Agency:एजेंसियां
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Venezuela News: वेनेजुएला की सरकारी खनन कंपनी मिनर्वेन ने अमेरिका के लिए 650 से 1000 किलो सोना बेचने की डील की है. ट्राफिगोरा इस गोल्ड को अमेरिकी रिफाइनरियों तक पहुंचाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक यह समझौता ट्रंप प्रशासन के तहत वेनेजुएला के संसाधनों से जुड़ा तीसरा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट है.
ट्रंप ने वेनेजुएला का गोल्ड लिया.
वॉशिंगटन: पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के युद्ध पर है. लेकिन इसी बीच अमेरिका ने वेनेजुएला में एक नया खेल कर दिया है. वेनेजुएला की सरकारी खनन कंपनी मिनर्वेन (Minerven) ने अमेरिका के लिए बड़ी गोल्ड डील पर हस्ताक्षर किए हैं. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के तहत वेनेजुएला 650 से 1000 किलोग्राम तक गोल्ड डोरे (Gold Dore) बार अमेरिका के बाजार के लिए बेचने जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार यह सोना दुनिया की बड़ी कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी ट्राफिगोरा(Trafigura) को दिया जाएगा. ट्राफिगोरा इस सोने को अमेरिकी रिफाइनरियों तक पहुंचाएगी, जिसके लिए अमेरिकी सरकार के साथ अलग से व्यवस्था की गई है. यह सौदा सिर्फ सोने की खरीद-फरोख्त नहीं बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बदलते जियोपॉलिटिक्स और आर्थिक रिश्तों का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
इस सौदे को अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग का संकेत माना जा रहा है. हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से बदलाव आया है और अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल और खनिज संसाधनों के साथ नए व्यापारिक समझौते शुरू किए हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि इस डील को अंतिम रूप देने में अमेरिकी गृह सचिव डग बर्गम (Doug Burgum) की अहम भूमिका रही. वह हाल ही में वेनेजुएला पहुंचे थे, जहां उन्होंने तेल और खनिज क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की.
करोड़ों डॉलर की होगी डील
अगर मौजूदा बाजार कीमत देखें तो एक किलोग्राम सोने की कीमत करीब 1.66 लाख डॉलर (करीब 1.3 करोड़ रुपये) के आसपास है. इस हिसाब से 1000 किलो सोने की यह डील करोड़ों डॉलर की हो सकती है. यह सौदा ऐसे समय हुआ है जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात के कारण सोने की कीमत लगातार बढ़ रही है. साथ ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से ऊर्जा और कमोडिटी बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है. वहीं चीन लगातार अपने रिजर्व में सोना और चांदी जमा कर रहा है.
अमेरिका में इस डील पर क्या कह रहे सांसद?
बताया जा रहा है कि यह ट्रंप प्रशासन की निगरानी में वेनेजुएला के संसाधनों को लेकर किया गया तीसरा बड़ा एक्सट्रैक्शन कॉन्ट्रैक्ट है. इससे पहले तेल से जुड़े अरबों डॉलर के समझौते भी किए जा चुके हैं, जिनमें अमेरिका की कई कंपनियां शामिल रही हैं. हालांकि इस डील को लेकर अमेरिका में विवाद भी शुरू हो गया है. कुछ अमेरिकी सांसदों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि अमेरिका वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण स्थापित कर रहा है. वहीं इस समझौते के समर्थकों का कहना है कि इससे वेनेजुएला को अंतरराष्ट्रीय बाजार और स्थिर वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच मिलेगी.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





