Dark Eagle Missile: US Most Powerful Missile| 3000km रेंज आवाज से 5 गुना तेज रफ्तार पाताल खोदकर भेदती है दुश्मन के किले प्रलय का दूसरा नाम डार्क ईगल


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Dark Eagle Missile: अमेरिका का अत्याधुनिक हाइपरसोनिक हथियार डार्क ईगल (Long-Range Hypersonic Weapon–LRHW) इन दिनों फिर चर्चा में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक US सेंट्रल कमांड ने इसे मध्य पूर्व में तैनात करने की मांग की है, खासकर ईरान के खिलाफ संभावित इस्तेमाल के लिए. अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह अमेरिका का पहला ऐसा हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम होगा जिसे वास्तविक ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि अभी यह पूरी तरह से आधिकारिक तौर पर ऑपरेशनल घोषित नहीं हुआ है.

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अमेरिका ने उतारी सबसे घातक मिसाइल.

अमेरिका अब डार्क ईगल नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात करने जा रहा है. ये एक जमीन से दागी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली है, जिसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने के लिए बनाया गया है. US कॉन्ग्रेशनल रिसर्च सर्विस के अनुसार, इसका मकसद लंबी दूरी से तेजी और सटीकता के साथ उन ठिकानों पर हमला करना है, जो समय के लिहाज से बेहद संवेदनशील और मजबूत सुरक्षा वाले हों. इसमें मिसाइल, लॉन्चर और कंट्रोल सिस्टम शामिल होते हैं. (Wiki Commons)
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी है. इसकी रेंज करीब 1,725 मील (लगभग 2,776 किलोमीटर) बताई जाती है. इसका मतलब है कि यह दुश्मन के उन ठिकानों तक भी पहुंच सकती है, जो बहुत अंदर और सुरक्षित जगहों पर छिपे हों.
यही वजह है कि इसे खासतौर पर ऐसे टारगेट्स के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें पारंपरिक हथियारों से निशाना बनाना मुश्किल होता है. हालांकि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट कहती है कि ईरानी सेनाओं ने बैलिस्टिक मिसाइलों का अपना भंडार अमेरिकी की स्ट्राइक क्षमता से कहीं दूर यानि 300 मील से भी ज्यादा अंदर छिपा रखा है. (Lockheed Martin)
डार्क ईगल का इस्तेमाल अगर अमेरिका करता है तो इसकी गति मैक 5 से ज्यादा होती है, जिससे यह हाइपरसोनिक कैटेगरी में आता है. यह पहले रॉकेट बूस्टर से ऊपर जाता है और फिर उसका ग्लाइड बॉडी अलग होकर ऊंचाई पर तेजी से दिशा बदलते हुए उड़ता है. यही तकनीक इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करती है. इसकी तेज रफ्तार और चाल बदलने की क्षमता के कारण इसे रोकना बेहद मुश्किल माना जाता है.
इस सिस्टम को Lockheed Martin और Northrop Grumman मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसमें दो-स्टेज बूस्टर का इस्तेमाल होता है, जो आर्मी और नेवी दोनों के हाइपरसोनिक प्रोग्राम में काम आता है. एक बैटरी में कई लॉन्चर, एक कमांड सेंटर और लगभग आठ मिसाइलें शामिल हो सकती हैं.(AI)
डार्क ईगल की लागत भी काफी ज्यादा है. एक मिसाइल की कीमत करीब 15 मिलियन डॉलर बताई जाती है, जबकि पूरी बैटरी की लागत लगभग 2.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. इसके अलावा, इस प्रोग्राम को कई बार देरी और परीक्षण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है. इसी वजह से यह अभी पूरी तरह से तैनाती के लिए तैयार नहीं माना जा रहा है और लगातार परीक्षण चल रहे हैं. (AI)
डार्क ईगल को रूस और चीन के हाइपरसोनिक हथियारों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. रूस का Kh-47M2 किंजल और चीन का DF-17 पहले ही इस मामले में आगे माने जाते हैं. डार्क ईगल आधुनिक युद्ध की बदलती दिशा को दिखाता है, जहां तेजी, सटीकता और दुश्मन की रक्षा प्रणाली को भेदने की क्षमता सबसे ज्यादा अहम होती जा रही है. (AI)

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें



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