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America on Russian Oil: अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत को ‘बहुत अच्छा एक्टर’ बताते हुए कहा कि भारत ने पहले अमेरिकी अनुरोध पर रूसी तेल की खरीद रोकी थी. इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग को देखते हुए अमेरिका ने भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की छूट दी है. यह फैसला बढ़ती तेल कीमतों और मध्य पूर्व में तनाव के बीच लिया गया है.
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि पहले भारत अमेरिकी तेल से रूसी आयात की भरपाई करने की योजना बना रहा था. (फाइल फोटो Reuters)
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील सुर्खियों में है. इस डील पर बातचीत फानल स्टेज पर है. इधर अमेरिका ने बड़ा फैसला लेते हुए भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट का ऐलान किया है. इस ऐलान के बाद भारत के लिए यह राहत की खबर रही. लेकिन अमेरिका अपनी गीदड़भभकी और बयानों से बाज नहीं आ रहा है. पहले भारत में अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत के साथ ‘चीन वाली गलती’ नहीं दोहराने की बात कही और अब अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ‘इंडियन बहुत अच्छे एक्टर हैं.’ दरअसल दुनिया की सियासत में तेल की राजनीति हमेशा से सबसे ताकतवर हथियार रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूसी तेल को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. इसी बीच भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखा. लेकिन अमेरिका ने ट्रेड डील में शर्त रखी कि अब भारत को रूस की जगह अमेरिका से तेल खरीदने होंगे. अगर भारत ऐसा नहीं करता है तो भारत पर ज्यादा टैरिफ लगेगा.
कुछ दिनों पहले जो अमेरिका भारत से रूसी तेल खरीदने को लेकर नाराज नजर आता था. लेकिन अब वही अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट देने का ऐलान कर रहा है. स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा कि अमेरिका ने पहले भारत से प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना रोकने को कहा था और भारत ने उस अनुरोध का सम्मान भी किया. लेकिन अब वैश्विक तेल बाजार में बढ़ते दबाव को देखते हुए अमेरिका खुद ही भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे रहा है. यही वजह है कि सवाल उठ रहा है क्या अमेरिका मजबूरी में भारत के लिए रेड कार्पेट बिछा रहा है?
स्कॉट बेसेंट का बयान और बदली अमेरिकी रणनीति
- अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स बिजनेस के कार्यक्रम में कहा कि भारत ने पहले अमेरिकी अनुरोधों का सम्मान किया था. अमेरिका ने भारत से कहा था कि वह प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद बंद करे और भारत ने ऐसा किया भी. बेसेंट के मुताबिक इसी सहयोग को देखते हुए अब अमेरिका भारत को अस्थायी राहत दे रहा है.
- उन्होंने कहा कि अमेरिका ने 30 दिनों की छूट दी है, इससे समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल को भारत खरीद सके. इसका उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में अचानक पैदा होने वाली कमी को कम करना है. बेसेंट ने कहा कि समुद्र में अभी भी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित रूसी तेल मौजूद है और अगर उसे बाजार में आने दिया जाए तो इससे आपूर्ति बढ़ सकती है.
- वहीं उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत अमेरिकी तेल से रूसी आयात की भरपाई करने की योजना बना रहा था. लेकिन वैश्विक बाजार में अस्थायी दबाव को कम करने के लिए अमेरिका ने खुद ही भारत को रूसी तेल लेने की अनुमति दी. यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत ने पहले अमेरिकी अनुरोधों का सम्मान किया था.
स्कॉट बेसेंट ने भारत को लेकर ‘बहुत अच्छे एक्टर’ क्यों कहा?
स्कॉट बेसेंट का यह बयान दरअसल भारत के उस रवैये की ओर इशारा करता है जब अमेरिका ने भारत से रूसी तेल खरीद कम करने का अनुरोध किया था. बेसेंट के अनुसार भारत ने उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों और अनुरोधों का सम्मान किया था. इसलिए उन्होंने भारत को ‘बहुत अच्छे एक्टर’ कहा. यह शब्द यहां सहयोगी देश के रूप में भारत के व्यवहार की तारीफ के तौर पर इस्तेमाल किया गया, हालांकि इसके पीछे अमेरिकी रणनीतिक हित भी साफ दिखाई देते हैं.
अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट क्यों दी?
अमेरिका ने भारत को अस्थायी तौर पर रूसी तेल खरीदने की अनुमति इसलिए दी है क्योंकि वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ रहा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा चिंताओं के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाने के लिए अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल को भारत जैसे देशों को बेचने की अनुमति दी है.
क्या इससे वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार अगर बड़ी मात्रा में समुद्र में मौजूद रूसी तेल बाजार में आता है तो इससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ सकती है. इससे तेल की कीमतों में अचानक उछाल को रोका जा सकता है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं. अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं.
क्या अमेरिका की यह नीति स्थायी है?
अभी अमेरिका ने सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है. इसका मकसद फिलहाल वैश्विक बाजार में तत्काल दबाव को कम करना है. भविष्य में अमेरिका फिर से सख्त प्रतिबंध लागू कर सकता है. इसलिए यह नीति स्थायी नहीं बल्कि परिस्थितियों के अनुसार लिया गया एक अस्थायी फैसला माना जा रहा है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें





