आम खाने का सही तरीका क्या है? सिर्फ 1 गलती की और शरीर में भर सकता है जहर, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए सही नियम


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Aam Khane Ka Sahi Tarika : गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में ‘फलों के राजा’ आम की खुशबू महकने लगी है. रसीले आम का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाना लाजमी है. स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ आम विटामिन्स और मिनरल्स का खजाना भी है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही इस मीठे फल को आपकी सेहत के लिए ‘जहर’ समान बना सकती है? न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक ने हाल ही में आम खाने के उन सही नियमों के बारे में बताया है, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं.

Mango Eating Tips : ज्यादातर लोग बाजार से आम खरीदकर लाते हैं, उन्हें नल के नीचे धोते हैं और तुरंत काटकर खाना शुरू कर देते हैं. पहली नजर में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से यह बहुत बड़ी गलती है. बिना सही प्रक्रिया के आम खाने से न केवल पेट खराब हो सकता है, बल्कि यह स्किन और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालता है. अगर आप आम के शौकीन हैं, तो आपको इसे खाने का सही तरीका और एक्सपर्ट की सलाह जरूर जाननी चाहिए.

भिगोना क्यों है जरूरी? (Why Soaking is Essential) न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक के अनुसार, आम को खाने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले पानी में भिगोकर रखना अनिवार्य है. यह प्रक्रिया केवल ऊपरी धूल-मिट्टी साफ करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है. आम की तासीर प्राकृतिक रूप से गर्म होती है. अगर इसे सीधे खाया जाए, तो यह शरीर के ‘थर्मोजेनेसिस’ (आंतरिक गर्मी) को बढ़ा देता है. यही कारण है कि कई लोगों को आम खाने के बाद चेहरे पर फुंसियां या मुंहासे निकलने की शिकायत होती है.

शरीर की गर्मी पर नियंत्रण (Controlling Body Heat)- पानी में भिगोने से आम की यह अतिरिक्त गर्मी (Heat Content) काफी हद तक कम हो जाती है. जब आम ठंडा हो जाता है, तो यह शरीर में गर्मी पैदा करने के बजाय ठंडक पहुंचाता है. जो लोग आम खाने के बाद पेट में जलन या मुंह में छालों से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह तरीका रामबाण है. यह छोटा सा काम आम को शरीर के लिए सुरक्षित और पचाने में बेहद आसान बना देता है.

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फाइटिक एसिड से सुरक्षा (Neutralizing Phytic Acid)- एक और गंभीर कारण है आम में मौजूद ‘फाइटिक एसिड’ (Phytic Acid). फाइटिक एसिड एक ऐसा तत्व है जिसे ‘एंटी-पोषक तत्व’ माना जाता है. यह शरीर को कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स को सोखने से रोकता है. जब हम आम को कुछ देर पानी में भिगोते हैं, तो यह एसिड पानी में निकल जाता है. ऐसा करने से आम में मौजूद भरपूर पोषण आपके शरीर को पूरी तरह मिल पाता है और आप एनीमिया जैसी समस्याओं से बचे रहते हैं.

रसायनों और टॉक्सिन्स से बचाव (Safety from Chemicals)- आजकल फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और तेजी से पकाने के लिए कीटनाशकों (Pesticides) और केमिकल्स का भारी इस्तेमाल होता है. ये रसायनिक तत्व छिलके की ऊपरी परत पर चिपके रहते हैं. केवल सादे पानी से धोने भर से ये साफ नहीं होते. जब आम को एक घंटे तक पानी के बर्तन में डुबोकर रखा जाता है, तो ये हानिकारक रसायन पानी में घुलकर निकल जाते हैं, जिससे शरीर के अंदर ‘टॉक्सिन्स’ या जहर पहुंचने का खतरा खत्म हो जाता है.

पाचन तंत्र पर असर (Impact on Digestion)- गलत तरीके से आम खाने का सबसे पहला असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है. बिना भिगोए आम खाने से कब्ज, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी संवेदनशील हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप आम को सही विधि से खाते हैं, तो इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन को दुरुस्त रखता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है.

खाने का सही समय (The Ideal Time to Eat)- न्यूट्रिशनिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम को कभी भी मुख्य भोजन (Heavy Meal) के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए. इसे या तो सुबह के नाश्ते के समय लें या फिर दोपहर के स्नैक के रूप में. खाने के तुरंत बाद आम खाने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह है. इसलिए समय और तरीके का तालमेल ही आपको आम के असली फायदों से रूबरू कराएगा.

अंत में, यह ध्यान रखें कि आम केवल एक फल नहीं बल्कि सेहत का खजाना है, बशर्ते आप इसे प्रकृति के नियमों के अनुसार खाएं. तो अगली बार जब आप घर में आम लाएं, तो उसे सीधे थाली में सजाने के बजाय एक घंटे के लिए ठंडे पानी की बाल्टी में जरूर डालें. अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें और न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा बताए गए इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर गर्मियों के इस सुनहरे तोहफे का सुरक्षित आनंद लें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



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