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US Operation Iran Damage: वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का कहना है कि हाल की लड़ाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक अगर ईरान चाहे तो उसे परमाणु हथियार बनाने में 9-12 महीने ही लगेंगे. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि फिर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का फायदा क्या?
ईरान का यूरेनियम अब भी सुरक्षित.
अमेरिका और इजराइल ने ईरान में 42 दिनों ऑपरेशन चलाया. अरबों के हथियार फूंक डाले लेकिन उसका वो मकसद पूरा ही नहीं हुआ, जो लेकर ट्रंप चले थे. सीएनएन की एक नई वीडियो जांच रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ईरान की परमाणु आपूर्ति श्रृंखला के कई महत्वपूर्ण हिस्से अभी भी काम कर रहे हैं. सीएनएन ने दर्जनों साइटों का विश्लेषण किया और रिपोर्ट में नतीजा ये आया कि कुछ जगहों को काफी नुकसान पहुंचा है, लेकिन कई अहम हिस्से बिल्कुल सुरक्षित बचे हुए हैं. खासतौर पर ईरान का हाइली एनरिच्ड यूरेनियम अब भी सुरक्षित है.
इस्फहान की भूमिगत सुरंगें सबसे बड़ी चिंतारिपोर्ट के मुताबिक इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स सबसे ज्यादा चिंता का विषय है. यहां बड़ी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम भूमिगत सुरंगों में छिपा हो सकता है. फ्रेंच अखबार ले मोंद की इमेजेस के मुताबिक हमले से ठीक पहले ट्रकों में नीले कंटेनर सुरंगों के अंदर ले जाए गए थे. विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें यूरेनियम था. सतह पर बनी कई इमारतें नष्ट हो गईं, लेकिन भूमिगत सुरंगों के प्रवेश को सीधे निशाना नहीं बनाया गया. बाद में ईरान ने इन सुरंगों के मुंह को मिट्टी से ढक दिया और रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी.
किन-किन जगहों पर क्या हुआ?
- तेहरान का विश्वविद्यालय: अमेरिका और इजराइल इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआती कड़ी मानते थे. मार्च के मध्य में इस पर हमला किया गया. यह संस्थान 2012 से अमेरिकी प्रतिबंधों में है.
- सागंड यूरेनियम खदान: यहां यूरेनियम का कच्चा माल निकाला जाता है. सैटेलाइट इमेज में कोई नुकसान नहीं दिखा. बल्कि खदान में खुदाई मशीनें अभी भी काम करती दिख रही हैं. मतलब खनन कार्य जारी है.
- अर्दकान प्रोसेसिंग प्लांट: यहां यूरेनियम को येलोकेक में बदला जाता है. 27 मार्च को यहां हमला हुआ और प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन उसके बाद अभी तक कोई पुनर्निर्माण शुरू नहीं हुआ है.
अमेरिका का वॉर शो हुआ फ्लॉप
न्यूक्लियर विशेषज्ञ डेविड अल्ब्राइट ने बताया कि इस्फहान में रखा यूरेनियम स्टॉक बैंक में रखा बड़ा पैसा है. रॉयटर्स की 4 मई की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि ईरान को परमाणु बम बनाने में अभी भी 9 महीने से 1 साल का समय लगेगा. नतांज, फोर्दो और इस्फहान पर हमलों के बावजूद यह समय-सीमा पिछले साल की गर्मियों जितनी ही बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी अभी भी करीब 440 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम का पता नहीं लगा पाई है. आधे से ज्यादा इस्फहान की भूमिगत सुरंगों में होने की आशंका है.व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि अमेरिका के दो ऑपरेशनों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बहुत नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान अब गहरी भूमिगत जगहों पर सामग्री छिपा सकता है जहां अमेरिकी हथियार नहीं पहुंच सकते. ये रिपोर्टें बताती हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से खत्म होने के बजाय अभी भी सक्रिय है, सिर्फ इन्हें नुकसान पहुंचा है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें





