अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए गए हमले के पीछे अपने खिलाफ रची गई हत्या की साजिश का भी जिक्र किया था. ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान से जुड़े तत्व उनकी हत्या की योजना बना रहे थे. ट्रंप ने आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या को लेकर कहा था, ‘इससे पहले कि वो मुझे मारते हैं. मैंने उन्हें मार दिया.’ यहां ट्रंप का इशारा उनकी इसी हत्या की साजिश की तरफ था, जिसमें अब पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को दोषी ठहराया गया है.
कैसे रची रची हत्या की साजिश?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आसिफ मर्चेंट अप्रैल 2024 में अमेरिका पहुंचा था. जून में उसने न्यूयॉर्क में ऐसे लोगों से मुलाकात की, जिन्हें वह सुपारी किलर समझ रहा था. हालांकि वे असल में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अंडरकवर अधिकारी थे. मर्चेंट ने कथित तौर पर वहां एक अमेरिकी राजनेता या सरकारी अधिकारी की हत्या करवाने के लिए 5,000 डॉलर एडवांस भी दिए थे. उसकी योजना थी कि वह अमेरिका छोड़ने के बाद हत्या का आदेश देगा, ताकि संदेह उससे दूर रहे.
फिर कैसे नाकाम हुई साजिश?
मर्चेंट ने न्यूयॉर्क में अपने परिचित नदीम अली नाम के व्यक्ति से संपर्क किया था, जिसे वह इस मिशन में सहयोगी बनाना चाहता था. लेकिन नदीम अली ने इस पूरी साजिश की जानकारी अमेरिकी एजेंसियों को दे दी और वह उनका सीक्रेट सोर्स बन गया.
इसके बाद एफबीआई और अन्य एजेंसियों ने अंडरकवर ऑपरेशन चलाया. जून के मध्य में मर्चेंट जिन लोगों से मिला था, वे असल में एजेंसियों के अधिकारी थे. इसी दौरान उसने दस्तावेज चोरी, विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और एक ‘राजनीतिक व्यक्ति’ की हत्या कराने की योजना विस्तार से बताई.
मर्चेंट का क्या-क्या था मिशन?
अदालती दस्तावेजों के अनुसार मर्चेंट का मिशन सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं था. उसने अपने सहयोगियों को तीन अलग-अलग काम सौंपने की बात कही थी:
- लक्ष्य के घर से दस्तावेज या यूएसबी ड्राइव चोरी करना
- राजनीतिक रैलियों में विरोध प्रदर्शन करवाना
- किसी अमेरिकी नेता या अधिकारी की हत्या कराना
मर्चेंट ने यह भी कहा था कि जिस व्यक्ति को निशाना बनाया जाएगा, उसके आसपास कड़ी सुरक्षा होगी. इसलिए योजना को बेहद सावधानी से अंजाम देना होगा.
IRGC के लिए करता था काम
जांच में सामने आया कि मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में IRGC के लिए काम करना शुरू किया था. पाकिस्तान में उसे जासूसी और काउंटर-सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई थी, ताकि वह निगरानी से बच सके. इसके बाद वह कई बार ईरान गया और अपने हैंडलर से मुलाकात की. 2023 में उसे अमेरिका भेजा गया, जहां उसका काम ऐसे लोगों की तलाश करना था जिन्हें भर्ती कर IRGC के लिए काम कराया जा सके.
इंटरनेट से जुटाता था जानकारी
अधिकारियों के मुताबिक मर्चेंट इंटरनेट पर अमेरिकी राजनीतिक रैलियों की जानकारी भी जुटा रहा था. वह सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विवरण अपने IRGC हैंडलर को भेजता था, ताकि आगे की योजना बनाई जा सके.
अमेरिकी एजेंसियों ने जुलाई 2024 में आसिफ मर्चेंट को गिरफ्तार कर लिया था. अब संघीय जूरी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. ट्रंप के बयान और इस मर्डर प्लॉट के सामने आने के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि इस एक शख्स के कारण दुनिया आज युद्ध के मुहाने पर पहुंच गई है.





