Last Updated:
Cow Pica Disease: अक्सर पशुपालक यह समझ नहीं पाते कि गायों का जूता, चप्पल या प्लास्टिक जैसी चीजें खाना कोई सामान्य आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसे पाइका रोग कहा जाता है, जो कुपोषण और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है. समय पर पहचान न होने पर यह समस्या पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसके लक्षणों को समझना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी है.
अक्सर पशुपालक इस बात से परेशान रहते हैं कि उनकी गायें जूता, चप्पल, प्लास्टिक, कागज या चमड़ा जैसी चीजें खाने लगती हैं. पहली नजर में यह एक साधारण आदत लग सकती है, लेकिन एक्सपर्ट इसे गंभीर बीमारी मानते हैं.

ऐसे में बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक और एक्सपर्ट डॉ. अनिल कुमार ने पाइका रोग के गंभीरता को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

डॉ. अनिल कुमार के अनुसार पाइका पशुओं में होने वाली एक गंभीर बीमारी है. जो मुख्य रूप से कुपोषण और फास्फोरस की कमी से होती है, जिस कारण पशुओं का खान-पान और व्यवहार बदलने लगता है और वे असामान्य चीजों को चबाने या खाने लगते हैं और कई बार गौशाला में बंधे होने के बावजूद गाय रस्सी, लकड़ी के खूटे या आसपास पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं को चबाने लगते हैं, जिससे उनका पाचन बुरी तरह से प्रभावित होता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

वहीं, पाइका बीमारी के बढ़ने पर इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों पर दिखाई देता है, जिससे पशु के शरीर की चमक कम होने लगती है, बाल झड़ने लगते हैं और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. इसकी वजह से गायें कमजोर दिखने लगती हैं.

वहीं, कई बार गाय गलती से प्लास्टिक या लकड़ी खाने से पाचन संबंधित समस्या उत्पन्न होता है, जिससे पशुओं का पेट बुरी तरह से फूल जाता है और कई बार गंभीर स्थिति में सर्जरी तक की जरूरत पड़ जाती है.

वही, लंबे समय तक असंतुलित आहार देने से यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. ऐसे में लक्षण दिखने पर पशुपालकों को तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

वहीं, डॉ, अनिल कि मानें तो पाइका रोग से बचाव के लिए संतुलित आहार सबसे अहम उपाय है. इसलिए पशुओं को नियमित रूप से हरा चारा, सूखा चारा और दाना मिश्रण देना चाहिए. साथ ही पशु चिकित्सक की सलाह से विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट भी देना चाहिए. इसके अलावा गाय की डी-वॉर्मिंग कराना बेहद जरूरी है.





