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ईरान पर जमीनी हमला अमेरिका के लिए वियतनाम और अफगानिस्तान से भी बड़ी तबाही साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यहां कब्जा करने के लिए कम से कम 22 लाख सैनिकों की जरूरत होगी. उनका मानना है कि एयरस्ट्राइक से सत्ता बदलना नामुमकिन है और जमीनी जंग का नतीजा अमेरिका की सबसे बड़ी हार हो सकता है. ईरान की खतरनाक भौगोलिक बनावट, ऊंचे पहाड़ और विशाल रेगिस्तान इसे एक ‘अभेद्य किले’ में बदल देते हैं.
‘ईरान में एयरस्ट्राइक से सत्ता बदलना मुश्किल’, समझें ईरान युद्ध का जमीनी समीकरण. (AI जेनरेटेड फोटो)
नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘स्पेशल मिलिट्री कैंपेन’ जारी है. शुक्रवार को लगातार छठा दिन रहा जब इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका ने तेहरान को निशाना बनाया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि अगला ईरानी नेता उनकी पसंद का होना चाहिए. हालांकि, पूर्व पेंटागन अधिकारी और मिडिल ईस्ट एनालिस्ट आलिया अवादल्लाह के अनुसार केवल एयरस्ट्राइक के जरिए ईरान में सत्ता परिवर्तन करना लगभग असंभव है. उनका कहना है कि अगर रेजीम चेंज की कोशिश करनी हो तो जमीन पर सैन्य मौजूदगी जरूरी होगी. लेकिन यही वह कदम है जिसे अमेरिका उठाने से बच रहा है. ईरान में जब भी ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ यानी जमीनी हमले की बात आती है, तो बड़े-बड़े रणनीतिकारों के हाथ-पांव फूल जाते हैं. वजह है ईरान की जटिल टोपोग्राफी, विशाल भूभाग, पहाड़ी किलेबंदी, लंबी सप्लाई लाइन और असिमेट्रिक युद्ध क्षमता.
पूर्व अमेरिकी मरीन दिग्गज लुकास गेज ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा है कि आप ईरान की जमीन पर अपनी सेना उतार तो देंगे, लेकिन उन्हें जिंदा वापस लाना नामुमकिन होगा. यह देश प्राकृतिक रूप से एक ऐसा किला है, जहां घुसने का हर रास्ता मौत की घाटी से होकर गुजरता है.





