America War Cost: 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन पर हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने जिस वॉर ऑन टेरर की शुरुआत की उसने न सिर्फ उसकी विदेश नीति को पूरी तरह बदल दिया, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों को दशकों तक संघर्ष की आग में झोंक दिया. तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (George W. Bush) ने इसे वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग बताया. इसके बाद से अमेरिका ने तीन पूर्ण पैमाने के युद्ध लड़े और कम से कम 10 देशों में हवाई हमले, ड्रोन स्ट्राइक और सैन्य अभियान चलाए. ‘अल-जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे अभियान में अभी तक 9 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 ट्रिलियन डॉलर का कुल खर्च आने का अनुमान है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 भारत की कुल GDP 3.91 ट्रिलियन थी.
अफगानिस्तान युद्ध: 2001–2021
9/11 हमलों के सीधे जवाब में 7 अक्टूबर 2001 को अमेरिका ने अफगानिस्तान में ‘ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम’ शुरू किया. उद्देश्य था अल-कायदा नेटवर्क को ध्वस्त करना और तालिबान शासन को सत्ता से हटाना. शुरुआती कुछ हफ्तों में तालिबान सरकार गिर गई, लेकिन इसके बाद विद्रोही गुटों ने लंबा प्रतिरोध शुरू कर दिया. यह युद्ध अमेरिका के इतिहास का सबसे लंबा संघर्ष साबित हुआ, जो चार राष्ट्रपतियों के कार्यकाल तक चला और 2021 में अमेरिकी वापसी के साथ समाप्त हुआ. वापसी के तुरंत बाद तालिबान ने फिर से सत्ता पर कब्जा कर लिया. ब्राउन यूनिवर्सिटी के ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ प्रोजेक्ट के अनुसार इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से करीब 2.41 लाख लोगों की मौत हुई. अमेरिका और नाटो के कम से कम 3,586 सैनिक मारे गए. इस युद्ध पर अमेरिका ने लगभग 2.26 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए.
| अमेरिका का युद्ध पर खर्च (2001 से अभी तक) |
| मद | खर्च |
| रक्षा विभाग | 2.1 ट्रिलियन डॉलर |
| होमलैंड सिक्योरिटी | 1.1 ट्रिलियन डॉलर |
| रक्षा बजट | 884 अरब डॉलर |
| पूर्व सैनिकों का मेडिकल केयर | 465 अरब डॉलर |
| लोन इंट्रेस्ट | 1 ट्रिलियन डॉलर |
| 30 साल में पूर्व सैनिकों पर अनुमानित खर्च | 2.2 ट्रिलियन डॉलर |
| नोट: भारत का जीडीपी (वर्ल्ड बैंक का 2024 का डेटा): 3.91 ट्रिलियन डॉलर |
इराक युद्ध: 2003-2011
20 मार्च 2003 को राष्ट्रपति बुश ने इराक पर हमला शुरू किया. दावा किया गया कि तत्कालीन राष्ट्रपति Saddam Hussein के पास व्यापक विनाश के हथियार (WMD) हैं, लेकिन बाद में यह दावा गलत साबित हुआ. 1 मई 2003 को बुश ने ‘मिशन अकॉम्पलिश्ड’ की घोषणा की, लेकिन असल संघर्ष इसके बाद और भड़क उठा. सत्ता शून्य और हिंसा ने चरमपंथी संगठनों को जन्म दिया, जिनमें आईएसआईएल (आईएसआईएस) का उदय सबसे अहम रहा. 2008 में अमेरिका ने सैनिकों की वापसी पर सहमति जताई और 2011 में Barack Obama के कार्यकाल में यह प्रक्रिया पूरी हुई.
ड्रोन युद्ध: पाकिस्तान, सोमालिया और यमन
हालांकि इन्हें औपचारिक युद्ध घोषित नहीं किया गया, लेकिन अमेरिका ने 2000 के दशक के मध्य से ड्रोन अभियानों का विस्तार किया. पाकिस्तान के कबायली इलाकों में सीआईए ने अल-कायदा और तालिबान नेताओं को निशाना बनाते हुए हमले किए. ओबामा प्रशासन के शुरुआती वर्षों में इन हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. सोमालिया में अल-शबाब से जुड़े लड़ाकों पर और यमन में अल-कायदा नेताओं के खिलाफ मिसाइल व ड्रोन हमले किए गए. इन अभियानों ने ‘रिमोट वॉरफेयर’ की अवधारणा को नई दिशा दी, लेकिन नागरिक हताहतों को लेकर विवाद भी खड़े हुए.
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, साल 2024 में भारत का कुल जीडीपी 3.91 ट्रिलियन डॉलर था. (वर्ल्ड बैंक की वेबसाइट से साभार)
लीबिया में हस्तक्षेप: 2011
2011 में लीबिया में शासक Muammar Gaddafi के खिलाफ विद्रोह भड़क उठा. अमेरिका ने नाटो के नेतृत्व वाले अभियान में शामिल होकर नो-फ्लाई ज़ोन लागू करने के लिए हवाई और मिसाइल हमले किए. गद्दाफी को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी मौत हो गई, लेकिन देश लंबे समय तक अस्थिरता और गुटीय संघर्ष में फंस गया.
इराक और सीरिया में आईएस के खिलाफ अभियान
2014 से अमेरिका ने सीरिया में आईएसआईएल को हराने के उद्देश्य से हस्तक्षेप शुरू किया. इराक में पहले से चल रहे अभियान को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी वायुसेना ने सीरिया में लगातार हवाई हमले किए और स्थानीय सहयोगी बलों का समर्थन किया. इराक में अमेरिकी सेना ने स्थानीय सैनिकों को सलाह दी और आईएसआईएल के अवशेषों के खिलाफ कार्रवाई की. 2020 में तत्कालीन राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर बगदाद में ईरानी जनरल Qassem Soleimani को निशाना बनाकर किया गया हमला क्षेत्रीय तनाव का बड़ा कारण बना.
भारत के कुल GDP से दोगुना खर्च
ब्राउन यूनिवर्सिटी के वॉटसन इंस्टीट्यूट के विश्लेषण के अनुसार 2001 के बाद अमेरिकी नेतृत्व वाले युद्धों में प्रत्यक्ष रूप से करीब 9.4 लाख लोगों की मौत हुई. इसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक, सीरिया और यमन जैसे संघर्ष क्षेत्र शामिल हैं. अप्रत्यक्ष मौतें (जैसे भूख, बीमारी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी) इन आंकड़ों में शामिल नहीं हैं. आर्थिक रूप से अमेरिका अब तक लगभग 5.8 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है. इसमें रक्षा विभाग पर 2.1 ट्रिलियन डॉलर, होमलैंड सिक्योरिटी पर 1.1 ट्रिलियन डॉलर, रक्षा बजट में 884 अरब डॉलर की बढ़ोतरी, पूर्व सैनिकों की चिकित्सा देखभाल पर 465 अरब डॉलर और कर्ज के ब्याज पर लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर शामिल हैं. अगले 30 वर्षों में पूर्व सैनिकों की देखभाल पर कम से कम 2.2 ट्रिलियन डॉलर और खर्च होने की उम्मीद है. इस तरह 2001 के बाद के युद्धों की कुल अनुमानित लागत 8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. दो दशकों से अधिक समय तक चले इन अभियानों ने वैश्विक राजनीति, क्षेत्रीय संतुलन और अमेरिका की आंतरिक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला है.





