पत्नी को खोकर भी ‘देवदूत’ बना आर्मी ऑफिसर, वाइफ का दिल दान कर बचा ली 14 वर्षीय अनजान बच्चे की जान


Last Updated:

अंगदान किसी मरीज के जीवन को बचाने का अंतिम विकल्प होता है. एक मरीज जब ब्रेन डेड घोषित कर दिया जाता है, तो कुछ परिवार आगे आकर उसके अंगों को दान करने का फैसला करते हैं, ताकि किसी दूसरे मरीज की सांसें ना थमें. उसे दोबारा नई जिंदग मिल सके. ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर, पंचकुला में एक आर्मी ऑफिसर ने अपनी 41 वर्षीय ब्रेन डेड घोषित पत्नी के अंगों को डोनेट करके. आज उनका दिल एक 14 वर्षीय हार्ट पेशेंट लड़के के शरीर में धड़क रहा है. इस फैसले से बच्चे को नई जीवन मिली है.

Zoom

हार्ट ट्रांसप्लांट से 14 वर्षीय बच्चे को मिली नई जिंदगी.

अंगदान करना सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे सुंदर अभिव्यक्तियों में से एक है. जब कोई व्यक्ति या किसी ब्रेन डेड घोषित पेशेंट की फैमिली अंग दान करने का फैसला लेती है तो ये निर्णय किसी अनजान की जिंदगी में नई सुबह बनकर लौटता है. जब मरीज की सांसें थमने लगती हैं, तो उसे फिर से जीने का अवसर मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं. और, जो ये नेक काम करता है, वह उस परिवार के लिए भगवान सा लगने लगता है. किसी जरूरतमंद को अंग दान करने का यह निस्वार्थ कदम समाज में करुणा, दया भाव दिखाने और उम्मीद की नई किरण जगाता है. नई दिल्ली में एक ऐसी ही प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसमें भारतीय सेना के एक अधिकारी ने अपनी ब्रेन डेड घोषित पत्नी का दिल एक 14 वर्षीय बीमार लड़के को दान करने का फैसला लिया. यह लड़का पिछले एक वर्ष से एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर से जूझ रहा था.

इस लड़के को सफल हृदय प्रत्यारोपण (Heart transplant) के जरिए नई जिंदगी प्राप्त हुई. यह जीवनरक्षक ऑपरेशन कई संस्थाओं और व्यक्तियों के सामूहिक प्रयास से संभव हो पाया. दरअसल, 2 मई 2026 को पंचकुला स्थित कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर में इस 41 वर्षीय महिला को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था. इस कठिन समय में महिला के पति और दो बेटियों ने मिलकर ऑर्गन डोनेट करने का एक प्रेरणादायक निर्णय लिया. इससे कई लोगों को जीवनदान मिलने का मौका मिला.

ब्रेन डेड घोषित करने के बाद, महिला के हृदय को नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल को आवंटित किया गया. हॉस्पिटल की एक्सपर्ट टीम तुरंत कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ पहुंची और कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर से हार्ट को प्राप्त किया. फिर चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए हृदय को निर्धारित समय सीमा (कोल्ड इस्केमिक टाइम) के भीतर दिल्ली लेकर आ गई.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

ग्रीन कॉरिडोर से मिला समय पर उपचार
दिल्ली पहुंचने के बाद, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट से हॉस्पिटल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया. इस व्यवस्था के कारण हृदय को केवल 20 मिनट में हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया, जिससे समय पर सफलतापूर्वक 14 वर्षीय हार्ट पेशेंट में दिल को ट्रांसप्लांट कर दिया गया. फिलहाल मरीज की कंडीशन स्थिर है और आईसीयू में डॉक्टर्स की निगरानी में है.

जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई एजेंसियों का मिला योगदान
इस पूरे मिशन में नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन, हरियाणा और पंजाब पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और निजी जेट सेवा ‘एसीएस एनी टाइम एनी व्हेयर’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा. सभी के सपोर्ट और कोऑर्डिनेशन की वजह से यह जटिल प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकी.

डॉक्टर ने क्या कहा?
डॉक्टरों के अनुसार, लड़के की हालत लंबे समय से गंभीर थी और हृदय प्रत्यारोपण ही उसके जीवन को बचाने का एकमात्र उपाय था. सौभाग्य से समय पर उपयुक्त डोनर मिल गया, जिससे पूरी प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई.

अंगदान का प्रेरणादायक संदेश
यह घटना अंगदान के महत्व को उजागर करती है. एक परिवार के साहसिक फैसले ने न सिर्फ एक कम उम्र के लड़के को नई जिंदगी दी, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है.

About the Author

authorimg

Anshumala

अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img