कभी कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग से चलता था पूरा देश, आज भी है आइकॉनिक, क्‍यों आज भी यह लाल बिल्डिंग खास


Writers’ Building history : कोलकाता के बीबीडी बाग इलाके में खड़ी एक शानदार लाल इमारत, जिसे हम ‘राइटर बिल्डिंग’ के नाम से जानते हैं, न सिर्फ एक बिल्डिंग है, बल्कि यह भारत के इतिहास का एक पूरा चैप्टर है. ब्रिटिश काल की इस भव्य इमारत से कभी पूरे भारत की सत्ता की बागडोर संभाली जाती थी. आज भी, जब आप इसके सामने खड़े होते हैं, तो इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं.आइए, आज हम राइटर बिल्डिंग के गौरवशाली अतीत, उसके नाम की दिलचस्प कहानी, और आज के समय में उसके महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं.

अद्वितीय वास्तुकला (Architectural Marvel)
1777 में जब यह बनकर तैयार हुई, तो यह एक साधारण, लंबी, रेलगाड़ी के डिब्बे जैसी दिखने वाली तीन मंजिला इमारत थी. इसका उद्देश्य केवल ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर क्लर्कों (जिन्हें ‘राइटर्स’ कहा जाता था) को रहने की जगह देना था. इस इमारत की सबसे बड़ी पहचान इसका गहरा लाल रंग है. यह टेराकोटा ईंटों से बनी है, जो इसे कोलकाता की अन्य औपनिवेशिक इमारतों से अलग और विशिष्ट बनाती है.

19वीं शताब्दी के अंत में (लगभग 1879-1882 के बीच), तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर एशले ईडन के कार्यकाल में इसका बड़े पैमाने पर विस्तार और सौंदर्यकरण किया गया. इसमें फ्रांसीसी पुनर्जागरण (French Renaissance) शैली के तत्व जोड़े गए, जैसे प्रभावशाली अग्रभाग (facade), ऊँची छतें, कोरिंथियन स्तंभ (Corinthian columns), और लोहे की रेलिंग वाली बालकनियाँ.

इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर और छत पर कई ग्रीक और रोमन देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जो न्याय, वाणिज्य और कृषि जैसे विषयों का प्रतिनिधित्व करती हैं.

आज भी है ऐतिहासिक महत्व (Historical Significance)
यह भारत की पहली इमारतों में से एक थी जिसे विशेष रूप से नौकरशाही और प्रशासन के लिए डिज़ाइन किया गया था. लंबे समय तक, यह फोर्ट विलियम के साथ-साथ ब्रिटिश भारत की प्रशासनिक राजधानी का केंद्र रही. यहीं से पूरे देश के लिए नीतियां और कानून बनाए जाते थे. यह बी.बी.डी. बाग (पुराना नाम डालहौजी स्क्वायर) के उत्तरी छोर पर स्थित है. यह क्षेत्र ब्रिटिश काल में कोलकाता का प्रशासनिक और व्यावसायिक दिल था, और राइटर्स बिल्डिंग इसकी सबसे प्रमुख संरचना थी.

यह इमारत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं की गवाह रही है. इनमें से सबसे प्रसिद्ध घटना 8 दिसंबर 1930 की है, जब तीन युवा क्रांतिकारियों- बिनॉय बसु, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता- ने राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश किया और कुख्यात इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एन.जी. सिम्पसन की हत्या कर दी. इस साहसी कार्य ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी. आज, इनके सम्मान में डालहौजी स्क्वायर का नाम बदलकर बी.बी.डी. बाग (Binoy-Badal-Dinesh Bagh) कर दिया गया है.

राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व (Political & Administrative Hub)
आजादी के बाद, यह पश्चिम बंगाल सरकार का सचिवालय बन गई. 1947 से लेकर 2013 तक, यह राज्य की सत्ता का मुख्य केंद्र रही. मुख्यमंत्री का कार्यालय और सभी प्रमुख विभागों के मंत्री और सचिव यहीं बैठते थे. बंगाल की राजनीति में “राइटर्स बिल्डिंग” शब्द “सत्ता” का पर्याय बन गया था. इसे बंगाल की “लाल कोठी” भी कहा जाता था.

विरासत और संरक्षण (Heritage and Preservation)
2008 में, इसे एक ‘हेरिटेज साइट’ (विरासत स्थल) घोषित किया गया. यह न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे भारत की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है. यह एक विशाल परिसर है जो कई एकड़ में फैला हुआ है. इसमें कई ब्लॉक, गलियारे, कोर्टयार्ड और सैकड़ों कमरे हैं.

2013 में, राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक इमारत के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की. इसके तहत, सचिवालय के कार्यालयों को अस्थायी रूप से हावड़ा में ‘नबन्ना’ (Nabanna) इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया. इस परियोजना का उद्देश्य इमारत के मूल स्वरूप को बहाल करना, इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और इसे और अधिक सुरक्षित बनाना है.

सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity)
हावड़ा ब्रिज और विक्टोरिया मेमोरियल की तरह, राइटर्स बिल्डिंग भी कोलकाता की एक आइकॉनिक पहचान है. यह शहर के औपनिवेशिक अतीत और गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती है. हालांकि वर्तमान में नवीनीकरण के कारण जनता के लिए प्रवेश सीमित हो सकता है, लेकिन बाहर से इसकी भव्यता को देखना पर्यटकों के लिए हमेशा एक आकर्षण रहा है.

राइटर बिल्डिंग एक ऐसी इमारत है, जो न सिर्फ हमारे इतिहास की गवाह है, बल्कि यह हमारे भविष्य की प्रेरणा भी है. यह इमारत हमें हमारे गौरवशाली अतीत, हमारे संघर्षों, और हमारे देश की विकास यात्रा के बारे में याद दिलाती है.



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