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पर्यटकों के अनुभव की बात करें तो यहां आने वाले लोग इस स्थान की सुंदरता से अभिभूत नजर आते हैं. ठंडे पानी की फुहारें और शांत वातावरण उन्हें सुकून का एहसास कराते हैं. कई लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ यहां समय बिताकर यादगार पल संजो रहे हैं. हालांकि, कुछ पर्यटकों ने साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की….
कोडरमा: भीषण गर्मी के बीच सतगावां प्रखंड स्थित पेट्रो जलप्रपात इन दिनों सैलानियों के लिए राहत का प्रमुख केंद्र बन गया है. घने जंगलों के बीच स्थित यह प्राकृतिक झरना अपनी खूबसूरती और ठंडे पानी के कारण लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है. जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थल पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्य बिहार से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. इस जलप्रपात की सबसे बड़ी खासियत यहां बने सात प्राकृतिक कुंड हैं. जहां पहाड़ों से गिरता पानी जमा होकर मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. इन कुंडों में स्नान कर लोग गर्मी से राहत महसूस कर रहे हैं. जंगलों की हरियाली, ठंडी हवा और पानी की कल-कल ध्वनि इस स्थान को एक आदर्श पिकनिक स्पॉट बना देती है. यही कारण है कि छुट्टियों और सप्ताहांत में यहां लोगों की भीड़ उमड़ रही है.
ठंडे पानी की फुहारें और शांत वातावरण देता है सुकून
पर्यटकों के अनुभव की बात करें तो यहां आने वाले लोग इस स्थान की सुंदरता से अभिभूत नजर आते हैं. ठंडे पानी की फुहारें और शांत वातावरण उन्हें सुकून का एहसास कराते हैं. कई लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ यहां समय बिताकर यादगार पल संजो रहे हैं. हालांकि, कुछ पर्यटकों ने साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता भी जताई है. प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अनूठा संगम प्रस्तुत करता पेट्रो जलप्रपात आज कोडरमा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना चुका है. जरूरत है तो बस इसे सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने की. ताकि आने वाले समय में भी यह स्थल सैलानियों को इसी तरह आकर्षित करता रहे और प्रकृति की यह अनमोल धरोहर सुरक्षित रह सके.
शराब सेवन पर रोक और गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना की मांग
बढ़ती लोकप्रियता के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि झरने के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है. फिसलन भरे पत्थर और गहरे कुंड अनजान पर्यटकों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. ऐसे में प्रशासन से यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की जा रही है. इसके अलावा कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शराब सेवन और कचरा फैलाने की घटनाएं भी देखी जा रही हैं. जिससे इस प्राकृतिक स्थल की सुंदरता प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि झरना क्षेत्र में शराब सेवन पर सख्ती से रोक लगाई जाए और गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाया जाए. उनका मानना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह प्राकृतिक धरोहर अपनी पहचान खो सकती है.
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