अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच शांति वार्ता को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान साफ कहा कि अमेरिका के सामने अब दो ही विकल्प हैं… या तो ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया जाए, या फिर बातचीत के जरिये समझौते का रास्ता अपनाया जाए. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान की ओर से आए ताजा प्रस्ताव से वे संतुष्ट नहीं हैं. कई हफ्तों से जारी संघर्षविराम के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग ठप पड़ी है.
ट्रंप ने बताया कि हाल ही में उन्हें रक्षा अधिकारियों ने विस्तृत ब्रीफिंग दी, जिसमें संभावित रणनीतियों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा, ‘हम क्या करना चाहते हैं—क्या हम जाकर उन पर जोरदार हमला करें और हमेशा के लिए खत्म कर दें, या फिर कोई समझौता करें? यही दो विकल्प हैं.’ हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पहली पसंद कूटनीतिक समाधान है. उन्होंने कहा, ‘मैं व्यक्तिगत तौर पर बड़े सैन्य अभियान से बचना चाहूंगा, लेकिन यह विकल्प अभी भी टेबल पर है.’
दरअसल ईरान ने मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिये अपना नया प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया है. ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह प्रस्ताव गुरुवार शाम इस्लामाबाद को सौंपा गया. हालांकि इस प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है.
याद दिला दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद शुरू हुई जंग 8 अप्रैल से युद्धविराम की स्थिति में है, लेकिन अब तक सिर्फ एक दौर की सीधी बातचीत हुई, जो कि नाकाम रही.
होर्मुज़ बना सबसे बड़ा प्रेशर प्वाइंट
इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की पकड़ बनी हुई है, जिससे कच्चे तेल पर सप्लाई प्रभाई हुई है और दुनियाभर में तेल, गैस और उर्वरक की किल्लत हो रही है. जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि यह टकराव लंबा खिंच सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. हालांकि ईरान के नए प्रस्ताव की खबर के बाद तेल कीमतों में कुछ गिरावट भी आई.
परमाणु कार्यक्रम की शर्त पर अटकी वार्ता
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों को पूरी तरह रोक दें. खासतौर पर, जिन ठिकानों पर पहले हमले हुए थे, वहां किसी भी तरह की गतिविधि दोबारा शुरू न हो और समृद्ध यूरेनियम को कहीं और न ले जाया जाए. हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार किया है.
‘बातचीत के लिए तैयार, लेकिन दबाव मंजूर नहीं’
ईरान के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी गुलामहुसैन मोहसिनी एजई ने कहा कि देश बातचीत से पीछे नहीं हटता, लेकिन किसी तरह का दबाव या शर्तें स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने साफ किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा.
घरेलू दबाव में ट्रंप, ईरान में बिगड़ती अर्थव्यवस्था
अमेरिका में इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है. महंगाई बढ़ने और युद्ध के स्पष्ट नतीजे न निकलने के कारण ट्रंप प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, ईरान में भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं. महंगाई 50% के पार पहुंच गई है और आम लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है.
अमेरिका ने ईरान की तीन विदेशी मुद्रा कंपनियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी भी तरह का ‘टोल’ देने के खिलाफ चेतावनी दी है.
‘अनिश्चितता में फंसी दुनिया’
जमीनी स्तर पर हालात को लेकर आम लोगों में भी निराशा है. तेहरान के एक नागरिक ने कहा कि मौजूदा स्थिति ‘अधर में लटकी हुई’ है और इस प्रस्ताव से ज्यादा उम्मीद नहीं है. उनका मानना है कि तनाव दोबारा बढ़ सकता है.
फिलहाल, संघर्षविराम कायम है, लेकिन बातचीत की दिशा और वैश्विक हालात को देखते हुए स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है.





