जन्म लेने के बाद जिस बच्चे ने ठीक से आंखें भी नहीं खोली थीं, उसकी मां ने उसे जी भर के देखा भी नहीं था और उसे पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया की टीम के डॉक्टर घेरे खड़े थे. बिना एक भी मिनट गंवाए उस नन्ही जान की सर्जरी होने वाली थी. यह पल उस मां के लिए किसी साल जितना लंबा और भारी था, लेकिन 40 मिनट के इस बच्चे की जैसे ही सर्जरी हुई और उसे मां को सौंपा गया तो जैसे उसकी तपस्या पूरी हो गई और वह हाथ जोड़कर बार-बार यही कह रही थी,’मेरे बच्चे का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है. मैं और मेरा परिवार इन डॉक्टरों के हमेशा आभारी रहेंगे.’ यह दृश्य फॉर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला का है, जहां इस सर्जरी के बाद जश्न जैसा माहौल हो गया.
दरअसल अस्पताल में पहली बार सबसे छोटे एक 40 मिनट के बच्चे के हार्ट की सर्जरी की गई थी. ये सर्जरी इसलिए भी कठिन थी क्योंकि बच्चा हार्ट की ऐसी दो समस्याओं से जूझ रहा था कि सबसे पहले उसका जन्म 31 सप्ताह में ही सीजेरियन करवाना पड़ा, उसके तुरंत बाद गोल्डन आवर में मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया से उसके हार्ट की सर्जरी की गई.
बता दें कि इस नन्हे बच्चे का हार्ट लिक्विड पदार्थ से घिरा था और मुश्किल से काम कर पा रहा था. इसकी जानकारी जन्म के पहले ही मिल चुकी थी क्योंकि उन्हें शहर के ही एक अन्य अस्पताल ने भ्रूण की अल्ट्रासाउंड जांच के बाद बताया था कि इस अजन्मे शिशु का एक हार्ट वाल्व खतरनाक रूप से संकरा है. इसके अलावा जांच में उसके हृदय की मांसपेशियां भी काफी कमजोर पायी गई थीं. भ्रूण के हृदय के आसपास तरल पदार्थ का जमाव भी था और ये सभी स्थतियां काफी गंभीर चुनौतियां थीं. ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को फॉर्टिस ओखला लाया गया जहां पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डॉ. नीरज अवस्थी और अस्पताल की मल्टीडिसीप्लीनरी टीम ने इस चुनौती को लिया और इलाज का प्लान तैयार किया.
इसके बाद प्रेग्नेंसी के 31 वें सप्ताह में एक अन्य अस्पताल में सी-सेक्शन से इस शिशु का जन्म हुआ और फिर उसे फॉर्टिस लाया गया. यहां ऑब्सटेट्रिशियन, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट, नियोनेटोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, नर्सों, तकनीशियनों की टीम के साथ-साथ एंबुलेंस स्टाफ तैयार था. हर एक पूरी सटीकता के साथ अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार था.
इस प्रक्रिया से किया गया इलाज
इस बच्चे का उन्नत एडवांस अल्ट्रासाउंड-गाइडेड वैस्कुलर एक्सेस की मदद से रक्तवाहिनियों की स्थिति का पता लगाया गया और फिर बच्चे को बैलून एओर्टिक वोल्वोटॉमी की प्रक्रिया से इलाज दिया गया. यह सर्जरी सफल हुई और इसके बाद इकोकार्डियोग्राफी से इस बात की पुष्टि हुई कि शिशु का एओर्टिक वाल्व अब अच्छी तरह से खुल चुका है और हार्ट फंक्शन भी बहाल हो गया. इसके बाद समय से पहले जन्मे इस नवजात को नियोनेटल नर्सरी में शिफ्ट किया गया, जहां उसका वजन बढ़ने और रिकवरी पर पूरा ध्यान दिया गया.
इस बारे में डॉ नीरज अवस्थी ने बताया, ‘यह हमारे सामने आने वाला अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण फीटल कार्डियक मामला था, जिसमें हार्ट वाल्व काफी संकरा था, हृदय की मांसपेशियां काफी क्षतिग्रस्त थीं, और फ्लूड ओवरलोड भी था. हालांकि बेहतर प्लानिंग, तुरंत कार्रवाई और परफेक्ट मल्टी-डिसीप्लीनरी तालमेल से गोल्डन आवर में ही शिशु का सफल इलाज हुआ और नवजात के हार्ट फंक्शन को बहाल करने में सफलता मिली.’
क्या बोली बच्चे की मां
इस सर्जरी के बाद नवजात की मां ने कहा, ‘हमारे परिवार के लिए वे हफ्ते बेहद मुश्किलों से भरे थे. अपने अजन्मे शिशु की कंडीशन के बारे में सुनकर ही हमारे होश उड़ गए थे और हर अगला दिन हमने डर और अनिश्चितता के साथ बिताया लेकिन फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला के डॉक्टरों ने हमें उस घड़ी में उम्मीद बंधायी जब हमारे पास लेशमात्र भी आशा की कोई किरण नहीं थी. अपने शिशु को जन्म के कुछ ही मिनटों बाद ऐसे नाजुक प्रक्रिया से गुजरते देखना और उसका बचना हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है. हम फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला की पूरी मेडिकल टीम के सदा आभारी रहेंगे, जिन्होंने हमारे बच्चे को जिंदगी का अमूल्य उपहार सौंपा है.’





