Donald Trump Iran Attack Legal or Illegal: ट्रंप ने पार की लक्ष्मण रेखा? ईरान पर हमला जायज या जुर्म; क्या कहता है अमेरिकी संविधान, 10 प्वाइंट में सब


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Donald Trump Iran Attack Legal or Illegal: ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संवैधानिक सीमा पार कर दी है. अमेरिकी संविधान युद्ध की घोषणा का अधिकार कांग्रेस को देता है, जबकि ट्रंप ने हवाला दिया कि जल्द ही कोई बड़ा खतरा सामने आ सकता है, इसलिए सावधानी जरूरी है. अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध शक्तियां प्रस्ताव के तहत इस कार्रवाई की कानूनी सही होने पर गंभीर बहस छिड़ गई है.

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क्या डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला कर संवैधानिक सीमा पार की? (फोटो AP)

US-Iran War Updates: मिडिल ईस्ट में जंग और भी तेज होती जा रही है. इजरायल-अमेरिका और ईरान आपस में एक-दूसरे को नेस्तनाबूद करने पर तुले हुए हैं. जैसे-जैसे जंग बढ़ता जा रहा है हमले और भी खतरनाक होते जा रहे हैं. हालांकि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा लांघ दी है? ट्रंप का दावा है कि यह हमला अमेरिका पर गंभीर खतरे को खत्म करने के लिए किया गया. लेकिन आलोचकों का कहना है कि बिना कांग्रेस की अनुमति इस तरह की सैन्य कार्रवाई अमेरिकी संविधान की ‘लक्ष्मण रेखा’ पार करने जैसा है. यही वजह है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक ही नहीं, कानूनी संकट भी बन गया है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ईरान पर हमले, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और शीर्ष ईरानी नेतृत्व की मौत और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई के बीच वॉशिंगटन में भी हलचल तेज है. सीनेट में युद्ध शक्तियों से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान की तैयारी बताती है कि मामला केवल विदेश नीति का नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के टकराव का है. क्या राष्ट्रपति को अकेले युद्ध छेड़ने का अधिकार है? क्या ‘बिना किसी हमले के आत्मरक्षा’ का तर्क पर्याप्त है? और क्या अंतरराष्ट्रीय कानून इस कार्रवाई को वैध मानता है?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर सकता है. (फोटो AP)

इन सभी सवालों के जवाब आइए 10 प्वाइंट में समझते हैं:

  1. ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिका और उसके सैन्य ठिकानों पर हमला करने की तैयारी में था. उनके मुताबिक कार्रवाई ‘तत्काल और निर्णायक’ थी ताकि बड़े खतरे को रोका जा सके. हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसे ठोस खुफिया सबूत साझा नहीं किए जो इस दावे की पुष्टि करें. आलोचकों का कहना है कि केवल संभावित खतरे के आधार पर व्यापक सैन्य हमला करना संवैधानिक बहस को जन्म देता है.
  2. अमेरिकी संविधान के तहत सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति होते हैं. लेकिन युद्ध घोषित करने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. यही मूल संवैधानिक ढांचा है. इतिहास में बड़े सैन्य अभियानों जैसे 2001 में अफगानिस्तान और 2003 में इराक के लिए कांग्रेस से अनुमति ली गई थी. ऐसे में सवाल है कि क्या ईरान पर हमला उसी श्रेणी में आता है. इसके लिए संसदीय मंजूरी जरूरी थी?
  3. 1973 का युद्ध शक्तियां प्रस्ताव (War Powers Resolution) राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया था. इसके अनुसार बिना कांग्रेस की मंजूरी के किसी भी सैन्य अभियान को 60 दिनों के भीतर समाप्त करना होगा. साथ ही राष्ट्रपति को नियमित रूप से कांग्रेस को सूचित करना अनिवार्य है. यदि यह कार्रवाई लंबी चलती है, तो कानूनी चुनौती और गंभीर हो सकती है.
  4. अमेरिकी सीनेट में द्विदलीय प्रस्ताव लाया गया है. इसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को रोकना है जब तक कि कांग्रेस औपचारिक अनुमति न दे. भले ही दो-तिहाई बहुमत मिलना मुश्किल हो लेकिन यह कदम सांसदों को रिकॉर्ड पर लाने की रणनीति भी माना जा रहा है. चुनावी साल में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है.
  5. संयुक्त राष्ट्र (UN) के चार्टर के अनुसार सदस्य देश बल प्रयोग या बल की धमकी से परहेज करेंगे. अपवाद केवल दो स्थितियों में है जब सुरक्षा परिषद अनुमति दे या आत्मरक्षा में कार्रवाई हो. एक्सपर्ट का मानना है कि यदि तत्काल और स्पष्ट हमला साबित नहीं होता, तो यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादित मानी जा सकती है.
  6. अंतरराष्ट्रीय कानून में ‘प्रि-एम्प्टिव सेल्फ डिफेंस’ का मतलब है कि अगर किसी देश को पहले से हमले का खतरा लगे, तो वह हमले से पहले ही अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर सकता है. इसके तहत अगर हमला होने वाला हो और उसे टालना संभव न हो, तो पहले हमला करना भी सही माना जा सकता है. लेकिन इसके लिए ठोस और सार्वजनिक सबूत जरूरी माने जाते हैं. ट्रंप प्रशासन ने अभी तक ऐसे सबूत सार्वजनिक नहीं किए हैं. इससे यह तर्क कमजोर पड़ता दिखता है.
  7. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर सकता है. लेकिन इससे पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. इन विरोधाभासी बयानों ने कानूनी और राजनीतिक आलोचना को और हवा दी है.
  8. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर भी कानूनी बहस छिड़ी है. 1981 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे. इसमें अमेरिकी सरकार या उसके प्रतिनिधियों को हत्या में शामिल होने से रोका गया था. यदि यह शांति काल की कार्रवाई मानी जाती है तो इसे अवैध कहा जा सकता है. लेकिन युद्धकाल में स्थिति अलग हो सकती है.
  9. कानूनी व्याख्या इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उस समय अमेरिका को औपचारिक रूप से युद्धरत माना गया या नहीं. यदि सशस्त्र संघर्ष की स्थिति थी और लक्ष्य सैन्य नेतृत्व का हिस्सा था, तो अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत कार्रवाई को अलग नजरिए से देखा जा सकता है.
  10. अंततः यह मामला केवल कानूनी तकनीकी बहस नहीं है. यह अमेरिकी लोकतंत्र में शक्तियों के संतुलन की परीक्षा है. क्या राष्ट्रपति को व्यापक सैन्य कार्रवाई का स्वतंत्र अधिकार है या कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य है? आने वाले हफ्तों में अदालतों, कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह बहस और तेज हो सकती है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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