D पर भी अध्ययन जारी है.
दिल्ली: सदियों पुरानी बीमारी लाखों लोगों की जिंदगी पर असर और आज भी पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ तपेदिक यानी TB, इलाज मौजूद है, दवाइयां भी हैं, लेकिन बढ़ते ड्रग रेसिस्टेंट मामलों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे समय में दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से एक उम्मीद भरी रिसर्च सामने आई है, जहां प्रोफेसर साधना शर्मा, मोनिका शर्मा और उनकी टीम पिछले कई वर्षों से TB के खिलाफ नई वैक्सीन विकसित करने में जुटी हुई है. यह रिसर्च सिर्फ एक वैक्सीन बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि भविष्य में TB जैसी गंभीर बीमारी को रोकने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
20 साल से TB की इम्यूनोलॉजी पर काम
प्रोफेसर साधना शर्मा पिछले करीब 20 वर्षों से TB की इम्यूनोलॉजी को समझने पर काम कर रही हैं. उनका कहना है कि शरीर किसी भी संक्रमण के खिलाफ प्रोटीन के छोटे हिस्सों यानी पेप्टाइड्स के जरिए इम्यून रिस्पॉन्स तैयार करता है. इसी आधार पर उनकी टीम ने एक नई सबयूनिट वैक्सीन डिजाइन की है.
BCG से बिल्कुल अलग तकनीक
प्रोफेसर मोनिका शर्मा फिलहाल TB से बचाव के लिए BCG वैक्सीन दी जाती है, जो एक जीवित लेकिन कमजोर बैक्टीरिया पर आधारित होती है. लेकिन मिरांडा हाउस की यह नई वैक्सीन आधुनिक इम्यूनोइन्फॉर्मेटिक्स तकनीक की मदद से तैयार की जा रही है.इस तकनीक में बायोइन्फॉर्मेटिक्स और इम्यूनोलॉजी का इस्तेमाल कर ऐसे प्रोटीन तैयार किए जाते हैं जो शरीर में मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स पैदा कर सकें.
E.coli बैक्टीरिया की मदद से तैयार हो रहा वैक्सीन प्रोटीन
रिसर्च टीम वैक्सीन के लिए खास प्रोटीन तैयार कर रही है. इसके लिए E.coli बैक्टीरिया के अंदर उस प्रोटीन को विकसित किया जाता है, फिर उसे शुद्ध करके वैक्सीन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.फिलहाल इस वैक्सीन का परीक्षण चूहों पर किया जा रहा है. साथ ही TB मरीजों और स्वस्थ लोगों के ब्लड सेल्स पर भी इसका असर देखा जा रहा है. रिसर्च में सामने आया है कि यह वैक्सीन शरीर में अच्छा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा कर रही है.
प्री-क्लिनिकल स्टेज में है रिसर्च
यह रिसर्च अभी प्री-क्लिनिकल स्टेज में है. वैज्ञानिकों ने पाया कि वैक्सीन दिए जाने के बाद जब चूहों को TB बैक्टीरिया से संक्रमित किया गया तो उनके फेफड़ों में बैक्टीरिया की संख्या काफी कम थी. हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट्स में भी बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं. हालांकि, इस वैक्सीन को बाजार तक पहुंचने में अभी काफी समय लगेगा. इसके बाद क्लिनिकल ट्रायल होंगे. जिसके लिए टीम ICMR और दूसरी फंडिंग एजेंसियों से सहयोग लेने की तैयारी कर रही है.
क्यों जरूरी है नई TB वैक्सीन
TB आज भी दुनिया की सबसे बड़ी बीमारियों में से एक है. प्रोफेसर शर्मा के मुताबिक हर चौथा व्यक्ति TB बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकता है, भले ही उसमें लक्षण दिखाई न दें. TB का इलाज लंबा चलता है. मरीजों को कम से कम 6 महीने तक दवाएं लेनी पड़ती हैं. कई लोग बीच में ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट TB और एक्सटेंसिवली ड्रग रेसिस्टेंट TB जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक नई और प्रभावी वैक्सीन विकसित करने पर जोर दे रहे हैं.
Vitamin D और TB के बीच संबंध पर भी रिसर्च
मिरांडा हाउस की टीम केवल वैक्सीन पर ही नहीं, बल्कि Vitamin D और TB के संबंध पर भी अध्ययन कर रही है. कॉलेज छात्रों और अन्य लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में Vitamin D की कमी होती है, उनमें TB होने की संभावना अधिक हो सकती है. टीम IGRA टेस्ट के जरिए यह भी जांच रही है कि किन लोगों को पहले TB संक्रमण हो चुका है.
आने वाले समय में कई नई वैक्सीन पर काम
प्रोफेसर शर्मा का कहना है कि उनकी टीम सिर्फ एक नहीं बल्कि अलग-अलग प्रोटीन फैमिली पर आधारित कई वैक्सीन प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रिसर्च एक लंबी प्रक्रिया है और किसी निष्कर्ष तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं. लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक हैं और टीम को उम्मीद है कि भविष्य में यह रिसर्च TB के खिलाफ बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है.
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