होर्मुज पर डील का दांव, ईरान का नया प्रस्ताव, परमाणु मुद्दे पर टालमटोल से बढ़ी अमेरिका की चिंता


ईरान ने अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का प्रस्ताव दिया है। परमाणु बातचीत बाद में करने की शर्त रखी गई है। नाकाबंदी हटाने की मांग से वॉशिंगटन की चिंता बढ़ गई है।

फोटोः सोशल मीडिया

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग को दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। इसी बीच ईरान ने एक नया प्रस्ताव देकर कूटनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश की है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की पेशकश की है, लेकिन इसके साथ परमाणु हथियारों पर बातचीत को बाद के लिए टालने की शर्त रखी है।

होर्मुज खोलने के बदले राहत की मांग

ईरान ने यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। इसे एक ‘सामरिक बदलाव’ के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान चाहता है कि पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोला जाए और उस पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म की जाए। इसके बाद ही वह परमाणु मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार होगा। साथ ही ईरान ने लंबे समय तक सीजफायर बढ़ाने या इसे स्थायी बनाने की बात भी कही है।

ईरानी नेतृत्व में मतभेद, परमाणु मुद्दा टला

इस प्रस्ताव के पीछे ईरान के भीतर चल रहे मतभेद भी अहम कारण बताए जा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, परमाणु रियायतों को लेकर ईरानी नेतृत्व में एक राय नहीं है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि यूरेनियम संवर्धन की सीमा और संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करने जैसे मुद्दों पर नेताओं के बीच मतभेद हैं। ऐसे में ईरान फिलहाल परमाणु फैसलों को टालकर आर्थिक राहत पर फोकस करना चाहता है।

अमेरिका की बढ़ी चिंता, दबाव कम होने का डर

ईरान के इस प्रस्ताव ने वॉशिंगटन की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर पहले नाकाबंदी हटा ली गई तो ईरान पर परमाणु शर्तों को मानने का दबाव कम हो जाएगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन को निलंबित करे। उसे आशंका है कि ईरान इस रणनीति के जरिए परमाणु मुद्दों से बच निकल सकता है।

पाकिस्तान समेत कई देश मध्यस्थ

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के साथ-साथ मिस्र, तुर्की और कतर भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तानी चैनल के जरिए ही यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस तक पहुंचाया गया है। अब नजरें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं, जो जल्द ही अपनी सुरक्षा टीम के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर सकते हैं। इससे पहले ट्रंप संकेत दे चुके हैं कि जब तक ठोस समझौता नहीं होता, होर्मुज पर नाकाबंदी जारी रह सकती है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि निर्यात रुकने से ईरान का तेल तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।




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