सांपों के पेट में जीपीएस! ओपोसम को चारा बनाकर अजगरों का शिकार करने जा रहे अमेरिकी वैज्ञानिक


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सांपों के पेट में GPS! ओपोसम को चारा बनाकर अजगरों का शिकार करने जा रहा अमेरिका

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फ्लोरिडा के जंगलों में तबाही मचा रहे बर्मीज पायथन को खत्म करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अनोखा और खतरनाक प्लान तैयार किया है. अब ओपोसम नाम के छोटे जानवरों को ‘सुसाइड मिशन’ पर भेजा जाएगा. इन जानवरों के गले में जीपीएस ट्रैकर लगाकर उन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा. जैसे ही कोई विशालकाय अजगर इन्हें निगलेगा, सिग्नल के जरिए वैज्ञानिक सीधे सांप की लोकेशन तक पहुंच जाएंगे.

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अजगरों का काल बनेंगे छोटे ओपोसम, गले में बंधा ट्रैकर बताएगा खूंखार शिकारी का ठिकाना! (Photo : Generative AI)

अमेरिका के फ्लोरिडा में दशकों से बर्मीज पायथन यानी बर्मी अजगरों ने आतंक मचा रखा है. ये सांप इतने खतरनाक और विशाल हैं कि इन्होंने वहां के लोकल जानवरों की आबादी को लगभग खत्म कर दिया है. अब इनसे निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रास्ता चुना है, जो सुनने में काफी अजीब और थोड़ा डरावना भी लग सकता है. रिसर्चर्स अब ओपोसम नाम के मार्सुपियल जानवरों को चारे के रूप में इस्तेमाल करने वाले हैं. इन जानवरों के शरीर पर ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे ताकि जब अजगर इन्हें खाए, तो वैज्ञानिक सीधे उस शिकारी तक पहुंच सकें. यह आइडिया तब आया जब वैज्ञानिकों ने देखा कि उनके रिसर्च में शामिल कई ओपोसम को अजगरों ने अपना निवाला बना लिया था. अब इसी प्राकृतिक आपदा को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाएगा.

क्यों नाकाम हो रहे हैं पायथन को पकड़ने के सारे पुराने तरीके?

फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स वाले इलाकों में बर्मीज पायथन को ढूंढना किसी सुई को घास के ढेर में ढूंढने जैसा है.

  • ये सांप 20 फीट तक लंबे हो सकते हैं और दलदली इलाकों में छिपने में माहिर होते हैं.
  • सालों से एक्सपर्ट्स ने इन्हें पकड़ने के लिए रोबोटिक खरगोश से लेकर कई तरह के जाल बिछाए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली.
  • ये सांप वहां के स्थानीय जानवरों को खाकर अपनी आबादी तेजी से बढ़ा रहे हैं.
  • इंसान इन दलदलों में आसानी से नहीं जा सकते, जबकि ओपोसम जैसे जानवर वहां बेखौफ घूमते हैं.
  • यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने अब ओपोसम को अपना जासूस बनाने का फैसला किया है.
अजगरों को खत्म करने के लिए ओपोसम की कुर्बानी (Photo : Generative AI)

कैसे काम करेगा ओपोसम और ट्रैकिंग डिवाइस का यह खूनी खेल?

  1. नॉर्थ कैरोलिना म्यूजियम ऑफ नेचुरल साइंसेज के बायोलॉजिस्ट ए.जे. संजर और माइकल कोव ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है. उन्होंने बताया कि पहले एक ट्रैकर की कीमत 1,500 डॉलर होती थी, जो बहुत महंगी पड़ती थी.
  2. अब उन्होंने सिर्फ 190 डॉलर वाले सस्ते कॉलर तैयार किए हैं. इन ट्रैकर्स को ओपोसम के गले में बांधकर उन्हें जंगलों में छोड़ दिया जाएगा. जैसे ही कोई भूखा अजगर इस जानवर को निगलेगा, वह अनजाने में एक एक्टिव जीपीएस ट्रैकर भी निगल लेगा.
  3. वैज्ञानिक इस सिग्नल को ट्रैक करेंगे और अजगर के पेट के अंदर से आ रही आवाज उन्हें सीधे सांप तक पहुंचा देगी. इसके बाद उस अजगर को पकड़कर मार दिया जाएगा.

क्या जानवरों को जानबूझकर खतरे में डालना सही कदम है?

इस मिशन को लेकर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या यह जानवरों के साथ क्रूरता नहीं है. हालांकि, क्रोकोडाइल लेक नेशनल वाइल्डलाइफ रिफ्यूज के मैनेजर जेरेमी डिक्सन का कहना है कि वे जानवरों को खतरे में नहीं डाल रहे हैं. खतरा वहां पहले से मौजूद है और अजगर वैसे भी इन जानवरों को खा ही रहे हैं.

वैज्ञानिक बस उस प्रक्रिया को डॉक्यूमेंट कर रहे हैं ताकि ईकोसिस्टम में बैलेंस वापस लाया जा सके. इस गर्मी के अंत तक लगभग 40 ओपोसम को इस मिशन पर तैनात करने की योजना है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो फ्लोरिडा के जंगलों से इन घुसपैठिए सांपों का सफाया करना काफी आसान हो जाएगा.

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दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें





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